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अजीत और अमित जोगी की जमानत याचिका खारिज

रायपुर. अंतागढ़ टेप कांड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके पुत्र अमित जोगी की जमानत याचिका खारिज हो गई है. अंतागढ़ टेप मामले में फंसने बाद प्रथम श्रेणी न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत मेंं यह याचिका लगाई गई थीं जो अस्वीकार कर दी गई.
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मंतूराम पर बोले रामविचार नेताम- बिकाऊ कभी टिकाऊ नहीं होता

रायपुर. भाजपा के वरिष्ठ नेता रामविचार नेताम के ताजा बयान से हलचल मच गई है. नेताम ने मंतूराम पवार के भाजपा में प्रवेश और फिर उन्हें बाहर किए जाने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. नेताम का कहना है कि जो बिकाऊ था वह टिकाऊ कैसे हो सकता है? एक बातचीत में नेताम ने कहा कि जिस गाजेबाजे और लड़ी-पटाखे के साथ मंतूराम का भाजपा प्रवेश हुआ था वह भाजपा के कई बड़े नेताओं के गले से नहीं उतर रहा था. ऐसा लग रहा था कि राष्ट्रीय स्तर के किसी बड़े नेता की इंट्री हो गई है. जिस गर्मजोशी के साथ मंतूराम का कार्यसमिति में स्वागत किया गया वह समझ से परे है. प्रवेश के दौरान स्थानीय नेतृत्व को भी भरोसे में नहीं लिया गया. पार्टी के स्थानीय जिम्मेदारों ने अपनों से ज्यादा गैरों पर भरोसा जताया जो दुःखद है. गैरों पर भरोसे के चलते ही आज हमारा बुरा हाल हुआ है.
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शिवशंकर भट्ट का खुलासाः चुनावी चंदे के लिए भाजपा कार्यालय पहुंचा पांच करोड़ तो... रमन सिंह के घर तीन करोड़

रायपुर. नान घोटाले के एक आरोपी शिवशंकर भट्ट ने नीरज श्रीवास्तव की अदालत में शपथपूर्वक दिए गए एक बयान में जो बातें कहीं है वह न केवल सनसनीखेज है बल्कि हैरत में डालने वाली है. उनके बयान के बाद ऐसा लगता है कि पूर्व सरकार में बैठे लोग किस बुरी तरह से छत्तीसगढ़ को लूट रहे थे. भट्ट ने न्यायालय में दावा किया कि मुख्यमंत्री रमन सिंह और पून्नूलाल मोहिले, ने नान के अध्यक्ष लीलाराम भोजवानी को वर्ष 2013 के चुनाव में भाजपा कार्यालय के लेखा शाखा के कर्मचारी श्री जैन के पास पांच करोड़ रुपए जमा करने को कहा था. इस चंदे के लिए चना, दाल के सप्लायर्स के अलावा राइस मिलरों को मजबूर किया गया था. भट्ट ने बताया कि वह कुछ सप्लायर्स के साथ खुद चंदा देने भाजपा कार्यालय गया था. जब वह पैसे को लेकर वहां पहुंचा तब वह धरमलाल कौशिक ( भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष ), सच्चिदानंद उपासने सहित कई बड़े पदाधिकारी उपस्थित थे. मेरे सामने उन लोगों को यह पैसा दिया गया. इसी तरह अक्टूबर 2013 में भी लीलाराम भोजवानी के साथ पून्नूलाल मोहिले के निवास पर एक करोड़ रुपए का चंदा देने गया था. जबकि वर्ष 2013 में अफसर कौशलेंद्र सिंह के साथ तीन करोड़ रुपए लेकर मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के घर गया था. जब पैसा दिया जा रहा था तब मुख्यमंत्री की पत्नी वीणा सिंह वहां मौजूद थीं. कौशलेंद्र सिंह ने मेरी आंखों के सामने तीन करोड़ रुपए दिए थे.

कौशलेंद्र ने दिए थे रेणु सिंह को पैसे

शिवशंकर भट्ट ने अपने बयान में पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह, पूर्व खाद्य मंत्री पून्नूलाल मोहिले, लीलाराम भोजवानी, राधाकृष्ण गुप्ता के साथ-साथ वन अफसर रहे कौशलेंद्र सिंह को नान घोटाले का प्रमुख आरोपी बताया है. अपने बयान में शिवशंकर भट्ट ने कई मर्तबा कौशलेंद्र सिंह का नाम लिया है. भट्ट ने न्यायालय में बताया कि फरवरी 2014 में कौशलेंद्र सिंह मुझे एश्वर्या रेंसीडेंसी में रहने वाली रेणु सिंह के निवास पर ले गए थे. वहां उन्होंने मेरे सामने पांच लाख रुपए रेणु सिंह को दिए. यह पैसे किस मद से दिए गए मुझे इसकी जानकारी नहीं थी और मैं जानना भी नहीं चाहता था. भट्ट ने शपथपत्र में कहा कि 12 फरवरी 2015 को ईओडब्लू ने छापा मारकर एक करोड़ 62 लाख रुपए की फर्जी ढंग से जप्ती बनाई थी. मेरे हाथों से कोई रकम प्राप्त नहीं हुई थी. मेरे पास कोई ऐसी शक्ति नहीं थीं कि मैं इतनी बड़ी रकम कार्यालय में रखता. भट्ट ने कहा कि कौशलेंद्र सिंह और नागरिक आपूर्ति निगम में कार्यरत गिरीश शर्मा, चिंतामणि चंद्राकर आपस में मिलकर लेन-देन और बंदरबांट करते थे. उनके पैसों को मेरे नाम डालकर फर्जी जप्ती बनाई गई थीं. भट्ट ने न्यायालय के समक्ष बताया कि कौशलेंद्र सिंह पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के काफी निकट थे. उनके पारिवारिक रिश्ते थे. नान का पूरा संचालन कौशलेंद्र सिंह, डाक्टर रमन सिंह, पून्नूलाल मोहिले, लीलाराम भोजवानी और राधाकृष्ण गुप्ता एक गैंग बनाकर करते थे.

गाली-गलौच करते थे कौशलेंद्र

भट्ट ने कहा कि नागरिक आपूर्ति निगम में किसी भी अधिकारी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह विरोध अथवा आपत्ति दर्ज करें. अगर कोई कौशलेंद्र सिंह के काम पर आपत्ति दर्ज करता तो वे सीधे डाक्टर रमन सिंह और चारों व्यक्तियों का नाम लेकर गाली-गलौच करते थे. कौशलेंद्र सिंह, चिंतामणि और गिरीश शर्मा सभी सप्लायर्स और राइस मिलरों से लगातार लेन-देन करते थे. यह सब देखकर ऐसा प्रतीत ही नहीं होता था कि कोई शासकीय कार्यालय चल रहा है.कौशलेंद्र सिंह मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के प्रियपात्र थे इसलिए वर्ष 2011 और 2014 के बीच उनका केवल दो बार ही तबादला हुआ. वे हर बार मुख्यमंत्री को बोलकर अपना तबादला रूकवा लेते थे. कृतिकांत बारिक के कम्प्यूटर से बरामद पन्ने कौशलेंद्र सिंह के निर्देश पर गिरीश शर्मा ने ही लिखवाए है.

हत्या पर उठाए सवाल

भट्ट ने नागरिक आपूर्ति निगम के एक कर्मचारी त्रिनाथ रेड्डी की वाइफ की हत्या पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि इस हत्या को आत्महत्या बताने का प्रयास किया गया था. इस हत्या के जरिए यह मैसेज देने की कोशिश की गई थी कि जो कोई भी मुंह खोलेगा उसके साथ अनहोनी हो सकती है. यह हत्या किसने करवाई  इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए.

शिवशंकर भट्ट ने कहा कि वर्ष 2013-2014 में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के धान उपार्जन के लिए लगभग 550 करोड़ और फिर 500 करोड़ की अग्रिम सब्सिडी जारी की गई थी. हैरत की बात यह है कि वर्ष 2003-04 से लेकर वर्ष 2014-15 तक लगभग दस हजार करोड़ रुपए की अग्रिम सब्सिडी स्वीकृत की गई. यह सब्सिडी बगैर किसी वैधानिक ऑडिट के केवल प्रस्तुत किए गए बिल के आधार पर की गई थीं. जो भी अधिकारी इसके खिलाफ मुंह खोलता उसे परिणाम भुगतना पड़ता. इस खेल में विपणन संघ के तत्कालीन अध्यक्ष राधाकृष्ण गुप्ता खास पर शामिल थे. डाक्टर रमन सिंह, पून्नूलाल मोहिले, लीलाराम भोजवानी, राधाकृष्ण गुप्ता ने आपस में सांठगांठ कर हाईप्रोफाइल रैकेट तैयार कर लिया था. इस रैकेट ने शासन को करोड़ों रुपए की क्षति पहुंचाई.

लगभग 21 लाख फर्जी राशनकार्ड

भट्ट ने कहा कि वर्ष 2014 के अगस्त माह में नागरिक आपूर्ति निगम के पास 9 लाख मैट्रिक टन चावल का स्टाक था. इसके बावजूद मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह जो वित्त मंत्री भी थे ने विभाग के अधिकारियों पर दबाव देकर 10 लाख टन मीट्रिक टन चावल का अतिरिक्त उपार्जन करने का आदेश दिया था. इतना ही नहीं अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए 236 करोड़ की क्षतिपूर्ति की गारंटी बिना कैबिनेट की अनुमोदन के पास कर दिया था. जबकि शासन के हित में ऐसा नहीं किया जाना था. इस मामले में विभाग के अधिकारियों ने आपत्ति जताई तो उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आपत्ति की आवश्यकता नहीं है. इस संदर्भ में हमें और पार्टी को लंबी-चौड़ी रकम मिलनी है और अगर आप लोग चाहे तो यह रकम आपको भी प्रदान की जाएगी. भट्ट ने कहा कि वर्ष 2013-2014 में 21 लाख फर्जी राशनकार्ड बनवाए गए थे. इस काम को खाद्य विभाग का कोई भी अधिकारी स्वेच्छा से करना नहीं चाहता था, लेकिन डाक्टर रमन सिंह, लीलाराम भोजवानी और पून्नूलाल मोहिले ने अधिकारियों को डराया-धमकाया और परिणाम भुगतने को तैयार रहने को कहा.

इधर शिवशंकर भट्ट के द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट से जमानत पर चल रहे शिवशंकर भट्ट से बयान दिलाकर भाजपा की छवि खराब करने की कोशिश की गई है. कांग्रेस नान घोटाले के आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है. अपराधियों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की कोशिश की जा रही है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी सीएम हाउस में न तो पैसों को लेकर किसी के जाने जैसी कोई बात हुई है और न ही ऐसा करना संभव है. वहां आने-जाने वाले हर व्यक्ति के संबंध में इंट्री होती है. उन्होंने कहा कि वे इस मामले को लेकर कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई करेंगे. 

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शिवशंकर का सनसनीखेज खुलासाः नान घोटाले में शामिल थे रमन सिंह, पून्नूलाल मोहिले, कौशलेंद्र सिंह, लीलाराम भोजवानी, राधाकृष्ण गुप्ता और...

रायपुर. नान घोटाले के एक प्रमुख आरोपी शिवशंकर भट्ट ने नीरज श्रीवास्तव की अदालत में शपथपूर्वक दिए गए बयान में साफ तौर पर यह स्वीकार किया है कि नान घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह, पून्नूलाल मोहिले, वन अफसर कौशलेंद्र सिंह, लीलाराम भोजवानी, राधाकृष्ण गुप्ता सहित अन्य कई लोग शामिल थे. भट्ट ने कहा कि वर्ष 2014 के अगस्त माह में नागरिक आपूर्ति निगम के पास 9 लाख मैट्रिक टन चावल का स्टाक था. इसके बावजूद मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह जो वित्त मंत्री भी थे ने विभाग के अधिकारियों पर दबाव देकर 10 लाख टन मीट्रिक टन चावल का अतिरिक्त उपार्जन करने का आदेश दिया था. इतना ही नहीं अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए 236 करोड़ की क्षतिपूर्ति की गारंटी बिना कैबिनेट की अनुमोदन के पास कर दिया था. जबकि शासन के हित में ऐसा नहीं किया जाना था. इस मामले में विभाग के अधिकारियों ने आपत्ति जताई तो उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आपत्ति की आवश्यकता नहीं है. इस संदर्भ में हमें और पार्टी को लंबी-चौड़ी रकम मिलनी है और अगर आप लोग चाहे तो यह रकम आपको भी प्रदान की जाएगी.

भट्ट ने कहा कि वर्ष 2013-2014 में 21 लाख फर्जी राशनकार्ड बनवाए गए थे. इस काम को खाद्य विभाग का कोई भी अधिकारी स्वेच्छा से करना नहीं चाहता था, लेकिन डाक्टर रमन सिंह, लीलाराम भोजवानी और पून्नूलाल मोहिले ने अधिकारियों को डराया-धमकाया और परिणाम भुगतने को तैयार रहने को कहा.

इधर शिवशंकर भट्ट के द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट से जमानत पर चल रहे शिवशंकर भट्ट से बयान दिलाकर भाजपा की छवि खराब करने की कोशिश की गई है. कांग्रेस नान घोटाले के आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है. अपराधियों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की कोशिश की जा रही है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी सीएम हाउस में न तो पैसों को लेकर किसी के जाने जैसी कोई बात हुई है और न ही ऐसा करना संभव है. वहां आने-जाने वाले हर व्यक्ति के संबंध में इंट्री होती है. उन्होंने कहा कि वे इस मामले को लेकर कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई करेंगे. 

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पत्रकार सुरक्षा कानून का ड्राफ्ट लगभग तैयार...छत्तीसगढ़ में जल्द ही लागू होगा कानून

रायपुर. छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार जल्द ही पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने वाली है. इस कानून के तहत पत्रकारों को किसी भी तरह के झूठे मामलों में फंसाना आसान नहीं होगा. इतना ही नहीं पत्रकारों के खिलाफ दुर्भावनापूर्वक कार्रवाई करने वाले अफसरों और अन्य लोगों को जेल भी हो सकती है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश आफताब आलम, दिल्ली हाईकोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश श्रीमती अंजना कुमार, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राजूराम चंद्रम की निगरानी में यह ड्राफ्ट लगभग तैयार हो गया है.

गौरतलब है कि प्रदेश में जब भाजपा की सरकार थीं तब सरकारी अफसरों ने बदले की भावना से बड़ी संख्या में पत्रकारों को निशाना बनाया था. सुपर सीएम के नाम से विख्यात एक अफसर के इशारों पर राजधानी सहित विभिन्न इलाकों के लगभग ढाई सौ पत्रकारों पर जुर्म कायम किया गया था. जब कांग्रेस सत्ता में नहीं थीं तब उसने यह वादा किया था कि नई सरकार के गठन के साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाया जाएगा. सरकार ने इस दिशा में मार्च महीने में कानून बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ की थी जो अब अंतिम दौर पर है. फिलहाल इस कानून पर विचार-विमर्श के लिए छत्तीसगढ़ के अफसरों का एक दल शुक्रवार को दिल्ली जा रहा है. इस बारे में शनिवार को एक अहम बैठक होगी.

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पत्रकारों की अधिमान्यता समिति में पहली बार दूर-दराज इलाकों के कई पत्रकार शामिल

राज्य और जिला स्तर के अलावा अब विकासखण्ड स्तर पर भी दी जाएगी अधिमान्यता

रायपुर. भूपेश बघेल की सरकार ने पहली बार राज्य और जिला स्तर के अलावा विकासखंड स्तर पर अधिमान्यता देने का निर्णय लिया है.मीडिया के प्रतिनिधियों को अधिमान्यता प्रदान करने के लिए शासन ने नए अधिमान्यता नियमों के तहत राज्य और संभाग स्तरीय समितियों का गठन भी कर दिया है. इन समितियों में राज्य के विभिन्न हिस्सों के दूर-दराज और कठिन इलाकों में रहकर पत्रकारिता करने वाले कई पत्रकारों को शामिल किया गया है. (अब तक ऐसा नहीं हो पाया था. भाजपा के शासनकाल में बनी समितियों में ज्यादातर गैर-पत्रकार और लाइजनर काबिज हो गए थे. ) बहरहाल नई अधिमान्यता समितियों के गठन की अधिसूचना 3 सितम्बर 2019 के शासकीय गजट में प्रकाशित भी कर दी गई है. सरकार के इस फैसले से पत्रकारों के एक बड़े वर्ग में हर्ष व्याप्त है. सही मायनों में पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों को अब जाकर यह लग रहा है कि उनका हक अब मालिक और उसके परिजन नहीं उठा पाएंगे. यहां यह बताना लाजिमी है कि पिछली सरकार में अखबार के मालिक  और उनके परिजनों ने पत्रकारों का हक मारकर अधिमान्यता हासिल कर रखी थीं. 

राज्य अधिमान्यता समिति में 10 पत्रकार सदस्य और आयुक्त- संचालक जनसम्पर्क के अलावा उनके द्वारा नामांकित अधिकारी समिति के सदस्य होंगे. इसी तरह संभाग स्तरीय अधिमान्यता समिति में 9 पत्रकार सदस्य और संभागीय मुख्यालय स्थित जनसम्पर्क कार्यालय के प्रमुख समिति के सदस्य होंगे. राज्य स्तरीय अधिमान्यता समिति राज्य के स्तर पर अधिमान्यता का काम देखेंगे जबकि संभागीय अधिमान्यता समिति जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिमान्यता प्रदान करेगी.

राज्य स्तरीय अधिमान्यता समिति में भास्कर के संपादक शिव दुबे, अमृत संदेश से संजीव वर्मा, नवभारत से राजेश जोशी, नई दुनिया से आलोक मिश्रा, इवनिंव टाइम्स से नथमल शर्मा, बस्तर इम्पैक्ट से सुरेश महापात्र, देशबन्धु से प्रकाश जैन, पत्रिका से राजेश लाहोटी, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्रकाशचन्द्र होता, ब्रम्हवीर सिंह को शामिल किया गया है.

रायपुर संभागीय अधिमान्यता समिति में नवाब फाजिल उप संपादक भास्कर सुश्री रश्मि ड्रोलिया विशेष संवाददाता टाइम्स ऑफ इंडिया, राजकुमार सोनी संपादक अपना मोर्चा डॉट काम, गोकुल सोनी फोटोग्राफर नवभारत, विजय मिश्रा अग्रदूत, आनंद साहू ब्यूरो प्रमुख नई दुनिया, अब्दुल रज्जाक धमतरी, मनोज सिंह संपादक स्वराज एक्सप्रेस और फारूख मेमन आईबीसी-24 सदस्य बनाए गए हैं.

बिलासपुर संभाग के लिए बनी अधिमान्यता समिति में अशोक शर्मा संपादक देशबंधु बिलासपुर, सुनील गुप्ता समाचार संपादक नई दुनिया,  विपुल गुप्ता संपादक दैनिक भास्कर, हर्ष पाण्डेय संपादक नवभारत, अरूण श्रीवास्तव पत्रिका, विजय केडिया संवाददाता पीटीआई, प्रेमचन्द्र जैन संवाददाता कोरबा-बाल्को टाईम्स कोरबा, प्रशान्त सिंह संवाददाता सहारा समय और मनोज सिंह वरिष्ठ संवाददाता आईबीसी-24 बिलासपुर सदस्य होंगे.

दुर्ग संभागीय अधिमान्यता समिति में टी.सूर्याराव, नितिन त्रिपाठी, अतुल अग्रवाल, हरबंसलाल अरोरा, आलोक तिवारी , शशांक तिवारी, अविनाश ठाकुर , मिथलेश ठाकुर, हितेश शर्मा  सदस्य मनोनीत किए गए हैं.

सरगुजा संभागीय अधिमान्यता समिति में उपेन्द्र दुबे ब्यूरो प्रमुख अम्बिकावाणी सूरजपुर,अरूण सिहं ब्यूरो प्रमुख हरिभूमि अम्बिकापुर, योगेश मिश्रा ब्यूरो प्रमुख दैनिक भास्कर अंबिकापुर, सुधीर पाण्डेय ब्यूरो प्रमुख नवभारत अम्बिकापुर, विजय त्रिपाठी प्रधान संपादक दैनिक जशपुरांचल जशपुर, अशोक सिंह ब्यूरो प्रमुख नई दुनिया बैकुण्ठपुर कोरिया,  रमेश शर्मा संवाददाता यूएनआई पत्थलगांव, अमितेष पाण्डेय संवाददाता न्यूज 18 अम्बिकापुर और अभिषेक सोनी संवाददाता आईबीसी-24 अम्बिकापुर सदस्य होंगे.

बस्तर संभागीय अधिमान्यता समिति में पवन दुबे प्रधान संपादक चैनल इंडिया जगदलपुर, मनीष गुप्ता ब्यूरोचीफ नवभारत जगदलपुर, सुरेश रावल ब्यूरो प्रमुख हरिभूमि जगदलपुर, शैलेन्द्र ठाकुर ब्यूरो प्रमुख दैनिक भास्कर दंतेवाड़ा, टिंकेश्वर तिवारी ब्यूरो प्रमुख दण्डकारण्य समाचार कांकेर, राजेन्द्र तिवारी जगदलपुर,  नरेश मिश्रा विशेष संवाददाता आईबीसी-24 जगदलपुर, बप्पी राव संवाददाता और वीरेन्द्र मिश्रा, सदस्य होंगे.  

ज्ञात हो कि गत जुलाई माह में छत्तीसगढ़ समाचार मीडिया प्रतिनिधि अधिमान्यता नियम 2019 लागू किया गया है. नए अधिमान्यता नियमों में प्रिंट मीडिया के साथ-साथ टी.व्ही. न्यूज चैनल्स, न्यूज वेबपोर्टल, न्यूज एजेंसी आदि के समाचार प्रतिनिधियों को अधिमान्यता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है. नए अधिमान्यता नियमों को और विस्तृत करते हुए अब विकासखंड स्तर पर ही अधिमान्यता प्रदान की जाएगी.

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... तो क्या झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं को मौत के घाट उतारने में पुलिस अफसर आरएन दास शामिल थे ?

रायपुर.  छत्तीसगढ़ के लोग मंतूराम पवार के नाम से भली-भांति वाकिफ है. मंतूराम वही है जो कभी कांग्रेस से जुड़े थे ( अब भाजपा में हैं. ) और जिन्होंने धुर माओवाद प्रभावित अंतागढ़ में होने वाले उपचुनाव के दौरान एकायक अपना नाम वापस लेकर सबको चौका दिया था. तब कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल थे. वे इस मामले को लेकर आरोप लगाते रहे कि मंतूराम की खरीद-फरोख्त हुई है, लेकिन तमाम तरह के दस्तावेजी सबूतों के बावजूद कहीं सुनवाई नहीं हुई. यहां तक चुनाव आयोग के सामने धरना-प्रदर्शन हुआ मगर आयोग हाथ में हाथ धरे बैठा रहा. मंतूराम जब भाजपा में चले गए तब भी किसी ने नहीं माना कि खरीद-फरोख्त का खेल हुआ है. शनिवार को मंतूराम ने अदालत के सामने यह मान लिया है कि उन्हें खरीदने के लिए कुल साढ़े सात करोड़ की डील हुई थी. मंतूराम की बात पर यकीने करें तो यह डील मंत्री राजेश मूणत के बंगले पर हुई थीं और खुद मूणत ने अपने हाथ से फिरोज सिद्दिकी और अमीन मेनन को सात करोड़ दिए थे. ( छत्तीसगढ़ के स्थानीय बाशिंदों को यह अवश्य सोचना चाहिए कि जब भाजपा की सरकार थी तब एक-एक मंत्री करोड़ों रुपए अपने बंगले में क्यों रखता था. ) बहरहाल एक ताजा घटनाक्रम में मंतूराम ने धारा 164 के तहत बयान देकर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके दामाद पुनीत गुप्ता, अजीत जोगी, उनके पुत्र अमित जोगी को आरोपों के कटघरे में खड़ा कर दिया है. मंतू ने अपने बयान में  जो सबसे चौकाने वाली बात कहीं है वह यह है कि नाम वापसी के खेल में कांकेर के एसपी की भी भूमिका थी. मंतूराम की नाम वापसी का घटनाक्रम वर्ष 2014 से जुड़ा है, तब कांकेर एसपी आरएन दास थे. मंतूराम का कहना है- मुझे कांकेर के पुलिस अधीक्षक का फोन आया था. पुलिस अधीक्षक ने कहा- मंतूराम जो कहा जा रहा है वह करो... नहीं तो तुम्हे झीरम घाटी का परिणाम भुगतना होगा. उल्लेखनीय है कि 25 मई 2013 को बस्तर के झीरमघाट में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को माओवादियों ने मौत के घाट उतार दिया था. मंतूराम ने जो कुछ अपने बयान में कहा है अगर उस पर यकीन करें तो यह सवाल स्वाभाविक तौर पर उठता है कि क्या कांग्रेस नेताओं की मौत भाजपा के नेताओं के द्वारा रची गई एक गहरी साजिश थी और उसमें पुलिस अफसर आरएन दास भी शामिल थे?

विवादों से नाता रहा है दास का

आरएन दास इन दिनों पुलिस मुख्यालय में पदस्थ है,लेकिन उनकी गिनती कभी भी संवेदनशील और काबिल पुलिस अफसर के तौर पर नहीं होती रही. उनका नाम हमेशा विवादों से जुड़ा रहा और उनकी पहचान विवादों से नाता रखने वाले पुलिस अफसर शिवराम कल्लूरी के शार्गिद के तौर पर ही बनी रही. यहां यह बताना लाजिमी है कि फरवरी 2017 में आरएन दास ने अधिवक्ता शालिनी गेरा को अपने मोबाइल की बजाय एक संदिग्ध के नंबर से फोन करके धमकाया था. दास ने शालिनी को माओवादियों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाते हुए थाने बुलाया. जब शालिनी और उनके साथियों ने जब नंबर की पड़ताल की तो वह अग्नि संस्था के एक सदस्य फारूख़ अली का निकला था. शालिनी गेरा ने इस बात की शिकायत मानवाधिकार में भी की थी. इसके अलावा बस्तर में निर्दोष आदिवासियों और बच्चों को मौत के घाट उतारने के मामले में भी आरएन दास की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं.

पहली बार आया डाक्टर रमन सिंह का नाम

अंतागढ़ टेपकांड में खरीद-फरोख्त किए जाने को लेकर अब तक पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी,अमित जोगी, पुनीत गुप्ता का नाम ही सामने आता रहा है, लेकिन पहली बार मंतूराम ने पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह को भी निशाना बनाया है. धारा 164 के तहत दिए गए अपने बयान में मंतूराम ने कहा है कि जब मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था तब फिरोज सिद्दिकी और अमीन मेनन ने कहा था कि अगर तुम यह काम नहीं करोगे तो रमन सिंह तुम्हारे पूरे खानदान को नहीं छोडेंगे. झीरमघाटी की तरह ही तुम्हें पूरे परिवार के साथ मसलकर फेंक दिया जाएगा. मैं जिस क्षेत्र से आता हूं वहां यह बात चर्चित एवं स्पष्ट थीं कि झीरम घाटी हत्याकांड में बड़े नेताओं का हाथ है. मंतूराम ने अपने बयान में यह भी कहा है कि जब रमन सिंह अपनी पत्नी के इलाज के लिए विदेश गए थे तब फिरोज सिद्दिकी ( फिरोज इन दिनों जेल में हैं. )  ने किसी के फोन से उनसे बात करवाई थीं. फोन पर बातचीत के दौरान रमन सिंह ने कहा था वे लोग जो कह रहे हैं वो तुमको करना है और मैं तुमको आर्शीवाद दूंगा. मंतूराम ने बयान में साफ किया कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, अजीत जोगी और अमित जोगी मिलकर काम करते थे. यह बात उन्हें फिरोज सिद्दिकी और अमीन मेनन ने बताई थी. मंतूराम ने शपथपूर्वक दिए गए अपने बयान में यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने उसका राजनीतिक भविष्य बनाने और लालबत्ती दिलाने का आश्वासन दिया था. अंतागढ़ चुनाव को प्रभावित करने में रमन सिंह, अजीत जोगी, अमित जोगी शामिल थे. जबरन ही उनका नाम ( मंतूराम ) खराब किया गया.

 

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनाः गुणवत्ता में छत्तीसगढ़ पहले स्थान पर

रायपुर. भूपेश सरकार के सबसे काबिल मंत्री टीएस सिंहदेव ने एक बार फिर बाजी मार ली है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में गुणवत्ता को लेकर छत्तीसगढ़ ने पहला स्थान हासिल कर लिया है. फिलहाल टीएस सिंहदेव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री है.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में गुणवत्ता का सबसे अधिक ध्यान रखा जाता है. इसके लिए सड़कों की तीन स्तरों पर जांच की जाती है. प्रथम स्तर पर विभागीय अभियंताओं के द्वारा जांच की जाती है. दूसरे स्तर पर राज्य के गुणवत्ता समीक्षकों के द्वारा और अंत में ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से नियुक्त किए गए गुणवत्ता निरीक्षकों के द्वारा. बहरहाल वर्ष 2019 में राष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता समीक्षकों ने कुल 204 सड़कों का निरीक्षण किया था. निरीक्षण में 95.59 फीसदी कार्य संतोषजनक पाया गया था. निरीक्षकों ने इस पड़ताल के आधार पर छत्तीसगढ़ को प्रथम स्थान प्रदान किया है जबकि 45 सड़कों के निरीक्षण के आधार पर कर्नाटक दूसरे स्थान पर है. यहां यह बताना लाजिमी है कि वर्ष 2017-18 में जब भाजपा की सरकार थीं और उसके मंत्री अजय चंद्राकर थे तब राज्य को गुणवत्ता में तृतीय स्थान हासिल हुआ था.

मुख्य कार्यपालन अधिकारी आलोक कटियार ने बताया कि राष्ट्रीय गुणवत्ता समीक्षकों के द्वारा सड़कों के निरीक्षण का कार्य पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाता है. इसके लिए बकायदा समाचार पत्रों में जानकारी दी जाती है. यहां तक गुणवत्ता के समीक्षकों के नाम और मोबाइल नंबर की जानकारी भी दी जाती है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से लेकर जून 2019 तक छत्तीसगढ़ में सात किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से कुल 2414 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण सफलतापूर्वक कर लिया गया है. पिछले पन्द्रह सालों में किसी भी एक छमाही में इतनी लंबी सड़कों का निर्माण प्रदेश में पहले कभी नहीं हुआ. छत्तीसगढ़ के घोर माओवादी इलाकों में भी वृहत स्तर पर सड़कों का निर्माण कर लेना एक बड़ी उपलब्धि है. श्री कटियार ने इस उपलब्धि का श्रेय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव एवं अपर मुख्य सचिव आरपी मंडल के अलावा ग्रामीण विकास अभिकरण के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया है. कटियार ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रथम चरण के अंतर्गत सभी कार्य पूर्ण हो चुके हैं. इसके बाद ही दूसरे चरण की पात्रता दी गई थीं. अब तीसरे चरण के लिए भी राज्य को अच्छा-खासा पैकेज मिलेगा.

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एक्सप्रेस- वे की सड़क धंसी... अनिल राय पर भी उठे सवाल

रायपुर. छोटी लाइन को हटाकर रेलवे स्टेशन से शदाणी दरबार तक बनाए गए 12 किमी फोरलेन एक्सप्रेस-वे की सड़क का एक हिस्सा गुरुवार को धसक गया. इस सड़क के धंसने से एक कार पलट गई और महावीर नगर निवासी अभिनव शुक्ला-दिव्या राज शुक्ला को गंभीर चोटें आई. सड़क के धसकने के साथ भाजपा बचाव की मुद्रा में आ खड़ी हुई तो कांग्रेस ने भाजपा शासनकाल की कमीशन खोरी को जिम्मेदार माना है. प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने एक्सप्रेस वे हुए हादसे के लिए पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत और पूर्व विधायक श्रीचंद सुन्दरानी को जिम्मेदार ठहराया है. जबकि कांग्रेस के संयुक्त सचिव नरेश गड़पाल ने सीधे तौर पर पीडब्लूडी विभाग के अनिल राय पर निशाना साधा है.

नरेश गड़पाल का कहना है कि 22 अप्रैल 2017 में इस सड़क के निर्माण कार्य का ठेका आयरन ट्रेंगल लिमिटेड को कुल 258.11 करोड़ में दिया गया था. धीरे-धीरे यह राशि और अधिक हो गई. गड़पाल ने कहा कि जिस रोज से यह सड़क बन रही थीं उसी रोज से इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे थे और भ्रष्टाचार की बू आने लगी थीं.कई तरह की शिकायतों के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई और अततः इस साल की पहली झमाझम बारिश में सड़क के कई हिस्से धसक गए. उन्होंने कहा कि पूर्व पीडब्लू मंत्री राजेश मूणत तो इसके जिम्मेदार है ही, लेकिन योजना को अंजाम देने वाले अनिल राय भी इसके मुख्य कर्ताधर्ता है. गड़पाल ने कहा कि अनिल राय वन विभाग के अफसर है जिन्हें सड़क निर्माण और उसकी गुणवत्ता का अनुभव भी नहीं है बावजूद इसके वे लंबे समय से पीडब्लूडी विभाग में जमे हुए हैं. 

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर का कहना है कि एक्सप्रेस-वे के उदघाटन के लिए भाजपा ने प्रदर्शन किया था जो घटिया निर्माणकर्ता ठेकेदार के हित को समर्पित था. भाजपा को राजधानी में रहने वाली जनता की सुरक्षा नही बल्कि एक्सप्रेस वे का निर्माण करने वाले ठेकेदार की बिल की चिंता थी.इधर सड़क के धसक जाने के बाद लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने जांच के निर्देश तो दे दिए हैं, अब यह देखना बाकी है कि इस जांच में अनिल राय पर कोई कार्रवाई होती भी है या नहीं ? वैसे पिछले कुछ समय से राजनीति और प्रशासनिक  गलियारों में एक सवाल लगातार उठ रहा है कि मंत्रालय में पदस्थ रहे बहुत से वन अफसरों की उनके मूल विभाग में वापसी हो गई है तो फिर अनिल राय को वापस क्यों नहीं भेजा जा रहा है ? आखिर अनिल राय को किसका संरक्षण हासिल है ? 

 

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खुशखबरीः प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण के लिए छत्तीसगढ़ को मिल सकता है बड़ा पैकेज

रायपुर. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन में देश में प्रथम स्थान हासिल करने के बाद छत्तीसगढ़ को तीसरे चरण के लिए केंद्र से एक बड़ा पैकेज मिल जाने की उम्मीद है. यह पैकेज तीन से पांच हजार करोड़ या उससे अधिक का हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो निश्चित रुप से इसका श्रेय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके सबसे काबिल मंत्री टीएस सिंहदेव के खाते में जाना तय है.

गौरतलब है कि इसी साल सात जून को केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट रिव्यू कमेटी की बैठक हुई थी.इस बैठक में यह तथ्य सामने आया कि सभी राज्यों की अपेक्षा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित होने वाली सड़कों की प्रगति छत्तीसगढ़ में सबसे बेहतर है. प्रदेश में 2248.71 किमी सड़कों का निर्माण किया जाना था और छत्तीसगढ़ ने तय समय में गुणवत्ता के साथ 2013.65 किमी सड़कों का निर्माण कर लिया था. इतना ही नहीं पीएमजीएसवाय-2 के तहत छत्तीसगढ़ ने यातायात के हिसाब से अधिक घनत्व रखने वाली सड़कों में पुल-पुलियों के साथ डामरीकरण का कार्य भी सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया था.

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आलोक कटियार ने बताया कि तीसरे चरण में पूरे देश कुल 80 हजार किलोमीटर सड़कें बनेगी. इसके तहत छत्तीसगढ़ में भी ग्रामीण बसाहटों को सुगम बनाने के लिए सड़कों का निर्माण होगा. कटियार ने बताया है कि तीसरे चरण के लिए फिलहाल ड्राफ्ट गाइड लाइन जारी हुआ है. सभी जिलों में डीआरआरपी ( डायरेक्ट रुलर रोड़ प्लान ) तैयार कर लिया गया है. अब यूनिटी वैल्यू के आधार पर जिला स्तर पर प्राथमिकता का ध्यान रखते हुए सड़कों के चयन का काम चल रहा है. उन्होंने बताया कि डीपीआर कंसलटेंट की नियुक्ति के लिए निविदा आमंत्रण की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है. मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा है कि फेस-2 को लेकर केंद्र से मिली सराहना के बाद फेस-3 का काम भी शानदार ढंग से संपादित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री टीएस सिंहदेव की अगुवाई में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के समस्त कर्मचारी एवं अधिकारी प्रतिबद्धता के साथ कार्यरत है इसलिए यह तय है कि तीसरे चरण का काम भी पूरी गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय में पूर्ण कर लिया जाएगा.

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मुकेश गुप्ता प्रकरण में पहली गिरफ्तारी...मचा हड़कंप

रायपुर. विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी साडा के भंग होने के बाद अवैध ढंग से भूखंड हासिल करने के मामले में पुलिस को पहली सफलता मिल गई है. पुलिस ने देर रात आरके जैन नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. आरके जैन इन दिनों नगर निगम दुर्ग में पदस्थ है.इस मामले में मुकेश गुप्ता के अलावा चार अन्य आरोपी बनाए गए थे. एक आरोपी व्यास नारायण शुक्ला की मौत हो चुकी है. जबकि तीन फरार चल रहे थे. एक आरोपी जैन की गिरफ्तारी के बाद मुकेश गुप्ता की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है. अन्य आरोपी एसबी सिंह की गिरफ्तारी के लिए टीम रवाना हो चुकी है.
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महिला वन अफसर कहती है- ज्यादा ची-चपड़ की तो छेड़खानी में अंदर करवा दूंगी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में पदस्थ महिला अफसरों में अपने मातहतों से गाली-गलौच के साथ पेश आने की प्रवृति बढ़ती जा रही है. महिला पुलिस अफसरों के द्वारा गाली-गलौच किया जाना तो फैशन मान लिया गया है. इधर महिला कलक्टर और महिला वन अफसर भी इस फैशन परेड़ का हिस्सा बन चुकी है. प्रदेश की दो महिला कलक्टर ( कोरबा नहीं  ) को लेकर यह बात आम है कि उनके मुंह से जरा-जरा सी बात पर फूल झरते हैं. खैर...गाली पर केवल पुरुषों का अधिकार नहीं है, लेकिन अभी गाली-गलौच को कार्य संस्कृति का हिस्सा नहीं माना गया है इसलिए चाहे पुरुष हो या महिला...दोनों की अशिष्टता को लेकर शिकायतें होती रहती है. कुछ दिनों पहले जगदलपुर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पदस्थ सहायक वन संरक्षक दिव्या गौतम का ऑडियो वायरल हुआ था. इस ऑडियो में महिला अफसर अपने घरेलू नौकरों से गाली-गुफ्तार कर रही थीं. गालियां इतनी भद्दी थीं कि सुनने वाला शर्मसार हो जाय. अभी हाल के दिनों में एक बार फिर उसी सहायक वन संरक्षक को लेकर शिकायत हुई है. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र भेजकर दिव्या गौतम को बस्तर से बाहर भेजने की गुहार लगाई है.

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को कहना है कि मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास राव जब तक जगदलपुर में पदस्थ थे तब तक उन्होंने दिव्या गौतम को संरक्षण दे रखा था. उनके हटने के बाद दिव्या गौतम को डीएफओ का प्रभार दे दिया गया. हालांकि अब दिव्या गौतम सहायक वन संरक्षक है, लेकिन उनके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया है.

राधेश्याम बघेल, लक्ष्मी, देवेंद्र सिहं, दशमु, बुचा, कोयतू सहित अनेक कर्मचारियों ने हस्ताक्षरयुक्त शिकायत में कहा कि दिव्या गौतम ने अब तक कुल 17 लोगों को नौकरी से निकाल दिया है. महिला अफसर साफ तौर पर कहती है कि अगर किसी ने चीं-चपड़ की तो छेड़खानी का आरोप लगाकर अंदर करवा दूंगी. कर्मचारियों ने बताया कि पिछले दिनों इस महिला अफसर ने अपने पति के साथ मिलकर एक चौकीदार को बेरहमी से पीटा था जिसकी शिकायत बोधघाट थाने में दर्ज हुई थी, लेकिन पुलिसवालों ने पैसे खाकर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की. कर्मचारियों ने महिला के जाति प्रमाण पत्र को लेकर भी सवाल उठाए. कर्मचारियों ने कहा कि राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है फिर वह पद पर जमी हुई है.

अशोक सोनवानी की साजिश

इधर अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को दिव्या गौतम ने निराधार बताया है. उनका कहना है कि जिले में अशोक सोनवानी नाम का एक रेंजर है जो उनके खिलाफ साजिश रचते रहता है. इसी रेंजर ने इधर-उधर से शिकायतें भिजवाई है. दिव्या गौतम ने कहा कि उसे अशोक सोनवानी उल्टे-सीधे गैर-कानूनी कार्य करने के लिए कहता रहा है. उनके द्वारा इंकार किए जाने की स्थिति में सोनवानी उसके पीछे लग गया है. दिव्या गौतम ने बताया कि जो शिकायतें अभी भेजी गई है उसकी जांच एक साल पहले ही हो चुकी है. सारी शिकायतें निराधार पाई गई थीं. यहां तक अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में भी प्रमाण पत्र की जांच हो चुकी है. वहां से प्रकरण का निराकरण हो चुका है. अभी तबादलों का सीजन चल रहा है. सारी शिकायतें इसलिए करवाई जा रही है ताकि मेरा तबादला किसी और जगह किया जा सकें. रेंजर अशोक सोनवानी पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है. मेरे नहीं रहने से उसकी मर्जी चलने लगेगी. वायरल ऑडियो के संबंध में दिव्या गौतम ने कहा कि यह ऑडियो भी मैन्युप्लेट करके तैयार किया गया था ताकि मेरी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सकें.

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संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के उपसंचालक जेआर भगत के खिलाफ शिकायत लेकर पत्रकार पहुंचा थाने

रायपुर. छत्तीसगढ़ के संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के उपसंचालक जेआर भगत के खिलाफ एक पत्रकार राहुल गिरि गोस्वामी ने सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत दी है. पत्रकार का कहना है कि उसके द्वारा समय-समय पर संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में चल रही गड़बड़ियों को लेकर खबरें प्रकाशित की गई थी. खबरों का प्रकाशन पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर किया गया था, लेकिन वहां पदस्थ उपसंचालक जेआर भगत ने खबरों के प्रकाशन के बाद उसके खिलाफ दबाव बनाने के लिए अनुसूचित जाति-जनजाति थाने में एक झूठी शिकायत की है.

अपना मोर्चा डॉट कॉम से चर्चा में राहुल गिरि गोस्वामी ने बताया कि उपसंचालक भगत ने गड़बड़ियों से संबंधित समाचार के प्रकाशन के बाद पत्रकार के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करने के लिए विभागीय अनुमति ली है या नहीं यह जांच का विषय है, लेकिन प्रथम दृष्टया तो यही प्रतीत होता है कि उपसंचालक भगत उसे जातिगत मामले में उलझाना चाहते हैं. राहुल ने बताया कि उसकी ओर से इंडिपेंडेंड डॉट कॉम नाम के एक पोर्टल में खबरें दी गई थी और इसी महीने 11 जुलाई 2019 को अनादि टीवी में एक खबर प्रसारित की गई थी जिसके बाद भगत खफा चल रहे थे. उन्होंने उसे देख लेने की धमकी भी दी थी. राहुल ने कहा कि भगत की ओर से की जा रही गड़बड़ियों को लेकर कई मर्तबा उच्चाधिकारियों से शिकायतें हुई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई फलस्वरुप हौसले बुलंद है. राहुल ने कहा कि भगत ने यह सब इसलिए किया ताकि दबाव के बाद दोबारा किसी भी तरह की खबरों का प्रकाशन न हो पाय. राहुल ने शिकायत की प्रति मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू और प्रेस क्लब अध्यक्ष रायपुर को भी भेजी है. राहुल ने कहा कि वह अन्याय के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा. इस बारे में उपसंचालक जेआर भगत से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाइल आउट ऑफ रेंज बताता रहा.

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पत्रकारों की अधिमान्यता को लेकर भूपेश सरकार का शानदार फैसला

रायपुर. प्रदेश में कार्यरत पत्रकारों की अधिमान्यता को लेकर भूपेश बघेल की सरकार ने शानदार फैसला लिया है. इसके तहत अब प्रिंट मीडिया के अलावा टीवी न्यूज चैनल, न्यूज पोर्टल, समाचार पत्रिकाओं से जुड़े संवाददाताओं, छायाकार और कैमरामैन के  साथ-साथ विकासखंड में कार्यरत पत्रकारों को अधिमान्यता प्रदान करने का फैसला किया गया है. सरकार के इस फैसले पर पत्रकारों के एक बड़े वर्ग ने खुशी जाहिर की है. जल्द ही पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करेगा.

प्रदेश में पत्रकारों की अधिमान्यता का मसला हमेशा से विवादित रहा है. पिछली सरकार में अमूमन सभी बड़े अखबार के प्रतिनिधि यहां तक मुद्रक और स्वामी भी अधिमान्यता हासिल करने में सफल हो जाते थे. प्रदेश के वे पत्रकार जो संसाधनों के अभाव में भी पत्रकारिता के धर्म और कर्म का पालन करते थे वे वंचित थे, लेकिन अब छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशन के साथ ही नए नियम प्रभावशील हो गए हैं. नए नियमों के लिए पिछले कुछ समय से जुटे रहे आयुक्त-सह-संचालक जनसंपर्क तारन प्रकाश सिन्हा ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप अधिमान्यता नियमों को व्यापक कर दिया गया है. नए नियमों में अब विकासखण्ड स्तर के समाचार मीडिया प्रतिनिधियों को भी जनसंपर्क संचालनालय द्वारा अधिमान्यता देने का फैसला किया गया है. इस कड़ी में राज्य के सेवानिवृत्त वरिष्ठ पत्रकारों को भी मानद अधिमान्यता प्रदान करने का प्रावधान भी रखा गया है.

उन्होंने बताया कि अभी तक प्रचलित अधिमान्यता नियम, छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद वर्ष 2001 में बनाए गए थे. गत अठ्ठारह सालों के दौरान मीडिया परिदृश्य में अमूलचूल परिवर्तन आया है. इस दौरान टीवी न्यूज चैनल, समाचार वेबपोर्टल आदि प्रारंभ हुए हैं और कार्य परिस्थितियां भी बदली है. सो अधिमान्यता नियमों को समय के अनुसार प्रासंगिक बनाने और नए समाचार मीडिया को स्थान प्रदान करने के लिहाज से अधिमान्यता नियमों में व्यापक परिवर्तन अनिवार्य था.

उन्होंने बताया कि नया नियम काफी सरल है. समाचार मीडिया के प्रचार संख्या, प्रसारण क्षेत्र, वेब पोर्टल की दशा में व्यूवर्स की संख्या आदि के आधार न केवल अधिमान्यता कोटा निर्धारित किया गया है. इतना ही नहींअधिमान्यता की संख्या में भी व्यापक बढ़ोत्तरी कर दी गई है.

आयुक्त ने यह भी बताया कि समाचार मीडिया प्रतिनिधियों को अधिमान्यता प्रदान करने का कार्य पूर्व की भांति राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिमान्यता समितियों द्वारा ही किया जायेगा किन्तु समितियों में इलेक्ट्रानिक मीडिया के समाचार प्रतिनिधियों को भी शामिल किये जाने का प्रावधान किया गया है. श्री सिन्हा ने आशा व्यक्त की है कि नए अधिमान्यता नियमों के प्रभावशील होने के बाद समाचार मीडिया प्रतिनिधियों की अधिमान्यता न मिलने संबंधी दीर्घ अवधि से चली आ रही शिकायत का निराकरण हो सकेगा।

 

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संचालक की अनुमति लिए बगैर कर दी कर्मचारियों की नियुक्ति... उपसंचालक भगत को नोटिस

रायपुर. संस्कृति एवं पुरातत्व संचालनालय में एक से बढ़कर कारनामे होते हैं. जो कोई भी इस संचालनायल में पदस्थ होता है वह यहां से जल्द से जल्द छुटकारा पाने की कवायद में जुट जाता है. वैसे तो यह संचालनालय गढ़ कलेवा से सटा हुआ है. कभी निकट भविष्य में गढ़कलेवा शायद बंद भी हो जाय, लेकिन इस संचालनालय में जिस तरह के कारनामे होते हैं उसे देखकर यह लगता नहीं है कि गड़बड़ी और अनियमितताओं के इस गढ़ को कभी कोई मंत्री ध्वस्त कर पाएगा ? बहरहाल लंबे समय से इस संचालनालय में उपसंचालक की हैसियत से पदस्थ जेआर भगत सुर्खियों बटोर रहे हैं. उनकी ढ़ेरों शिकायतें मुख्यमंत्री, संस्कृति मंत्री और उच्चाधिकारियों तक पहुंची है. फिलहाल उनके द्वारा दो कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला चर्चा में हैं. बताया जाता है कि उन्होंने संचालक से अनुमति लिए बगैर देवेंद्र नाम के एक शख्स और एक महिला कर्मचारी की नियुक्ति कर दी थीं. इस मामले में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालनालय के संचालक ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है जिसका कोई जवाब उनकी तरफ से नहीं दिया गया है.

ज्ञात हो कि किसी भी दैनिक वेतनभोगी को नियुक्त करने का अधिकार संचालक के पास ही होता है. इतना ही नहीं जो दैनिक वेतनभोगी होता है उसका स्थानीय होना अनिवार्य है. दैनिक वेतनभोगी का स्थानांतरण भी नहीं किया जा सकता, लेकिन दोनों कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले में सारे नियम-कानून ताक पर रख दिए गए. उपसंचालक भगत वर्ष 2011 में  जब जगदलपुर में पदस्थ थे तब उन्होंने अपने हस्ताक्षर से देवेंद्र कुमार की नियुक्ति का आदेश निकाला और फिर सीधे उसकी सूचना संचालक को भेज दी. उन्होंने दूसरी नियुक्ति 13 जनवरी 2012 को की. इस तिथि में जिस महिला की नियुक्ति की गई वह कस़डोल की रहने वाली हैं. वर्ष 2015 में भगत रायपुर मुख्यालय में आ गए तो उन्होंने एक बार फिर अपने आदेश से दोनों कर्मचारियों का तबादला आदेश जारी किया और उन्हें कोरबा के जिला पुरातत्व संघ संग्रहालय में अटैच कर दिया. नियमानुसार किसी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी का तबादला नहीं हो सकता था. दोनों कर्मचारियों ने अपनी उपस्थिति वहां दी और उनका वेतन भी वहां से निकलने लगा. बताते हैं इस उठापटक में बस्तर में पदस्थ एक अफसर अमृतलाल को नाहक ही परेशानी का सामना करना पड़ा था. उन्होंने कर्मचारियों की नियुक्ति सहित पूर्व में किए गए अन्य कामकाज पर सवाल उठाए तो उन पर धारा 376 के तहत मामला दर्ज हो गया. पैकरा जैसे-तैसे अपनी जान बचाने भागते-फिरते रहे. अब जाकर उन्होंने भी शिकायत का मन बना लिया है. संचालक की अनुमति के बगैर कर्मचारियों की नियुक्ति और नोटिस को लेकर पुरातत्व संचालनालय के उपसंचालक जेआर भगत से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.

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चिटफंट घोटालाः पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा,आईएएस रीना बाबा साहेब कंगाले, कोमल परदेसी, भीमसिंह, नीलकंठ टेकाम, अमृतलाल ध्रुव और रतनलाल डांगी पर एफआईआर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में जब भाजपा की सरकार थी तब आम लोगों की गाढ़ी-मेहनत की कमाई पर डाका डालने वाली चिटफंड कंपनियों को सरकार के मंत्रियों और अफसरों ने प्रश्रय दे रखा था. अभी कुछ दिन पहले अनमोल इंडिया नाम की एक चिटफंड कंपनी को प्रश्रय देने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के पुत्र और राजनांदगांव के पूर्व सांसद अभिषेक सिंह पर अंबिकापुर में मामला दर्ज किया गया था. फिलहाल अंबिकापुर की जिला अदालत से होकर यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर जा पहुंचा है. इधर महासमुंद के खल्लारी में भी पुलिस ने पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, आईएएस रीना बाबा साहेब कंगाले, सिद्धार्थ कोमल परदेसी, भीमसिंह, नीलकंठ टेकाम, अमृतलाल ध्रुव और सहित सनसाइन चिटफंड कंपनी के निदेशक, संचालक और प्रचारक बनवारी लाल, वकील सिंह, राजीव गिरी पर मामला दर्ज कर लिया है. खबर है कि पुलिस अफसर रतनलाल डांगी पर भी खल्लारी थाने में एक हफ्ते पहले मामला दर्ज किया गया है. इधर एफआईआर में कई बड़े अफसरों के नाम आने से हडकंप मच गया है. पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी का कहना है कि यह मामला कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज किया गया है. उन्होंने बताया कि पूरे मामले में रायपुर आईजी से रिपोर्ट मांगी गई है. यह तो देखना ही होगा कि चिटफंड कंपनियों के साथ किस-किस अफसर ने किस तरह की भूमिका निभाई है. चिटफंड कंपनी से उनके किस तरह के संबंध रहे हैं.

बताते हैं कि एक ग्रामीण दिनेश पानीकर ने सनसाइन इन्फ्रा बिल्ड कार्पोरेशन लिमिटेड में लगभग 13 लाख 11 हजार 881 रुपए अपने परिजनों के नाम पर जमा किए थे. कंपनी ने साढ़े छह साल में रकम दोगुना होने का वायदा किया था. पानीकर को तब झटका लगा जब कंपनी ताला लगाकर फरार हो गई. दिनेश अपनी रकम को पाने के लिए भटकता रहा. उसने इस मामले में थाना प्रभारी से लेकर पुलिस अधीक्षक सबसे शिकायत की थी, लेकिन तब किसी ने उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया. गौरतलब है कि इस मामले में जिन अफसरों का नाम सामने आया है वे सभी भाजपा के शासनकाल में सरकार की नाक के बाल बने हुए थे. एक अफसर पर बगैर अनुमति के विदेश जाने का आरोप लगा था. तब इस बात का खूब हल्ला मचा था कि अफसर ने सरकार के एक करीबी के काले धन को ठिकाने लगाने विदेश का दौरा किया है. यह भी कहा गया था कि छत्तीसगढ़ में संविदा में पदस्थ अफसर ने दुबई में एक बेशकीमती आलीशान मकान खरीदा था जिसकी तमाम औपचारिकताएं यहां के अफसर ने वहां जाकर पूरी की थीं. एक अन्य अफसर जो राजनांदगांव में पदस्थ था वह मंत्रिमंडल के एक सदस्य को मम्मी-डैडी कहता था. पूर्व सरकार में एक अफसर की पत्नी शौचालय बनवाने के नाम पर साफ-सफाई के खेल में लगी हुई थीं. अफसर अपने काम की वजह से कम और अपनी पत्नी के प्रचार की वजह से ज्यादा सुर्खियों में रहा. एक अफसर पर अब भी इधर-उधर खबरें प्लांट करवाने का आरोप है. बताते हैं कि यह अफसर दुर्ग जिले में पदस्थ एक वरिष्ठ पुलिस अफसर को बदनाम करने के खेल में लगा हुआ है. इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से भी हुई है.

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