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संचालक की अनुमति लिए बगैर कर दी कर्मचारियों की नियुक्ति... उपसंचालक भगत को नोटिस

रायपुर. संस्कृति एवं पुरातत्व संचालनालय में एक से बढ़कर कारनामे होते हैं. जो कोई भी इस संचालनायल में पदस्थ होता है वह यहां से जल्द से जल्द छुटकारा पाने की कवायद में जुट जाता है. वैसे तो यह संचालनालय गढ़ कलेवा से सटा हुआ है. कभी निकट भविष्य में गढ़कलेवा शायद बंद भी हो जाय, लेकिन इस संचालनालय में जिस तरह के कारनामे होते हैं उसे देखकर यह लगता नहीं है कि गड़बड़ी और अनियमितताओं के इस गढ़ को कभी कोई मंत्री ध्वस्त कर पाएगा ? बहरहाल लंबे समय से इस संचालनालय में उपसंचालक की हैसियत से पदस्थ जेआर भगत सुर्खियों बटोर रहे हैं. उनकी ढ़ेरों शिकायतें मुख्यमंत्री, संस्कृति मंत्री और उच्चाधिकारियों तक पहुंची है. फिलहाल उनके द्वारा दो कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला चर्चा में हैं. बताया जाता है कि उन्होंने संचालक से अनुमति लिए बगैर देवेंद्र नाम के एक शख्स और एक महिला कर्मचारी की नियुक्ति कर दी थीं. इस मामले में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालनालय के संचालक ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है जिसका कोई जवाब उनकी तरफ से नहीं दिया गया है.

ज्ञात हो कि किसी भी दैनिक वेतनभोगी को नियुक्त करने का अधिकार संचालक के पास ही होता है. इतना ही नहीं जो दैनिक वेतनभोगी होता है उसका स्थानीय होना अनिवार्य है. दैनिक वेतनभोगी का स्थानांतरण भी नहीं किया जा सकता, लेकिन दोनों कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले में सारे नियम-कानून ताक पर रख दिए गए. उपसंचालक भगत वर्ष 2011 में  जब जगदलपुर में पदस्थ थे तब उन्होंने अपने हस्ताक्षर से देवेंद्र कुमार की नियुक्ति का आदेश निकाला और फिर सीधे उसकी सूचना संचालक को भेज दी. उन्होंने दूसरी नियुक्ति 13 जनवरी 2012 को की. इस तिथि में जिस महिला की नियुक्ति की गई वह कस़डोल की रहने वाली हैं. वर्ष 2015 में भगत रायपुर मुख्यालय में आ गए तो उन्होंने एक बार फिर अपने आदेश से दोनों कर्मचारियों का तबादला आदेश जारी किया और उन्हें कोरबा के जिला पुरातत्व संघ संग्रहालय में अटैच कर दिया. नियमानुसार किसी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी का तबादला नहीं हो सकता था. दोनों कर्मचारियों ने अपनी उपस्थिति वहां दी और उनका वेतन भी वहां से निकलने लगा. बताते हैं इस उठापटक में बस्तर में पदस्थ एक अफसर अमृतलाल को नाहक ही परेशानी का सामना करना पड़ा था. उन्होंने कर्मचारियों की नियुक्ति सहित पूर्व में किए गए अन्य कामकाज पर सवाल उठाए तो उन पर धारा 376 के तहत मामला दर्ज हो गया. पैकरा जैसे-तैसे अपनी जान बचाने भागते-फिरते रहे. अब जाकर उन्होंने भी शिकायत का मन बना लिया है. संचालक की अनुमति के बगैर कर्मचारियों की नियुक्ति और नोटिस को लेकर पुरातत्व संचालनालय के उपसंचालक जेआर भगत से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.

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चिटफंट घोटालाः पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा,आईएएस रीना बाबा साहेब कंगाले, कोमल परदेसी, भीमसिंह, नीलकंठ टेकाम, अमृतलाल ध्रुव और रतनलाल डांगी पर एफआईआर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में जब भाजपा की सरकार थी तब आम लोगों की गाढ़ी-मेहनत की कमाई पर डाका डालने वाली चिटफंड कंपनियों को सरकार के मंत्रियों और अफसरों ने प्रश्रय दे रखा था. अभी कुछ दिन पहले अनमोल इंडिया नाम की एक चिटफंड कंपनी को प्रश्रय देने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के पुत्र और राजनांदगांव के पूर्व सांसद अभिषेक सिंह पर अंबिकापुर में मामला दर्ज किया गया था. फिलहाल अंबिकापुर की जिला अदालत से होकर यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर जा पहुंचा है. इधर महासमुंद के खल्लारी में भी पुलिस ने पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, आईएएस रीना बाबा साहेब कंगाले, सिद्धार्थ कोमल परदेसी, भीमसिंह, नीलकंठ टेकाम, अमृतलाल ध्रुव और सहित सनसाइन चिटफंड कंपनी के निदेशक, संचालक और प्रचारक बनवारी लाल, वकील सिंह, राजीव गिरी पर मामला दर्ज कर लिया है. खबर है कि पुलिस अफसर रतनलाल डांगी पर भी खल्लारी थाने में एक हफ्ते पहले मामला दर्ज किया गया है. इधर एफआईआर में कई बड़े अफसरों के नाम आने से हडकंप मच गया है. पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी का कहना है कि यह मामला कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज किया गया है. उन्होंने बताया कि पूरे मामले में रायपुर आईजी से रिपोर्ट मांगी गई है. यह तो देखना ही होगा कि चिटफंड कंपनियों के साथ किस-किस अफसर ने किस तरह की भूमिका निभाई है. चिटफंड कंपनी से उनके किस तरह के संबंध रहे हैं.

बताते हैं कि एक ग्रामीण दिनेश पानीकर ने सनसाइन इन्फ्रा बिल्ड कार्पोरेशन लिमिटेड में लगभग 13 लाख 11 हजार 881 रुपए अपने परिजनों के नाम पर जमा किए थे. कंपनी ने साढ़े छह साल में रकम दोगुना होने का वायदा किया था. पानीकर को तब झटका लगा जब कंपनी ताला लगाकर फरार हो गई. दिनेश अपनी रकम को पाने के लिए भटकता रहा. उसने इस मामले में थाना प्रभारी से लेकर पुलिस अधीक्षक सबसे शिकायत की थी, लेकिन तब किसी ने उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया. गौरतलब है कि इस मामले में जिन अफसरों का नाम सामने आया है वे सभी भाजपा के शासनकाल में सरकार की नाक के बाल बने हुए थे. एक अफसर पर बगैर अनुमति के विदेश जाने का आरोप लगा था. तब इस बात का खूब हल्ला मचा था कि अफसर ने सरकार के एक करीबी के काले धन को ठिकाने लगाने विदेश का दौरा किया है. यह भी कहा गया था कि छत्तीसगढ़ में संविदा में पदस्थ अफसर ने दुबई में एक बेशकीमती आलीशान मकान खरीदा था जिसकी तमाम औपचारिकताएं यहां के अफसर ने वहां जाकर पूरी की थीं. एक अन्य अफसर जो राजनांदगांव में पदस्थ था वह मंत्रिमंडल के एक सदस्य को मम्मी-डैडी कहता था. पूर्व सरकार में एक अफसर की पत्नी शौचालय बनवाने के नाम पर साफ-सफाई के खेल में लगी हुई थीं. अफसर अपने काम की वजह से कम और अपनी पत्नी के प्रचार की वजह से ज्यादा सुर्खियों में रहा. एक अफसर पर अब भी इधर-उधर खबरें प्लांट करवाने का आरोप है. बताते हैं कि यह अफसर दुर्ग जिले में पदस्थ एक वरिष्ठ पुलिस अफसर को बदनाम करने के खेल में लगा हुआ है. इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से भी हुई है.

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वन अफसर के होटल में सेंट्रल एक्साइज का छापा

रायपुर. वीआईपी रोड़ में एक वन अफसर का भव्य होटल है. खबर है कि इस होटल में सोमवार को सेंट्रल एक्साइज ने छापा मारा है. हालांकि वन अफसर ने काफी समय पहले इस होटल को किराए पर दे दिया था. नियमानुसार यह कार्रवाई किराएदार पर की गई है, लेकिन होटल पर मालिकाना हक वन अफसर और उसके परिवार वालों का ही है. यहां यह बताना लाजिमी है कि प्रदेश में जब भाजपा की सरकार थीं तब यह अफसर संविदा में पदस्थ सुपर सीएम के नाम से विख्यात एक अफसर के बेहद करीब था. एक अन्य अफसर के करीब रहने की वजह से यह अफसर वन विभाग के बजाय लंबे समय तक मंत्रालय में पदस्थ रहा. प्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई तब इस अफसर को वापस वन विभाग भेजा गया. खबर हैं वन अफसर ने भाजपा के शासनकाल में कई जगह जमीनों की खरीदी और करोड़ों की संपत्ति अर्जित की. वन अफसर के होटल में एक बार इंकम टैक्स का छापा भी पड़ चुका है. खबर है कि सेंट्रल एक्साइज ने लंबे समय तक जीएसटी नहीं पटाने की वजह से छापा मारा है. पिछले कुछ सालों में इस होटल में सर्वाधिक शादियां हुई है. इधर एक शराब कारोबारी सुभाष शर्मा के लाभांडी स्थित जमीन को इंकम टैक्स ने कुर्क कर लिया है. बताया जाता है शराब कारोबारी ने दस करोड़ से अधिक का टैक्स अदा नहीं किया है.
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अंडा है या बम !

राजकुमार सोनी

छत्तीसगढ़ में इन दिनों अंडा राजनीति चल रही है. दरअसल छत्तीसगढ़ की सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन में गर्भवती माताओं और बच्चों को पोषक आहार के रुप में अंडा देना चाहती है. प्रदेश के आदिवासी और प्रगतिशील जनसंगठन सरकार के इस फैसले का जोरदार ढंग से समर्थन कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष को इस बात की आशंका है कि अगर किसी बच्चे ने अंडे को आलू समझकर खा लिया तब क्या होगा? कहने-सुनने में यह बात हास्यास्पद तो लगती है, मगर यही हास्यास्पद स्थिति फिलहाल छत्तीसगढ़ में विरोध की राजनीति का सच है.

भाजपा ने इस बार मानसून सत्र में स्कूलों में अंडा परोसने के सैद्धांतिक फैसले के खिलाफ काम रोको प्रस्ताव प्रस्तुत किया. यहां यह बताना लाजिमी है कि काम रोको प्रस्ताव तब लाया जाता है जब वास्तव में कोई बड़ी घटना घटित हो जाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में विपक्ष का काम रोको प्रस्ताव अंडे के खिलाफ था. विपक्ष के सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में आरोप लगाया कि बच्चों की थाली में अंडा परोसने के कार्यक्रम से अंडे का कारोबार करने वाले चंद व्यापारियों को लाभ पहुंचेगा और बच्चों में मांसाहार की प्रवृति पैदा होगी. बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में यह भी बताया कि कबीरपंथी, जैन, अग्रवाल, वैष्णव, मारवाड़ी, माहेश्वरी समाज के लोग ज्ञान के मंदिर में अंडा वितरण किए जाने के खिलाफ है. भाजपा विधायक अग्रवाल यह तक कह गए कि सावन के महीने में सरकार ने अंडा बांटने का फैसला लिया है इसलिए इंद्रदेव नाराज हो गए हैं... पानी नहीं गिर रहा है.

भाजपा विधायक के इस बयान के बाद कांग्रेस के मंत्री कवासी लखमा ने यह कहते हुए विरोध जताया कि छत्तीसगढ़ में जब पन्द्रह साल तक भाजपा की सरकार थीं तब तो मुर्गी पालन और मछली पालन पर खूब जोर दिया गया, लेकिन अब भाजपा बेमतलब का विरोध कर रही है. शोर-शराबा और हो-हल्ले के बीच कांग्रेस के सदस्यों ने यह भी कहा कि कई राज्यों में जहां भाजपा की सरकार है वहां के सरकारी स्कूलों में अंडा परोसा जा रहा है.

स्कूलों में अंडा परोसने को लेकर सरकार का तर्क है कि छत्तीसगढ़ के 38 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार है और अनुसूचित जनजाति के बच्चों में कुपोषण की यह दर 44 फीसदी है.अंडे में विटामिन सी जैसे एक- दो तत्व छोड़कर सभी तरह के पोषक तत्व मिलते हैं.अगर बच्चों को अंडा मिलेगा तो वे स्वस्थ्य रहेंगे और उनकी पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी होगी. अपना मोर्चा डॉट कॉम से बातचीत में स्कूली शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह कहते हैं- अंडा मांसाहार है या शाकाहार इसे लेकर बहुत सा भ्रम काफी पहले टूट चुका हैं. कौन सा बच्चा अंडा खाएगा और कौन सा बच्चा अंडा नहीं खाएगा... इसे लेकर कोई बाध्यता नहीं रखी गई है. जो बच्चे अंडा खाना चाहेंगे उन्हें अंडा दिया जाएगा और जो बच्चे अंडा नहीं चाहेंगे उन्हें दूध- केला या उतनी ही कैलोरी का अन्य प्रोटीनयुक्त पदार्थ परोसा जाएगा. प्रेमसाय ने बताया कि स्कूलों में अंडा बंटेगा या नहीं इसका फैसला शाला विकास समिति तय करेगी. जहां की समिति अंडा परोसने के पक्ष में होगी वहां स्कूलों में अंडा दिया जाएगा. जहां समिति नहीं चाहेगी वहां बच्चों के घर अंडा पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन बच्चों को अंडा अवश्य दिया जाएगा.

इधर अंडा परोसे जाने के फैसले के खिलाफ आंदोलन करने वाले कबीरपंथियों के गुरु प्रकाश मुनि का कहना है कि ज्ञान के मंदिर में अंडा नहीं परोसा जाना चाहिए. सरकार को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में अंडा वितरण करने से पहले एक सर्वे करा लेना चाहिए था. जो बच्चे अंडा खाना चाहते हैं सरकार उनके परिजनों को अंडा दे दें ताकि वे अपने बच्चों को घर पर ही अंडा खिला सकें. बहुत से धार्मिक संगठन अंडा वितरण योजना को धर्म और आस्था के खिलाफ भी मान रहे हैं. इस बारे में पीयूसीएल के पूर्व अध्यक्ष लाखन सिंह का कहना है कि अंडे का विरोध करने वाले लोग बच्चों के कुपोषण को कैसे दूर करें... इस विषय पर बातचीत के लिए तैयार नहीं है. धर्म-कर्म और आस्था से तो बच्चों का कुपोषण दूर नहीं होगा. अगर एक सस्ता और सुलभ प्रोटीन बच्चों के भोजन का हिस्सा बनता है तो इससे अच्छी बात कोई दूसरी नहीं हो सकती. क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच के महासचिव तुहिन देव का कहना है कि भोजन में शाकाहार और मांसाहार दोनों का महत्व होता है. केवल कुछ लोगों की आस्था या धार्मिकता के नाम पर एक बड़ी आबादी के खानपान पर प्रतिबंध लगाने की कवायद किसी भी स्तर पर जायज और प्रजातांत्रिक नहीं मानी जा सकती है. छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला कहते हैं- सरकार ने बम नहीं ब्लकि अंडा बांटने की योजना बनाई है. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को अगर भोजन में अंडा मिलता है तो उसका हर स्तर पर स्वागत होना चाहिए. जो लोग आज अंडे का विरोध कर रहे हैं वे लोग कल मछली का विरोध करेंगे. फिर चिकन का विरोध करेंगे और फिर इस बात का भी विरोध होगा कि हमें क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं पहनना चाहिए. फासीवाद को प्रश्रय देने वालों का विरोध कुछ इसी तरह का होता है. वे धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं.

अंडा विरोध की राजनीति के बीच लोरमी के विधायक धर्मजीत सिंह का बयान भी काफी दिलचस्प है. वे कहते हैं- मैं अंडा खाता हूं. चिकन खाता हूं. मटन खाता हूं...लेकिन अगर बहुत से लोगों की भावनाएं आहत होती है तो चाहूंगा कि स्कूलों में अंडे का वितरण न हो. बहरहाल छत्तीसगढ़ में इन दिनों हर कोई एक-दूसरे को अंडे का फंडा... समझाने की कवायद कर रहा है. एक फुटकर अंडा व्यापारी लालजी का कहना है-जबसे विरोध हो रहा है अंडा खूब बिक रहा है. सोशल मीडिया में एक मजेदार टिप्पणी चल रही है- बड़े दिनों के बाद विपक्ष को एक मुद्दा मिला.... मगर मिला क्या... अंडा !

 

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इधर कलक्टर बनी शिखा राजपूत उधर लगा भ्रष्टाचार का आरोप

रायपुर. छत्तीसगढ़ की पूर्व स्वास्थ्य संचालक शिखा राजपूत तिवारी अभी चंद दिनों पहले ही बेमेतरा कलक्टर बनाई गई है. जाहिर सी बात है कलक्टरों की पदस्थापना मुख्यमंत्री स्वयं करते हैं, लेकिन उनके कलक्टर बनने के साथ ही एक नया विवाद भी जुड़ गया है. शिखा अब से कुछ अरसा पहले कोण्डागांव जिले में भी कलक्टर थीं तब भी उन पर अपने परिजनों और रिश्तेदारों को उपकृत करने का आरोप लगा था.इधर उन पर आरोप है कि उन्होंने आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा और संजीवनी सहायता कोष के क्लेम में जमकर भ्रष्टाचार किया है. सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक को बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और रायपुर के कुछ चिकित्सकों ने लिखित में यह शिकायत दी है कि उनसे काम के एवज में पैसों की मांग की गई है. खबर है कि नेशनल हेल्थ एजेंसी ने भी स्वास्थ्य सचिव को एक मेल के जरिए गंभीर शिकायतें भेजी है. बताया जाता है कि आयुष्मान योजना के तहत तीन हजार आठ सौ से ज्यादा रिजेक्ट क्लेम के भुगतान में उन्होंने विशेष रुचि दिखाई. बहरहाल शिकायतों के मद्देनजर पूर्व स्वास्थ्य संचालक ( वर्तमान में बेमेतरा कलक्टर ) पर स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर जांच बिठा दी है. स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी सुरेंद्रर बांधे ने विशेष सचिव भुनेश यादव को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है.

जांच को लेकर उठे सवाल

इधर जांच को लेकर कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए हैं. इसमें कोई दो मत नहीं है कि भाजपा के शासनकाल से ही स्वास्थ्य विभाग आर्थिक अनियमिताओं और गड़बड़ियों का एक प्रमुख केंद्र रहा है. वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव इन गड़बड़ियों को सुधारने की कवायद में भी लगे हुए हैं और काफी हद तक उन्होंने नियंत्रित भी कर लिया है बावजूद इसके विभाग में अफसरों के बीच खुन्नस और तनातनी कायम है. विभाग के ही एक गुट का कहना है कि शिखा राजपूत तिवारी ने  वैली गेयर नाम की एक स्वास्थ्य बीमा कंपनी कंपनी के कारनामों को लेकर उच्च अधिकारियों से पत्र- व्यवहार किया था जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है. बताया जाता है कि शिखा का विरोध इस बात को लेकर था कि स्वास्थ्य विभाग उस बीमा कंपनी को भुगतान कर रही है जिसका रिकार्ड ठीक नहीं है. पहले 700-800 करोड़ की प्रीमियम होती थीं, मगर अब यह प्रीमियम 1100 करोड़ के आसपास पहुंच गई है. ( विभाग के एक दूसरे सूत्र का कहना है कि यह प्रीमियम 536 करोड़ से ज्यादा नहीं है. ) बताया जाता है कि विभाग के सभी बड़े अफसर वैली गेयर के पक्ष में हैं और शिखा खिलाफ थीं.

इधर विभाग के ही एक दूसरे गुट का कहना है कि शिखा राजपूत तिवारी आयुष्मान योजना, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना और संजीवनी सहायता कोष से जुड़े भुगतान के लिए अस्पतालों से कमीशन की मांग करती थी. कई अस्पतालों से भेदभाव भी किया गया. नई सरकार के गठन के बाद जब प्रदेश के कतिपय अस्पतालों पर स्मार्ट कार्ड योजना में गड़बड़ी के चलते गाज गिरी तब शिखा राजपूत ने अपने परिजनों और खास लोगों को मध्यस्थता के खेल में लगाकर हर अस्पताल से अच्छी-खासी वसूली की. बहरहाल इस जांच को लेकर कई तरह की बातें हो रही है. यह भी कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य बीमा योजना के एडिशनल सीईओ विजयेंद्र कटरे की संविदा नियुक्ति के विरोध के चलते उन्हें निशाने पर लिया गया है. स्वास्थ्य विभाग के एक सूत्र का कहना है कि शिखा राजपूत भारतीय प्रशासनिक सेवा की अफसर है, सो उनके खिलाफ जांच का आदेश सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी होना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. इस बात में कितनी सत्यता है इसकी जानकारी तो नहीं है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इस बात की भी जबरदस्त चर्चा है कि शिखा राजपूत जिन दो लोगों को सामने रखकर बातचीत करती थी उन लोगों का ऑडियो-वीडियो एक तीसरे गुट ने अपने पास सुरक्षित रखा है.

 

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भाजपा सरकार में स्वामीभक्ति के लिए विख्यात अफसर एस प्रकाश की शिकायत पहुंची मुख्यमंत्री तक

रायपुर. छह माह पूर्व भाजपा सरकार में एक स्वामीभक्त अफसर के रुप में विख्यात एस. प्रकाश एक बार फिर आरोपों से घिर गए हैं. कवर्धा और कोरिया में बतौर कलक्टर पदस्थ रहने के दौरान भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा था. कुछ समय तक वे पाठ्य पुस्तक निगम में भी प्रबंध संचालक की हैसियत से कार्यरत थे, तब भी उन पर खास प्रिंटरों और प्रकाशकों को प्रश्रय देकर आर्थिक अनियमितता को बढ़ावा देने का आरोप लगा था. इस बार छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन ने उन पर गरीब बच्चों को शिक्षा हासिल करने के अधिकार से वंचित करने का आरोप जड़ा है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भेजी गई एक शिकायत में छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन ने कहा है कि एस. प्रकाश लोक शिक्षण संचालनालय में संचालक के तौर पर कार्यरत है, लेकिन वे खुले तौर पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं. एसोसियेशन का कहना है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पिछले साल 2018-19 में लगभग 43 हजार रिक्त सीटों पर गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं दिया गया और इस साल 2019-20 में लगभग 25 हजार सीटों पर भर्ती नहीं की जा रही है. एसोसियेशन का कहना है कि जब-जब गरीब बच्चों का स्कूल प्रवेश रोका जाता है तब-तब निजी स्कूल वालों को फायदा होता है. गरीब बच्चों के दाखिले की जगह कोई डोनेशन देने वाला पालक पहुंच जाता है और फिर गरीब बच्चा शिक्षा हासिल करने के अधिकार से वंचित रह जाता है.

एसोसियेशन ने अपनी शिकायत में कहा है कि उच्च न्यायालय बिलासपुर ने 14 सितंबर 2016 को स्पष्ट तौर पर यह आदेश दिया है कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सभी सीटें अनिवार्य रुप से भरी जाएगी. शिक्षा के अधिकार कानून 2010 के कंडिका 14 में भी यह स्पष्ट प्रावधान है कि भर्ती प्रक्रिया दिसम्बर महीने तक जारी रखी जाएगी, लेकिन संचालक एस. प्रकाश सीधे तौर पर कहते हैं कि उन्हें इस नियम की कोई जानकारी नहीं है. मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में एसोसियेशन ने एस. प्रकाश को लोक शिक्षण संचालक के पद से हटाने की मांग की है.

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छत्तीसगढ़ के छह अफसरों के खिलाफ लोक आयोग ने की कार्रवाई की अनुशंसा

रायपुर. भारतीय प्रशासनिक,पुलिस और वन सेवा के छह अफसरों के खिलाफ लोक आयोग ने कार्रवाई की अनुशंसा की है. यह जानकारी एक लिखित प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में दी है. कांग्रेस विधायक अरूण वोरा ने यह जानना चाहा था कि एक अप्रैल 2016 से एक अप्रैल 2019 तक लोक आयोग ने किन-किन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई अथवा जांच की अनुशंसा की है. जवाब में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर एन एस मंडावी, हीरालाल नायक, सेवानिवृत्त अफसर जे. मिंज, वन अफसर एस एस बजाज, पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता के अलावा एक महिला अफसर पर लोक आयोग ने कार्रवाई की अनुशंसा की है.
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छत्तीसगढ़ के छह अफसरों के खिलाफ लोक आयोग ने की कार्रवाई की अनुशंसा

रायपुर. भारतीय प्रशासनिक,पुलिस और वन सेवा के छह अफसरों के खिलाफ लोक आयोग ने कार्रवाई की अनुशंसा की है. यह जानकारी एक लिखित प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में दी है. कांग्रेस विधायक अरूण वोरा ने यह जानना चाहा था कि एक अप्रैल 2016 से एक अप्रैल 2019 तक लोक आयोग ने किन-किन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई अथवा जांच की अनुशंसा की है. जवाब में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर एन एस मंडावी, हीरालाल नायक, सेवानिवृत्त अफसर जे. मिंज, वन अफसर एस एस बजाज, पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता के अलावा एक महिला अफसर पर लोक आयोग ने कार्रवाई की अनुशंसा की है.
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क्या अमित जोगी पागल हो गए हैं?

रायपुर. सोशल मीडिया में सक्रिय रहना तो अच्छी बात है, लेकिन छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी की ताबड़तोड़ ढंग की सक्रियता उनके आलोचकों की संख्या में लगातार इजाफा कर रही है.एक बड़ा वर्ग यह मानकर चल रहा है कि वे सरकार के कामकाज और नीतियों पर कम बल्कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निजी तौर पर ज्यादा हमला करते हैं. उनकी पोस्ट और टिव्हट में एक खींझ साफ तौर पर दिखाई देती है.अभी हाल के दिनों में जब सात जुलाई को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की माता जी का निधन हुआ तो उन्होंने कुछ ऐसा टिव्हट किया कि लोग उन पर पिल पड़े.

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश उर्मिल को लिखना पड़ा- अमित का विवादों और खुराफातों से पुराना रिश्ता है. अभी 7 जुलाई को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की माता जी का एक स्थानीय अस्पताल में निधन हो गया. वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं. निधन की सूचना के बावजूद उसी दिन न जाने किस नशे में चूर अमित जोगी ने मुख्यमंत्री श्री बघेल के खिलाफ अनाप-शनाप लिखकर अपने ट्विटर एकाउंट पर पर डाल दिया. विपक्षी भी अमित जोगी के ट्विट-खुराफात पर हैरत में हैं. आखिर किसी नेता-पुत्र, जो स्वयं भी राजनीति में दाखिल है,में ऐसी निकृष्ट सोच, संवेदना-शून्य आचरण और अशिष्टता कहां से आती है? अब अमित जोगी और उनके पिता अजीत जोगी क्षमा-प्रार्थी मूड में दिख रहे हैं.

सोशल मीडिया में क्षमा मांग लेने के बाद तो बात खत्म होनी चाहिए मगर लोग उनके अन्य पोस्ट और टिव्हट की मीमांसा करने में लग गए हैं. राजनीति के जानकार उनके असामान्य व्यवहार पर हतप्रभ है.एक पुराने खांटी नेता का कहना है- पागल होना और पागलपन का शिकार हो जाना... अलग तरह का मसला है. पागलपन से मंजिल तय होती है, लेकिन पागल आदमी दूसरों पर पत्थर फेंकता है या फिर कपड़े फाड़ता है. अमित जोगी एक कुशल राजनीतिज्ञ के बेटे हैं. उन्हें कम से कम अपने पिता से यह तो सीख ही लेना चाहिए कि जीवन में नपे-तुले शब्दों का क्या महत्व होता है?

यह था विवादित टिव्हट 

अमित जोगी ने कहा-  वे सोमवार को बाराद्वार जा रहे हैं, लेकिन भूपेश बघेल अपनी स्वर्गवासी मां को मुखाग्नि देते हुए यह तय कर लें कि या तो वे बाराद्वार की शराब दुकान को बंद कर लें या फिर मुझे ?

 

 

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बिंदेश्वरी बघेल के निधन पर कांग्रेस नेताओं ने जताया शोक

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की माता बिन्देश्वरी बघेल के निधन पर कांग्रेस नेताओं ने शोक प्रकट करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महा सचिव मोतीलाल वोरा ,छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया ,प्रभारी सचिव चन्दन यादव ,अरुण उरांव, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत ,प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ,कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मंत्री टीएस सिंहदेव ,रविन्द्र चौबे ,ताम्रध्वज साहू ,वरिष्ठ नेता धनेंद्र साहू ,सत्यनारायण शर्मा ,मंत्री मोहम्मद अकबर,डॉ शिव डहरिया ,प्रेम साय सिंह ,कवासी लखमा ,जय सिंह अग्रवाल, अमरजीत भगत, उमेश पटेल, श्रीमती अनिला भेड़िया ,रुद्र गुरु ,प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री गिरीश देवांगन ,कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी,महामंत्री महेंद्र छाबड़ा ,मुख्य वक्ता सुशील आनंद शुक्ला ,प्रवक्ता आर पी सिंह सहित अन्य कई नेताओं ने श्रीमती बिंदेश्वरी बघेल को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने की कामना की है.

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वॉलफोर्ट सिटी बनाने वालों ने किया अरबों का जमीन घोटाला... भाजपा नेता ननकीराम कंवर ने की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जांच की मांग

रायपुर. अगर कभी आप रायपुर आए तो रायपुर से भिलाई जाने वाले मार्ग पर आपको एक चमकदार कालोनी नजर आएगी. इस चमकदार कालोनी को देखकर आप चौंक सकते हैं और यह सोचने के लिए मजबूर हो सकते हैं कि जिस राज्य की एक बड़ी आबादी हर रोज अपनी रोजी-रोटी के लिए जद्दोजहद करती है वहां के बांशिदें तीन से चार करोड़ रुपए में एक बंगला खरीदने की हैसियत रखते हैं.

जी हां... हम बात कर रहे हैं वॉलफोर्ट सिटी की. बताते हैं कि इस सिटी में एक बंगले की कीमत तीन से चार करोड़ रुपए हैं और यहां कई रसूखदार लोग निवास करते हैं. छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने इसी वॉलफोर्ट सिटी के कर्ताधर्ताओं के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है. हालांकि यह अभियान भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह को छेड़ना था, लेकिन उनके शासनकाल में यह कालोनी पल्लवित और पुष्पित हुई थीं तो उनके हिस्से का काम पूर्व गृहमंत्री कंवर ने कर दिया.

कंवर ने पांच जुलाई 2019 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सौंपी गई एक शिकायत में कहा है कि रायपुर निवासी पंकज लाहोटी ने गोपाल, रामचंद सोनकर, राजीव और शिवमूरत जैसे लोगों के सहयोग से राजस्व अधिकारी रहे घनश्याम शर्मा, पटवारी सनत पटेल से सांठगांठ कर ग्राम महुदा के पटवारी हल्का नंबर 7 अम्लेश्वर तहसील पाटन जिला दुर्ग की करीब 38 एकड़ भूमि जिसका वर्तमान बाजार मूल्य एक अरब 14 करोड़ रुपए है की हेराफेरी कर ली है. कंवर का कहना है कि उक्त जमीन भूमिहीन कृषकों को खेती के जरिए जीवनयापन करने के लिए दी गई थीं, लेकिन कृषकों के साथ धोखाधड़ी कर उनकी जमीन हड़प ली गई है.

अपनी शिकायत के साथ कंवर ने सिलसिलेवार पूरा ब्यौरा दिया है. उन्होंने बताया कि जैनम एग्रो फायनेंस के गोपाल पिता रामचंद्र सोनकर के पास मोहन, रामसिंह की जमीन है. भूपेंद्र कुमार पिता शारदा प्रसाद सोनकर के पास जिन्नतबी छोटे मियां की जमीन है. महेश पिता सोनू राम सोनकर ने हेमंत पिता राजाराम, मनोहर पिता विरुमल, भारत, विष्णु, सरुप, रामाधार की जमीन को अपने नाम कर लिया है. अनिल पिता आरसी ने तुलसी, नंदकुमार और शिवकुमार की जमीन अपने नाम कर ली है. वसुंधरा आयुवैर्दिक अनुसंधान केंद्र प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राजू पिता शिवमूरत ने मेहतरू, सुखचंद, गिरधर, सिलउ, गोवर्धन, जगतपाल, डेरहा, कन्हैया, दुखवा और सुखऊ की जमीन अपने नाम चढ़ा ली है.

 

कंवर का कहना है कि गोपाल सोनकर, भूपेंद्र सोनकर, महेंद्र सोनकर और अनिल सोनकर सभी पंकज लाहोटी के खास लोग है. कंवर का आरोप है कि ग्राम कोपेडीह की पटवारी हल्का नंबर सात की जमीन वॉलफोर्ट सिटी को कंपनी टू कंपनी ट्रांसफर की गई है. ऐसा कर शासन को राजस्व की क्षति पहुंचाई गई है. कंवर ने जमीन का जो-जो हिस्सा वॉलफोर्ट सिटी को स्थानांतरित किया गया है उसका ब्यौरा भी सौंपा है. कंवर का कहन है कि यह अरबों रुपए का जमीन घोटाला है. अगर सूक्ष्मता से जांच की जाएगी तो कई चेहरे बेनकाब होंगे. वैसे सूत्रों का कहना है कि वॉलफोर्ट सिटी के निर्माण में भारतीय पुलिस सेवा के एक विवादास्पद पुलिस अफसर की भी बड़ी भूमिका है. प्रदेश में जब भाजपा की सरकार थीं तब इस पुलिस अफसर ने अवैध धंधों में लिप्त कई लोगों को संरक्षण दे रखा था. सूत्रों का कहना है कि वॉलफोर्ट सिटी के  निर्माण में दूसरा महत्वपूर्ण शख्स वह है जो कई तरह के गोरखधंधों में लिप्त पुलिस अफसर के लिए वसूली का काम किया करता था. बताते हैं कि अफसर जिन लोगों को अपने जाल में फंसाता था उनसे अस्पताल के लिए अनुदान मांगता था. बेगुनाह और मजबूर लोगों से वसूली का काम वॉलफोर्ट सिटी से जुड़ा शख्स ही किया करता था. बहरहाल अरबों के इस जमीन घोटाले की शिकायत शुक्रवार को मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है. इस मामले में अभी और कई सनसनीखेज खुलासे होने बाकी है.

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मंत्री अमरजीत भगत को आवंटित हो सकता है मुकेश गुप्ता का बंगला ?

रायपुर. हाल के दिनों में मंत्रिमंडल में शामिल किए गए अमरजीत भगत के लिए सरकार आवास की तलाश कर रही है, लेकिन अभी कोई ऐसा बंगला खाली नहीं है जो उन्हें आवंटित किया जा सकें. कहा जा रहा है कि उन्हें देश के सबसे विवादास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता का बंगला आवंटित किया जा सकता है.

सरगुजा के सीतापुर से विधायक अमरजीत भगत को हाल के दिनों में ही संस्कृति मंत्री बनाया गया है. जो लोग संस्कृति के जानकार है उनका मानना है कि मंत्री भगत को शंकर नगर या उसके आसपास ही कहीं बंगला आवंटित होना चाहिए ताकि अधिकाधिक लोग उनसे आसानी से मेल- मुलाकात कर सकें. मगर इस इलाके में कोई भी सरकारी बंगला फिलहाल खाली नहीं है. सूत्रों का कहना है कि सरकार उन्हें सिविल लाइन में दंतेवाड़ा की पूर्व विधायक देवती कर्मा के पास स्थित मुकेश गुप्ता का सरकारी आवास आवंटित कर सकती है. हालांकि यह आवास अपेक्षाकृत छोटा है मगर थोड़े से कामकाज के बाद बंगले की हालत ठीक की जा सकती है. इस बंगले में नए सिरे से कभी किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं हुआ है. केवल एक बार मुकेश गुप्ता ने बंगले के पिछले हिस्से में एक छोटा सा दरवाजा बनवाया था तो यह खबर तेजी से फैली थीं कि गिरफ्तारी के दौरान भागने के लिए उन्होंने ऐसा किया है.

यह बताना भी लाजिमी है कि मुकेश गुप्ता को जब से यह बंगला आवंटित हुआ है तब से वे यहां दो-चार बार ही ठहरे होंगे. निलंबित होने के बाद दिल्ली को ही उन्होंने अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है. पुलिस महकमे के कर्मचारी उनके निवास पर किसी भी तरह की नोटिस चस्पा करने जाते हैं तो वहां तैनात पुलिसकर्मी कह देते हैं कि साहब तो यहां रहते ही नहीं है.

जब उन्हें निलंबित किया गया था तब उनके आदेश में यह साफ-साफ उल्लेखित किया गया था कि उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी और निलंबन अवधि तक उन्हें पुलिस मुख्यालय में हर रोज ( अवकाश के दिनों को छोड़कर ) अपनी आमद देनी होगी, लेकिन मुकेश गुप्ता ने सरकार के सभी फरमान को ठेंगा दिखा रहे हैं. नब्बे दिनों से ज्यादा गैर-हाजिर रहने पर जब उन्हें पुलिस मुख्यालय की तरफ से नोटिस जारी किया गया तब उन्होंने एक पत्र भेजकर यह सूचित किया कि कोई ऐसा नियम नहीं है कि जिसे निलंबित किया गया है वह उपस्थित रहेगा? उनके इस कथन के बाद यह सवाल भी उठा कि जिन अफसरों ने भ्रष्ट तरीके से पैसा नहीं कमाया या जो रसूखदार नहीं बन पाए... क्या सारे नियम उन्हीं के लिए बनाए गए है. उनके साथ ही निलंबित किए गए भारतीय पुलिस सेवा के अफसर रजनेश सिंह बकायदा पुलिस मुख्यालय में हर रोज आमद दे देते हैं. जब-जब रजनेश सिंह को ईओडब्लू की तरफ से बयान देने के लिए बुलवाया तब-तब वे अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हैं, लेकिन मुकेश गुप्ता ने महज दो बार ही ईओडब्लू में दस्तक दी हैं. मुकेश गुप्ता के  खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है. यह जांच पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी कर रहे हैं. गुप्ता को कई मर्तबा पेश होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है, लेकिन यहां भी उनका रवैय्या- ज्यादा से ज्यादा क्या कर लोगे... वाला बना हुआ है. 

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क्या पुरातत्व विभाग के जगदेव राम भगत ने सिक्कों को बेचकर महल खड़ा किया है?

रायपुर. संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में उपसंचालक की हैसियत से पदस्थ जगदेव राम भगत के कारनामों को लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली एक संस्था खबरदार आज तक इंडिया ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को शिकायत भेजी है. इस दस्तावेजी शिकायत की एक प्रति अपना मोर्चा डॉट कॉम के पास भी सुरक्षित है. अब शिकायत कितनी सच है इसका खुलासा तो जांच के उपरांत ही पता चलेगा, लेकिन शिकायतकर्ता संस्था के आरोप काफी गंभीर है. शिकायत में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में कार्यरत दीप्ति नाम की एक महिला को भी भ्रष्टाचार में लिप्त बताया गया है.

शिकायत में कहा गया है कि जगदेव राम भगत लंबे समय से महंत घासीदास संग्रहालय में पदस्थ है. गत 16 साल से संग्रहालय का चार्ज होने के बावजूद भी भगत ने आज तक भौतिक सत्यापन नहीं करवाया है. वहां कार्यरत कर्मचारी दबी जुबान से कहते हैं कि भगत ने संग्रहालय के सिक्कों को बेचकर अपनी निजी प्रापर्टी खड़ी की है. शिकायत में उल्लेखित है कि भगत के संग्रहालय अध्यक्ष रहने के दौरान ही पचराही संगोष्ठी का आयोजन किया गया था. इस आयोजन के लिए अच्छी-खासी रकम संग्रहाध्यक्ष कार्यालय से ही आहरित की गई थी. इसके भुगतान की जवाबदारी बीरबल राम कुजूर को दी गई थी, लेकिन बाद में भुगतान की जवाबदारी दीप्ति नाम की महिला को दे दी गई. बताया गया है कि भगत अब भी अपने सहयोगी युगल और सतीश के माध्यम से पचराही के पुराने बिलों का भुगतान कर रहे हैं. मेसर्स बल्लू अग्रवाल और पूर्णेद्र प्रकाश लाइट साउंड का भुगतान पहले हो चुका है बावजूद इसके इन्हें पुरानी तिथि यानी बैक डेट पर भुगतान दिया जा रहा है.

यहां यह बताना लाजिमी है कि पुरातत्व विभाग की ओर से तरीघाट में किया गया उत्खनन बेहद विवादित रहा है. इस उत्खनन को लेकर कई खबरें मीडिया में सार्वजनिक होती रही है. शिकायत में तरीघाट में हुई अनियमितता का भी उल्लेख है. इस मामले में संस्था ने कहा है कि तरीघाट का उत्खनन दो सालों से बंद है बावजूद इसके फर्जी ढंग से मस्टर रोल बनाकर लाखों का भुगतान किया गया और इस काम के लिए भी महिला कर्मचारी दीप्ति का सहयोग लिया गया. शिकायत में मेला मंडई में भी 15 लाख के भुगतान की गफलतबाजी का जिक्र है. इसके अलावा महंत सर्वेश्वर दास ग्रंथालय में अध्ययन और संगीत कक्ष के नाम पर 33.17 लाख रुपए का व्यय अनावश्यक बताया गया है. कहा गया है कि इस कार्य में विक्रांत वैष्णव नाम का एक शख्स भी शामिल है. पुरखौती मुक्तागंन परिसर में कोटा वोल्टाइज प्रणाली लगाई गई है. इसका भुगतान भी पोखराज पुरी गोस्वामी के माध्यम से किया गया है. शिकायत में एक महिला कर्मचारी के नाम से तीन बेडरुम वाले फ्लैट को खरीदे जाने की जानकारी दी गई है.

चेलों की भरमार

प्रदेश में जब भाजपा की सरकार थीं तब कई अफसरों ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी निकालने वाले चेले पाल रखे थे.एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत की प्रक्रिया अब भी बंद नहीं हुई है. कुछ लोगों की रोजी-रोटी ही सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई जानकारी के भरोसे चल रही है. शिकायत में दो लोगों का नाम सहित उल्लेख है. कहा गया है कि दो लोग अक्सर संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग आते हैं और जगदेव राम भगत के इशारे पर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हासिल कर विभाग को बदनाम करते हैं. शिकायत में पुरखौती मुक्तागंन में एक ही सीरियल की टिकट गड़बड़ी की भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई है. इस जानकारी में यह बताया गया है कि कब-कब किसने क्या-क्या किया. शिकायत में टिकट वितरण में गड़बड़ी करने वालों की तस्वीरें भी चस्पा है. इसके अलावा अन्य कई गंभीर आरोपों का उल्लेख है. इधर जगदेव राम भगत ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को निराधार बताया है. भगत का कहना है कि वे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपने काम को अंजाम देते हैं. विभाग के ही कतिपय लोग जो विघ्नसंतोषी है उनके खिलाफ अर्नगल दुष्प्रचार करते रहते हैं. भगत ने बताया है कि वे अपने ऊपर लगे हुए तमाम आरोपों का सिलसिलेवार जवाब प्रस्तुत कर चुके हैं. आगे भी प्रस्तुत कर देंगे.

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छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ संपादक प्राण चड्ढा की बेटी की दुबई में हत्या ?

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ संपादक एवं वन्य जीव विशेषज्ञ प्राण चड्ढा की छोटी बेटी प्रीति चड्ढा की दुबई में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. प्राण चड्ढा ने इसे सामान्य मौत मानने से इंकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है. मिली जानकारी के अनुसार गुरुघासी दास विवि से एमबीए में गोलमेडलिस्ट प्रीति चड्डा की संदिग्ध मौत आबूधाबी में उनके निवास स्थान में 23 जून रविवार को हो गयी थीं. बताते हैं कि प्रीति दुबई के एक मल्टीनेशनल फर्म के एचआर विभाग में प्रमुख पद पर कार्यरत थीं. लगभग तीन साल साल पहले प्रीति का विवाह कलकत्ता निवासी पायलट सिंधु घोष से हुआ था.लेकिन प्रीति उनके अत्यधिक शराब सेवन की आदत से परेशान होकर एक होटल में रह रही थीं. समय-समय पर प्रीति ने अपने परिजनों को यह भी बताया था उसका दापंत्य जीवन खराब चल रहा है. अभी चंद रोज पहले उसने बिलासपुर पहुंच कर अपने पिता प्राण चड्ढा और परिजनों को शरीर पर चोटों के निशान भी दिखाए थे. बिलासपुर से दुबई लौटने के बाद प्रीति ने अपने पिता को यह जानकारी भी दी कि पति सिंधु घोष संबंध सुधारने की बात करते है. बीते रविवार को प्रीति होटल से कपड़े लेने अबुधाबी गई और फिर उसकी मौत हो गयी. प्रीति की मौत की सूचना दामाद सिंधु घोष ने स्वयं दी. प्रीति के पास पिता प्राण चड्ढा काफी मशक्कत के बाद प्रीति का शव यहां ला पाए. यहां भी प्रीति के शव का पोस्टमार्टम किया गया है. लंबे समय तक पत्रकारिता करने वाले प्राण चड्ढा ने फिलहाल सीआरपीसी की धारा 188 के तहत बिलासपुर के पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है. इस रिपोर्ट पर केंद्र सरकार से अनुमति के.बाद आरोपी के खिलाफ जुर्म दर्ज कर आगे कार्रवाई की जा सकती है.
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मोहन मरकाम बने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

रायपुर. बस्तर के कोंंडागांव से विधायक मोहन मरकाम को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल यह जानकारी शुक्रवार को.पत्रकारों को दी.
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40 से ज्यादा बच्चों की तस्करी... युवक चढ़ा राजनांदगांव पुलिस के हत्थे

रायपुर. राजनांदगांव पुलिस ने गुरुवार की सुबह मुंबई-हावड़ा मेल में 40 से ज्यादा बच्चों को बरामद किया है. प्रदेश के पूर्व वरिष्ठ अफसरऔर मितान पुलिस टाइम्स के संस्थापक राजीव श्रीवास्तव को किसी ने यह सूचना दी थी कि ट्रेन में बच्चों की तस्करी हो रही है. इस सूचना के बाद मितान पुलिस टाइम्स की प्रतिनिधि  और अधिवक्ता  स्मिता पांडे ट्रेन में सवार हुई और पल-पल की सूचना एकत्रित करती रही. उन्होंने जानकारी दी कि मुंबई-हावड़ा मेल में 40 से ज्यादा छोटे बच्चे सवार है. उनकी बोली-बानी और बातचीत से यह लग रहा था कि  वे बेहद मजबूर है और उनके साथ उनका कोई भी अभिवावक नहीं है. ग्रुप के सदस्य की सूचना के बाद राजीव श्रीवास्तव ने इसकी सूचना राजनांदगांव पुलिस को दी और थोड़े ही समय में पुलिस ने रेलवे स्टेशन में डेरा डाल दिया. फिलहाल पुलिस ने एस पाइव और एस टू कोच से 40 से ज्यादा बच्चों को बरामद कर लिया है. इन बच्चों में कितने बच्चे छत्तीसगढ़ के हैं यह अभी साफ नहीं है. बच्चों को महाराष्ट्र ले जाने वाले जिस युवक को गिरफ्तार किया गया है वह बिहार का रहने वाला है. युवक पुलिस को अपना नाम अलग-अलग बता रहा है. गिरफ्तार किए गए युवक शाकिर का कहना है कि वह सभी बच्चों को उनके अभिभावकों की अनुमति से ही मुंबई घुमाने ले जा रहा था. फिलहाल 40 बच्चों की बरामदगी से राजनांदगांव में हडकंप मच गया है. पुलिस मामले की विवेचना में जुट गई है.

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