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4 जून को मुक्तिबोधः स्वदेश की खोज का लोकार्पण
4 जून को मुक्तिबोधः स्वदेश की खोज का लोकार्पण
रायपुर. देश के नामचीन लेखक और संस्कृतिकर्मी 4 जून को छत्तीसगढ़ की राजधानी में मौजूद रहेंगे. इस दिन शाम पांच बजे रायपुर के वृंदावन हॉल में जन संस्कृति मंच की रायपुर ईकाई द्वारा प्रसिद्ध विचारक रामजी राय की पुस्तक-मुक्तिबोध:स्वदेश की खोज़ का लोकार्पण एवं समीक्षा का कार्यक्रम रखा गया है.
इस कार्यक्रम में लेखक रामजी राय के अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष और आलोचक प्रणय कृष्ण, प्रोफेसर सियाराम शर्मा भिलाई, जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह गोरखपुर, नई दिल्ली से आलोचना के संपादक आशुतोष कुमार, छत्तीसगढ़ साहित्य परिषद के अध्यक्ष ईश्वर सिंह दोस्त रायपुर, युवा कवि-आलोचक बसंत त्रिपाठी इलाहाबाद, प्रेमशंकर सिंह आगरा मौजूद रहेंगे. कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य जसम रायपुर ईकाई के अध्यक्ष आनंद बहादुर देंगे. वहीं अजुल्का सक्सेना और वसु गंधर्व द्वारा मुक्तिबोध की कविता का सस्वर पाठ होगा. कार्यक्रम का संचालन युवा लेखक भुवाल सिंह करेंगे जबकि आभार प्रदर्शन जसम के सचिव मोहित जायसवाल करेंगे. कार्यक्रम में विशेष तौर पर समकालीन जनमत की प्रबंध संपादक मीना राय,संस्कृतिकर्मी अनीता त्रिपाठी इलाहाबाद, रुचि बाजपेयी लखनऊ, डीपी सोनी बलिया उत्तर प्रदेश, केके पांडे संपादक जनमत, दीपक सिंह, डॉ.कामिनी अंबिकापुर , संजय जोशी नवारुण प्रकाशन दिल्ली, कैलाश बनवासी दुर्ग, कल्पना मिश्रा, नरोत्तम शर्मा, इंद्र कुमार राठौर, दीक्षित भीमगड़े, मीता दास भिलाई, अंजनकुमार, अभिषेक पटेल, अंबरीश त्रिपाठी, अमित चौहान, आलोक कुमार, अखिलेश एडगर, वंदना शर्मा, विनीता, तत्पुरूष सोनी के अलावा अंचल के अनेक लेखक और संस्कतिकर्मी उपस्थित रहेंगे. कार्यक्रम में नवारुण प्रकाशन और समकालीन जनमत की तरफ से पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी.इस महत्वपूर्ण आयोजन में हिस्सेदारी दर्ज करने के बाद लेखक और संस्कृतिकर्मी 5 से 7 जून तक बस्तर भ्रमण पर जाएंगे.
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रमन सिंह और उसके बेटे ने अर्जित की अकूत संपत्ति...हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
बिलासपुर.आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह और उनके पुत्र अभिषेक सिंह के खिलाफ हाईकोर्ट ने एक याचिका स्वीकार कर ली है. हाईकोर्ट ने डाक्टर रमन सिंह के अलावा अभिषेक सिंह और संबंधित पक्षों से छह हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के आदेश दिया है. जस्टिस आरसी सामंत की एकल पीठ ने कांग्रेस नेता विनोद तिवारी की याचिका पर सुनवाई की.याचिकाकर्ता ने बताया कि सांसद बनने के बाद अभिषेक सिंह की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ है. उनका नाम पनामा पेपर्स में भी शामिल था. प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी उनके खिलाफ एक शिकायत को जांच के लिए राज्य शासन को भेजा था.
याचिकाकर्ता ने बताया कि डाक्टर रमन सिंह 2003 से 2018 तक छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे. वर्ष 1998 में चुनाव हारने के बाद रमन सिंह कर्ज में थे. बाद में वे वर्ष 2003 से वर्ष 2018 तक मुख्यमंत्री के पद पर रहे. इनके परिवार के पास कोई आय का कोई खास स्रोत नहीं है. मगर उनके द्वारा चुनावी शपथ पत्र में सोना, जमीन, और लाखों रूपए की जानकारी दी गई थी. ये सब आया कहां से इसकी जानकारी नहीं है. तिवारी ने बताया कि अभिषेक सिंह ने अपने पिता, और तत्कालीन मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के प्रभाव के चलते काफी संपत्ति अर्जित की है. यह उनके द्वारा चुनाव लड़ते समय आयोग को दिए हलफनामे से कहीं ज्यादा है. तिवारी ने ईओडब्ल्यू से अभिषेक सिंह की संपत्ति की जांच की मांग की है.
जस्टिस श्री सामंत ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. इस पूरे मामले में सीबीआई, ईडी, और ईओडब्ल्यू को भी छह हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता हर्ष परगनिया ने पैरवी की. याचिकाकर्ता ने बताया गया कि रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह, अपनी दोहरी पहचान रखते हैं. इस पहचान के जरिए उन्होंने तीन कंपनियां बनाई हैं और कई करोड़ रुपये का निवेश किया है. इन कंपनियों में से प्रत्येक की गतिविधियां बेहद संदिग्ध हैं और इसकी जांच की जरूरत है. एक कंपनी में इंटीग्रेटेड टेक-इंफ्रा बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड- अभिषेक सिंह ने विदेशी मुद्रा में पहले वर्ष में ही करोड़ों मूल्य के अपने शेयर बेचने से पहले, 90 फीसदी से अधिक हानि पर असामान्य लाभ अर्जित किया.
एक अन्य शैले एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, विभिन्न संदिग्ध निवेश-कई करोड़ों-के स्रोतों से किए गए थे. जिनका अभी तक पूर्ण रूप से खुलासा नहीं किया गया है.सिंह और उनकी पत्नी के स्वामित्व वाले मूल्यवान शेयरों को उनके मूल्य के एक छोटे से अंश पर बेचा गया था. तीसरी कंपनी-मुशिन इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड- और संबंधित कंपनियों पर एक नजदीकी नजर डालने से क्रॉस निवेश का पता चलता है, जिसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से शामिल धन के वास्तविक स्रोतों को छिपाना है. यहां भी हम कंपनियों में शेयरों की बिक्री को 97 फीसदी तक की अकथनीय हानि पर देखते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि व्यापार रसीदें बड़ी मात्रा में चल रही हैं, उनके पीछे के विवरण की आपूर्ति नहीं की गई है. इसे इस तथ्य में जोड़ें कि इनमें से कम से कम दो कंपनियों की फेमा उल्लंघन के लिए जांच की जानी चाहिए.हाईकोर्ट में स्वीकार की गई इस याचिका के बाद डाक्टर रमन सिंह और उनके बेटे की मुसीबत बढ़ सकती हैं. कहा जा रहा है कि इस जांच के दौरान उन अफसरों की भी लपेटे में लिया जा सकता है जो डाक्टर रमन सिंह के करीबी रहते हुए उनके द्वारा किए गए निवेश में भागीदार रहे हैं. कानून के जानकार का कहना है कि इस जांच की आग छत्तीसगढ़ के एक पूर्व मुख्य सचिव, एक भगोड़े पुलिस अफसर, जेल में बंद एक अफसर और संविदा में पदस्थ रहे एक प्रमुख अफसर तक भी पहुंच सकती हैं.इसके अलावा कई छिपे हुए निवेशकों का चेहरा भी उज़ागर हो सकता है.
कमाडेंट रमेश कुमार के मुख्य आथित्य में मनाया गया शौर्य दिवस
रायपुर. 9 अप्रैल शनिवार को ग्रुप केंद्र सीआरपीएफ रायपुर ने भिलई गांव,आरंग, कैम्पस परिसर में शौर्य दिवस समारोह मनाया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कमांडेंट रमेश कुमार थे. उन्होंने बल के सदस्यों के सरदार पोस्ट पर किए गए वीरता पूर्वक कामों को बड़ी शिद्दत से याद किया. उन्होंने कहा कि देश और समाज के लिए वीरता पूर्वक काम करना ही बल के सदस्यों की जवाबदारी है. उन्होंने देश में अमन-भाई-चारे के साथ देश शांति बनाए रखने की अपील की और कार्यक्रम में मौजूद सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शपथ भी दिलाई.
गौरतलब है कि 9 अप्रैल के दिन ही पाकिस्तान सेना की इन्फेंटरी ब्रिगेड ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की दो कम्पनियों की सरदार और टाक भारतीय सीमा चौकियों पर आक्रमण किया था. इस आक्रमण के बाद बल में मौजूद जवानों ने वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए आक्रमण करने वालों के मंसूबे को विफल कर दिया था. इस अवसर पर कमाडेंट रमेश कुमार ने सभी अधिकारियों,जवानों एवं उनके परिवार के सदस्यों को इस ऐतिहासिक दिवस के अवसर पर हार्दिक बधाई भी दी.
इस समारोह में बल के सदस्यों का मनोबल बढ़ाने के लिए खेल-कूद प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें बल के जवानों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. कार्यक्रम में विशेष रुप से सुंदर कुमार उप कमांडेन्ट, पी . प्रभाकर राव उप कमांडेन्ट, शशिभूषण सहायक कमांडेन्ट, सैयद नफीस अली सहायक कमांडेन्ट, श्रीमती पूनम नेगी सहायक कमांडेन्ट , पी बाबू राव सहायक कमांडेन्ट, केएमराय सहायक कमांडेन्ट एवं बल के अन्य अधिकारी व जवान उनके परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे.
पुलिस की होशियारी...पड़ गई भारी...रंगकर्मियों और पत्रकारों को थाने में नंगा खड़ा करने पर मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी और आईजी से मांगा जवाब
भोपाल. मध्यप्रदेश के सीधी जिले की कोतवाली थाने में स्थानीय रंगकर्मियों और पत्रकारों को नंगा खड़ा करके उनकी तस्वीरों को वायरल करने का मामला पुलिस को भारी पड़ गया है. मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जैन ने पुलिस महानिदेशक और रीवा के पुलिस महानिरीक्षक को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है. घटना के बाद एडिटर्स आफ गिल्ड ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को कड़ा पत्र लिखा है. खबर है कि इस मामले में देशभर के पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से पीड़ित पक्ष से जुड़े लोग सीधी के पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार, थाना प्रभारी मनोज सोनी और एसआई अभिषेक परिहार के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर करने पर भी विचार कर रहे हैं.
गौरतलब है कि सीधी में कुछ दिन पहले रंगकर्मी नीरज कुंदेर को पुलिस ने एक मामले में गिरफ्तार किया था. इस गिरफ्तारी के विरोध में इलाके के पत्रकार कनिष्क तिवारी ने खबर चलाई थी और स्थानीय रंगकर्मियों ने विरोध जताया था. इस विरोध के बाद कोतवाली थाने के प्रभारी मनोज सोनी ने रंगकर्मियों और पत्रकारों को गिरफ्तार कर बुरी तरह से पीटा और फिर उन्हें अंडरवियर में खड़ा कर उनकी तस्वीरों को सोशल मीडिया में वायरल किया. इस घटना के बाद शिवराज सरकार और पुलिस के खिलाफ देशव्यापी गुस्सा फूट पड़ा. देश के ज्यादातर लोग वायरल हुई इन तस्वीरों को मानवीय गरिमा के खिलाफ बताकर थू-थू करते रहे. सोशल मीडिया में सरकार की फजीहत को देखने के बाद कल थाना प्रभारी मनोज सोनी और एसआई अभिषेक परिहार को लाइन हाजिर कर दिया गया था. हालांकि इस कार्यवाही को लोग अब भी नाकाफी ही बता रहे हैं.
बताते हैं कि सीधी से भाजपा के स्थानीय विधायक केदारनाथ शुक्ला की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक यू ट्यूब चैनल को संचालित करने वाले कनिष्क तिवारी और उनके कैमरामैन ने खबर चलाई थीं. बताया जाता है कि रंगकर्मी नीरज कुंदेर को भी विधायक और उसके पुत्र के इशारे पर ही गिरफ्तार किया गया था. कुंदेर अभी भी जेल में हैं. जब सीधी में कुंदेर की गिरफ्तारी पर विरोध प्रदर्शन हुआ तो कनिष्क तिवारी ने एक पत्रकार की हैसियत से समाचार को कव्हरेज किया, लेकिन उन्हें और प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर थाने में नंगा बिठा दिया गया. खबर हैं थाने में सभी पत्रकारों और रंगकर्मियों को विधायक के पालित गुंडों और एक शराब कारोबारी के सामने ही बुरी तरह से मारा-पीटा गया. थाने में मौजूद थाना प्रभारी ने वहां मौजूद पुलिस कर्मी अभिषेक सिंह परिहार और अन्य लोगों को तस्वीरें खींचने के लिए कहा और फिर तस्वीर वायरल कर दी गई.
रंगकर्मियों और पत्रकारों को थाने में खड़ा किया नंगा... देशभर में मचा बवाल
भोपाल. मध्यप्रदेश के सीधी जिले से एक शर्मनाक घटना सामने आई हैं. इस जिले में कुछ दिन पहले रंगकर्मी नीरज कुंदेर को गिरफ्तार किया गया था. जब नीरज की गिरफ्तारी के विरोध में इलाके के पत्रकारों ने खबर चलाई और स्थानीय रंगकर्मियों ने विरोध जताया तो ना केवल उन्हें गिरफ्तार किया गया ब्लकि उनका जुलूस निकालकर उन्हें थाने में लगभग नग्न अवस्था में खड़ा कर उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल कर दी गई.तस्वीरों के वायरल होने के बाद प्रदेश की शिवराज सरकार और पुलिस के खिलाफ देशव्यापी गुस्सा फूट पड़ा है. लोग-बाग वायरल हुई इन तस्वीरों को मानवीय गरिमा के खिलाफ बताकर थू-थू कर रहे हैं. खबर हैं कि देश के कई हिस्सों के रंगकर्मी और पत्रकार सीधी जाकर विरोध प्रकट करने की तैयारी में जुट गए हैं.
अभी बलिया के पत्रकारों का विरोध प्रदर्शन शांत भी नहीं हुआ है कि भाजपा शासित मध्यप्रदेश से रंगकर्मियों और पत्रकारों की गिरफ्तारी की बड़ी खबर सामने आ गई हैं. बताते हैं कि सीधी से भाजपा के स्थानीय विधायक केदारनाथ शुक्ला की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक यू ट्यूब चैनल को संचालित करने वाले कनिष्क तिवारी और उनके कैमरामैन ने खबर चलाई थीं. जब रंगकर्मी नीरज कुंदेर को गिरफ्तार किया गया तब पूरे सीधी में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था. कनिष्क तिवारी रंगकर्मियों के विरोध-प्रदर्शन को कव्हरेज करने पहुंचे तो पुलिस ने उनके साथ-साथ रंगकर्मियों को भी गिरफ्तार कर लिया.खबर हैं थाने में सभी पत्रकारों और रंगकर्मियों को विधायक के पालित गुंडों और एक शराब कारोबारी के सामने बुरी तरह से पीटा गया. थाने में मौजूद थाना प्रभारी ने वहां मौजूद पुलिस कर्मी अभिषेक सिंह परिहार और अन्य लोगों को फोटो खींचने के लिए कहा और फिर तस्वीर वायरल कर दी गई.
कनिष्क तिवारी का कहना है कि रंगकर्मी नीरज कुंदेर कला आंदोलन के एक प्रमुख स्तंभ हैं. स्थानीय पुलिस ने विधायक केदारनाथ शुक्ला के इशारों पर नीरज कुंदेर की फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाई और फिर उन्हें विधायक के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.जब उनकी गिरफ्तारी को लेकर विरोध प्रारंभ हुआ तो कव्हरेज करने गए पत्रकारों को भी लपेट दिया गया. कनिष्क ने फेसबुक पर एक वीडियो जारी कर पुलिस पर झूठे मुकदमे दर्ज करने का आरोप भी लगाया है. कनिष्क का कहना है कि उसे और उसके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकी दी जा रही हैं. वैसे इस घटना के बाद भाजपा और उसकी सरकार की रक्षा में लगे हुए गोदी मीडिया के पत्रकार भी सक्रिय हो गए हैं. गोदी मीडिया की खबरों में यह कहा जा रहा है कि कनिष्क तिवारी यू ट्यूब चैनल को चलाता है. वह शुद्ध पत्रकार नहीं है. कभी किसी बड़े बैनर में नहीं रहा. वह पहले भी इधर-उधर प्रवेश करता रहा है तो उसके खिलाफ मुकदमा चल रहा हैं...आदि-आदि.
सीधी में हुई इस घटना के बाद देश के प्रसिद्ध पत्रकार रवीश कुमार ने अपने फेसबुक वॉल पर फिल्म आरआरआर के एक पोस्टर को शेयर करते हुए अपने अंदाज में कुछ यूं लिखा है-चलिए नाचो नाचो पर नाचिए. डांस आना चाहिए. क्या शानदार तालमेल है दोनों का. गति बिजली के जैसी और उल्लास बारिश के जैसा. ज़्यादा तनाव न लें. डांस करें. पत्रकारों को नंगा किया जा रहा है. एक दिन पाठकों दर्शकों को भी ये नंगा कर दिया जाएगा... इसलिए नाचिए. सीधी जिले के एसएसपी मुकेश कुमार का कहना है कि जो तस्वींरें वायरल हुई है वह उनके संज्ञान में हैं. यह तस्वीरें किस हालात में खींची गई हैं इसकी जांच की जा रही हैं. यदि कुछ भी नियम विरुद्ध निकला तो थाना प्रभारी समेत अन्य पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा. इधर खबर है कि मामले में तूल पकड़ने के बाद एसएसपी ने थाने के प्रभारी मनोज सोनी और एसआई अभिषेक परिहार को लाइन हाजिर कर दिया है.
पत्रकारों के मुख्यमंत्री दोस्त ने रखा पत्रकारों का ख्याल...अधिमान्यता नवीनीकरण की अवधि अब दो साल.
कवर्धा के पुलिस कप्तान उमेद सिंह ने सुनी जनता की समस्या...मौके पर ही कई मामलों का निराकरण
कवर्धा. पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा के निर्देशन तथा पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज दुर्ग ओपी पाल के मार्गदर्शन में रेंज के समस्त जिलों में आमजनता से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुनने एवं उसका उचित निराकरण करने के लिए पुलिस जनदर्शन कार्यक्रम का आयोजन करने निर्देशित किया गया है. इसके तहत 18 फरवरी शुक्रवार को कबीरधाम जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह के कुशल नेतृत्व में जिले के चारों अनुविभाग, कवर्धा, लोहारा, पंडरिया, बोड़ला, में जनदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने स्वयं पंडरिया अनुविभाग के जनदर्शन पंडरिया थाने पहुंचकर आम जनता की समस्याओं का निराकरण किया गया.इसके साथ ही कुछ प्रकरण अन्य विभागों से संबंधित होने से उक्त शिकायत पत्रों को संबंधित विभाग तक तत्काल निराकरण हेतु भेजने के लिए आश्वासन दिया गया.
थाना परिसर में ही कोटवार सम्मान समारोह एवं बचपन बचाओ बच्चे पढ़ाओ अभियान का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया. इसमें पंडरिया क्षेत्र के ग्राम कोटवारों को नेम प्लेट, डायरी पेन तथा सफेद गमछा व श्रीफल प्रदान कर सम्मानित कर ग्राम कोटवारों को क्षेत्र को पूर्णता अपराध मुक्त बनाने पुलिस का हरसंभव मदद करने तथा समय-समय पर थाना आकर उपस्थिति देने निर्देशित किया गया. क्षेत्र के घुमंतू बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कॉपी, किताब, स्कूल बैग, पेन एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं का वितरण कर मन लगाकर पढ़ाई करने तथा अपना एवं परिवार जनों का नाम रोशन करने कहा गया. इस कार्यक्रम में पंडरिया अनुविभागीय अधिकारी नरेंद्र कुमार बेंताल, निरीक्षक मुकेश यादव, थाना पांडातराई निरीक्षक सुशील मलिक, थाना प्रभारी कुकदुर निरीक्षक मुकेश सोम, थाना प्रभारी कुंण्डा निरीक्षक श्री बीपी तिवारी, स्टेनो युवराजा असटकर, पुलिस चौकी दमापुर प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक रघुवंश पाटिल, महिला सेल तथा चाइल्डलाइन टीम एवं क्षेत्र के सम्माननीय नागरिक, एवं क्षेत्रवासी तथा ग्राम कोटवार एवं छोटे बच्चे उपस्थित थे.
अमित शाह ने योगी को निपटा दिया अब मोदी निपटाएंगे...मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की टिप्पणी चर्चा में
रायपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अभी थोड़ी देर पहले फेसबुक पेज पर एक जोरदार टिप्पणी लिखी है. बघेल ने लिखा है- अमित शाह ने यूपी चुनाव के पहले और दूसरे चरण में योगी को निपटा दिया है. छठें और सातवें चरण में नरेंद्र मोदी निपटाएंगे. देखना यह है कि दोनों को योगी निपटाते हैं या दोनों मिलकर योगी को.
बघेल की इस टिप्पणी की सार्वजनिक होते ही फेसबुक पर कमेंट करने वालों की बाढ़ आ गई है. हालांकि मुख्यमंत्री ने जो टिप्पणी की है वह यथार्थ के करीब है. पिछले कुछ समय राजनीतिक धुंरधर यह बात कहते आए हैं कि इस बार योगी की नैय्या पार लगना कठिन है. एक वजह तो सरकार की जनविरोधी नीतियां है तो दूसरी वजह योगी का प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने का ख्वाब भी है. सब जानते हैं कि योगी हिन्दुत्व का कट्टर चेहरा बनकर संघ के एकदम करीब जा पहुंचे हैं. कहा जाता है कि संघ भी योगी को पीएम के रुप में देखना चाहता है. जब योगी पीएम पद की दौड़ में शामिल हो जाएंगे तो फिर मोदी और शाह को कुछ तो करना ही होगा. गोदी मीडिया को छोड़कर यूपी की खाक छानने वाले वैकल्पिक मीडिया और विश्लेषकों का भी दावा है है कि इस बार यूपी में भाजपा बुरी तरह से परास्त होने वाली है. कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इस बार चुनाव में भाजपा सौ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी.पहले और दूसरे चरण के चुनाव में भाजपा बुरी तरह से पिछड़ गई है.
यूपी के पहले चरण में जिन 58 सीटों पर चुनाव हुआ वहां 2017 में भाजपा की लहर थीं. भाजपा ने यहां 53 सीटें जीतकर सपा, बसपा और राष्ट्रीय लोकदल को मुकाबले से बाहर कर दिया था, लेकिन इस बार भाजपा ने हार के डर से अपने कई लोगों की टिकट काट दी थीं. पहले चरण के चुनाव में नौ मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हैं. जो रिपोर्ट आ रही है उसमें कहा जा रहा है कि जनता ने मंत्रियों को भी सबक सीखा दिया है. किसान आंदोलन के बाद भाजपा के खिलाफ बगावती सुर और सपा-रालोद का गठबंधन मंत्रियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. कांग्रेस की दस्तक भी जबरदस्त है. जातीय समीकरणों से लेकर क्षेत्र में जनता के साथ व्यवहार दोनों ही मुद्दों पर योगी के खिलाफ नाराजगी देखने को मिली है.
इधर 14 फरवरी को नौ जिलों की जिन 55 सीटों पर चुनाव हुआ है उनमें से अधिकांश जिले मुस्लिम बाहुल्य है. पिछली बार भाजपा को 55 में से 38 सीटें मिली थीं, लेकिन विश्लेषक कहते हैं कि इस बार दूसरे चरम में चार-पांच सीटें मिल जाय तो बहुत ज्यादा है.
भाजपाई पृष्ठभूमि वाले अफसर के रसूख के सामने दिव्यांग महिला अफसर लाचार
रायपुर. प्रदेश में पंद्रह साल सत्तासीन रही भारतीय जनता पार्टी की पृष्ठभूमि वाले एक अफसर के रसूख के आगे एक दिव्यांग महिला अफसर लाचार नजर आ रही है. राज्य सरकार के आदेश को लेकर अपने नए विभाग में पहुंची इस दिव्यांग अफसर को विभागीय अधिकारी ज्वाइनिंग नहीं दे रहे हैं क्योंकि जिस अफसर के स्थान पर उसकी पदस्थापना की गई है, वह भाजपा पृष्ठभूमि का है और उसके रसूख के सामने विभागीय अफसर नतमस्तक हैं.
पूरा मामला छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का है, जहां बीते तीन साल के पदस्थ लेखाधिकारी मयंक गुप्ता को राज्य सरकार ने करीब दस रोज पहले संचालक, चिकित्सा शिक्षा में भेज दिया और उनके स्थान पर लोक निर्माण विभाग से चंद्रकिरण देवांगन को छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में लेखाधिकारी बनाकर पदस्थापना दी. राज्य सरकार के आदेश पर चंद्रकिरण देवांगन ने छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में जाकर अपनी ज्वाइनिंग दी परंतु उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दी गई क्योंकि बोर्ड के अफसर मयंक गुप्ता को रिलीव करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं.
चंद्रकिरण देवांगन दिव्यांग हैं तथा अब वे इस बात को लेकर परेशान हैं कि सरकार के आदेश पर ही वे टूरिज्म बोर्ड में काम करने आई थीं, परन्तु बोर्ड के अफसर उसे काम ही नहीं करने दे रहे हैं. दरअसल मयंक गुप्ता का सम्बंध पूर्व मुख्यमंत्री के निज सहायक रहे ओपी गुप्ता से है। इसलिए वे अपना तबादला रुकवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोड़ लगा रहे हैं. पिछले दिनों वे पूर्व मुख्यमंत्री के एक ससुराली रिश्तेदार को लेकर बोर्ड के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव वे भी मिले और तबादले को रुकवाने का आग्रह किया. बताया गया है कि विभाग के आला अफसरों के मौखिक आदेश पर मयंक गुप्ता को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है. इस खींचतान के कारण टूरिज्म बोर्ड का काम रुका हुआ है, जिसमें मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट भी शामिल है.
दरअसल मंडल में लेखाधिकारी की पदस्थापना प्रतिनियुक्ति पर होती है. भाजपा शासनकाल के अंतिम दिनों में मयंक गुप्ता को वित्त विभाग ने प्रतिनियुक्ति पर टूरिज्म बोर्ड भेजा था. अधिकतम समय सीमा तीन साल पूरी करने के कारण राज्य सरकार ने उन्हें टूरिज्म बोर्ड से संचालक, चिकित्सा शिक्षा के कार्यालय में पदस्थापना दी परंतु राज्य सरकार के आदेश के बाद भी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है.
राजेश मूणत के खिलाफ जबरदस्त लामबंदी... आदिवासी और सतनामी समाज भी धरना देने की तैयारी में !
छतीसगढ़ में ऐसा पहली बार होगा जब भाजपा के पूर्व मंत्री के घर के सामने खंखारकर थूंकेंगे लोग
पहले तो नाम पूछा और फिर गंदी-गंदी गाली देते हुए युवकों को पीटने लगे राजेश मूणत
रायपुर. गाली-गलौच करने और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के युवकों के साथ मारपीट करने के मामले में पूर्व मंत्री राजेश मूणत लगातार घिरते जा रहे हैं. सोमवार को राजीव भवन में कांग्रेस के मंत्री गुरू रूद्र कुमार, आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष जनक राम ध्रुव, प्रभारी महामंत्री संगठन चंद्रशेखर शुक्ला, कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने एक पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री को आड़े हाथों लिया.
मंत्री रूद्र गुरू ने कहा कि भाजपा नेता राजेश मूणत ने अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के दो युवकों के साथ गाली-गलौज कर मारपीट की है. जिन युवकों के साथ मारपीट की गई पहले उनका नाम पूछा गया और फिर उन्हें बुरी तरह मारा पीटा गया. हर हाल में राजेश मूणत पर एससी, एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए.
मंत्री ने बताया कि मुंगेली के दो युवक अपने कुछ काम के सिलसिले में मुझसे मिलने आये थे. वे जेल रोड में हमारे निवास के बाहर खड़े थे. पूर्व मंत्री ने बिना पुष्टि किए कि वे लोग कौन हैं? क्यों खड़े है? सिर्फ काली कपड़ा पहने थे इसलिए उन्हें मारपीट दिया. जबकि युवकों ने उन्हें बताया कि वे मंत्री जी से मिलने आये है तब भी उनके साथ गाली-गलौच और मारपीट की गई. यह सब राजेश मूणत और भाजपा की अनुसूचित जाति और जनजाति विरोधी मानसिकता को प्रदर्शित करता है. क्या केवल दो युवक केंद्रीय मंत्री का विरोध करने आयेंगे यह समझने की बात है.
आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष जनक राम ध्रुव ने कहा कि मंत्री राजेश मूणत ने एससी, एसटी वर्ग के बेकसूर नौजवानों के साथ गाली-गलौच व मारपीट कर राजनीति करने की कवायद की है. उनके खिलाफ एससी, एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होना चाहिए. प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री संगठन चंद्रशेखर शुक्ला ने कहा कि भाजपा मूलरूप से विध्वंसक पार्टी है. पहले खुद कानून को तोड़ते है, उसके बाद धरना देते हैं. यह भाजपा का समाज विरोधी चरित्र है. मूणत और भाजपा नेताओं ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को दूषित करने की है.
कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मंत्री रहे राजेश मूणत ने अभद्रता की सारी सीमाओं को पार कर दिया है. सोशल मीडिया में जो अलग-अलग वीडियो वायरल हो रहे हैं उसमे साफ है कि ऐसा व्यक्ति जो इस प्रदेश में 15 साल मंत्री रहा है वह मां-बहन की गाली का बार-बार प्रयोग कर रहा है. कानून व्यवस्था को हाथ में लेने के लिए उत्सुक दिख रहा है. शुक्ला ने बताया कि कांग्रेस ने सिंधिया या भाजपा नेता को काले झंडे दिखाने का कोई घोषित कार्यक्रम जारी नहीं किया था और ना ही एनएसयूआई, युवा कांग्रेस अथवा किसी मोर्चा संगठन का कोई पदाधिकारी विरोध करने गया था. भाजपा ने गलत राजनीतिक परंपरा की शुरुआत की है जो अनुचित है. ऐसी परंपराओ की प्रतिध्वनि और प्रतिक्रिया होनी थी जो स्वाभाविक है. इधर सूत्रों का दावा है कि मूणत के खिलाफ जल्द ही अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एससी एसटी एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध हो सकता है.