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अमन गैंग के अफसरों का होगा सफाया

राजकुमार सोनी

रायपुर / खुद को देश और दुनिया का पावरफुल नौकरशाह बताने वाले ( राजनीतिज्ञों की नजर में सुपर सीएम ) के बारे में हर रोज मय दस्तावेज सनसनीखेज जानकारी मिलती जा रही है. खबर है कि अमन सिंह ने प्रदेश में अफसरों का एक ऐसा गैंग संचालित कर रखा था जो तमाम तरह के अवैधानिक कामों को अंजाम देने में माहिर था. हाल के दिनों में सन स्टार टीवी की ओर से किए गए खुलासे में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त रहे राजेश टोप्पो ने यह स्वीकारा है कि उन्हें अमन सिंह का निर्देश मिला था और इस निर्देश के बाद ही वे पत्रकारों की सेक्स सीडी बनवाने के लिए तैयार हो गए थे. खबर है कि एक दीगर स्टिंग आपरेशन में कुछ जिलों के कलक्टर भी अमन सिंह के द्वारा सौंपे गए कामों का जिक्र करते हुए कैद हो गए हैं. इधर भारतीय प्रशासनिक सेवा के कतिपय वरिष्ठ अफसरों और चुनिंदा पत्रकारों ने अमन गैंग से जुड़े अफसरों की पहली सूची कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को मुहैय्या करवाई है.

 

सूची में 2005 के बैच और उसके बाद की बैच के बहुत से अफसर शामिल हैं. इस क्रम में सबसे पहला नाम रजत कुमार का है. मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रहे रजत कुमार का एक आडियो टेप तब चर्चा में आया था जब वे बस्तर में पदस्थ थे. यहां उन्होंने कतिपय पत्रकारों को कमरे में बंद कर जान से मारने की धमकी दी थी और कहा था कि पत्रकारों की छाती पर लाल किताब रखवा देंगे और माओवादी बताकर मरवा देंगे. बस्तर के सुकमा में पदस्थ रहे नीरज बंसोड ने भी जज प्रभाकर ग्वाल से कहा था कि वे किसी भी तरह का फैसला लेने के पहले उनसे पूछ लिया करें. आईएएस मुकेश बंसल अभी शैक्षणिक अवकाश में अमेरिका में हैं, लेकिन उनका नाम भी तीसरे क्रम में रखा गया है. श्रम विभाग की विशेष सचिव आर संगीता, जनसंपर्क विभाग के वर्तमान आयुक्त पी अनबलगन, चिप्स के सीईओ एलेक्स पाल मेनन, पूर्व वरिष्ठ आईएएस और स्वयं को ज्योतिष और ब्रमाण्ड के मर्मज्ञ के तौर पर प्रचारित करने वाले शिवराज सिंह के करीबी अंकित आनंद, बिलासपुर कलक्टर पी दयानंद, धमतरी कलक्टर सीआर प्रसन्ना, विशेष सचिव मंगई, राजनांदगांव कलक्टर भीमसिंह, दंतेवाड़ा कलक्टर सौरभ कुमार , उर्जा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, जशपुर कलक्टर प्रियंका शुक्ला , दुर्ग कलक्टर उमेश अग्रवाल, शम्मी आबिदी, वरिष्ठ अफसर एवं खनिज सचिव सुबोध सिंह, एमके त्यागी शामिल है. पुलिस अफसरों में मुकेश गुप्ता, संजीव शुक्ला, ओपी पाल, आरिफ हुसैन, अशोक जुनेजा का नाम है. सहयोगी अफसरों में तारण सिन्हा, श्वेता सिन्हा, वन विभाग से कौशलेंद्र सिंह, अनिल राय, मुदित कुमार, श्री निवास राव, संजय शुक्ला, सुनील मिश्रा, अरुण प्रसाद, पीसी मिश्रा का उल्लेख है.

सीजी बनाम सीडी

छत्तीसगढ़ में सीडी-सीडी का खेल जमकर चला है और आगे भी इस खेल के जारी रहने की संभावना है. जब मंत्री राजेश मूणत की कथित तौर पर सेक्स सीडी बाजार में आई थीं तो भाजपा यह प्रचारित करने में कामयाब हो गई थीं कि इस कांड के असली कर्ताधर्ता भूपेश  बघेल और पत्रकार विनोद वर्मा है, लेकिन वक्त के साथ कुहांसा छंटा तो पता चला कि इस खेल में एक चैनल का मालिक, व्यापारी और सीएम हाउस से जुड़े कतिपय अधिकारी शामिल है. सन स्टार के स्टिंग आपरेशन से भी साफ हुआ कि भाजपा के लिए काम करने वाले अधिकारी ही वरिष्ठ नेताओं और पत्रकारों की सेक्स सीडी बनवाने में लगे हुए थे. भूपेश बघेल अब मुख्यमंत्री है, लेकिन यह भी सच है कि उन्हें सीडी कांड का मुख्य आरोपी घोषित करने में भी कुछ अफसरों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. फिलहाल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को जो दूसरी सूची दी गई है उसमें वरिष्ठ अफसर प्रदीप गुप्ता और अजात शत्रु का नाम प्रमुखता के साथ रखा गया है. एक अन्य सूची में डीजी एएन उपाध्याय और समय से पहले ही मुख्य सचिव का पद त्यागकर रेरा के लिए समर्पित हो जाने वाले विवेक ढांड का नाम भी शामिल किया गया है. उच्च शिक्षा विभाग में आरएसएस समर्थित अफसरों का जमावड़ा है. इसके अलावा मंत्रालय में लंबे समय से संविदा में तैनात कई अफसरों का नाम भी शामिल किया गया है. इसमें राजस्व विभाग में संविदा में तैनात पी निहलानी का नाम भी है. बताते हैं कि इस अफसर ने ही बघेल के निवास और खेत की नाप-जोख में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थीं.

 

 

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रमन-अमन नहीं चाहते थे कि भूपेश सीएम बने

राजकुमार सोनी

सबसे लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहने और सदन से लेकर सड़क तक की लड़ाई वाले भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बनने में सफल हो गए हैं, लेकिन भाजपा के पूर्व सीएम रमन सिंह और सुपर सीएम अमन सिंह नहीं चाहते थे कि बघेल मुख्यमंत्री बने. खबर है कि बघेल को रोकने के लिए कई तरह की कवायद की गई थी.एक शराब माफिया लगभग पांच सौ करोड़ के आफर के साथ पिछले कई दिनों से दिल्ली में सक्रिय था. इसके अलावा छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाके में कोयले के खनन कार्य में जुटा एक नामी उद्योगपति भी उठापटक में लगा था. अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा भी बघेल को मुख्यमंत्री बनाए जाने के खिलाफ थे इसलिए उन्होंने ताम्रध्वज साहू के नाम को आगे बढ़ाया था और समर्थन भी दिया था. भारतीय प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा से संबंद्ध अफसर भी बघेल के खिलाफ तगड़ी लामबंदी कर रहे थे, लेकिन सारी लामबंदी धरी रह गई.

तेरी कह के लूंगा…

जिन लोगों ने अनुराग कश्यप की गैंग्स आफ वासेपुर देखी है वे नवाजुद्दीन के किरदार से वाकिफ है. जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने बंपर सीटों के साथ चुनाव जीता तो लोगों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और भूपेश बघेल को लेकर सोशल मीडिया में कई तरह की पोस्ट की. इस पोस्ट में इस फिल्म का एक डायलाग भी चस्पा था- तेरी कह के लूंगा.

यह सही है कि बघेल और उनकी टीम को किसान, आदिवासी, शिक्षाकर्मी, व्यापारी, सरकारी कर्मचारी सहित अलग-अलग समुदाय का जबरदस्त समर्थन मिला है, लेकिन एक बड़ी आबादी रमन और अमन सिंह के 15 साल के अत्याचार और कुशासन का हिसाब भी चाहती है. पिछले एक हफ्ते में जब-जब सीएम की दौड़ में टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू और चरणदास महंत का नाम चला तो लोगों को यह कहते हुए भी सुना गया कि भाई… जो भी हो… हिसाब-किताब तो अपना बघेल ही मांग पाएगा. इस विश्वास के पीछे की वजह यह भी थीं कि लोगों ने बघेल को लाठी-डंडे खाते देखा था. जेल जाते देखा था. यहां तक औरतों- बच्चों और बेगुनाहों पर हमला करने वाली रमन सिंह की बहादुर सरकार ने बघेल की मां-पत्नी और बच्चे को भी थाने में बिठवा दिया था. वैसे रमन सिंह की कथित बहादुर सरकार ने यह कारनामा शहीद नंदकुमार पटेल के पुत्र उमेश पटेल के परिजनों के साथ भी किया था. रमन के सुपर सीएम ने तो भाजपा के कद्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को भी नहीं छोड़ा था. कुछ चारण भाट अखबार और चैनल वालों ने जलकी कांड की आड़ लेकर बृजमोहन अग्रवाल की पत्नी और बच्चों को भी निशाना बनाया. वैसे हकीकत यह भी है कि भाजपा का एक बड़ा धड़ा बघेल के मुख्यमंत्री बनने से खुश हैं. इस धड़े से जुड़े लोग भी 15 सालों में मुख्यमंत्री और उसके कुनबे का विस्तार देखकर हतप्रभ थे. एक स्टिंग आपरेशन में सांसद रमेश बैस, नंदकुमार साय, सांसद चंदूलाल साहू, बंशीलाल महतो यह स्वीकार कर चुके हैं कि छत्तीसगढ़ में नौकरशाही हावी हो गई थीं. सरकार को रमन सिंह नहीं ब्लकि सुपर सीएम अमन सिंह चला रहे थे. भले ही एक- दो बड़े कांग्रेसी नहीं चाहते थे कि बघेल सीएम बने, लेकिन रमन सिंह और अमन सिंह की कार्यप्रणाली से नाराज भाजपा का एक बड़ा धड़ा इस कवायद में लगा हुआ था कि किसी भी तरह से बघेल मुख्यमंत्री बन जाए.

 

अब जबिक बघेल मुख्यमंत्री बन गए हैं तो उनसे कई तरह की अपेक्षाएं की जा रही है. जाहिर सी बात है उन्हें दस दिनों के भीतर किसानों का कर्जा माफ करना है. यह उनकी प्राथमिकता का सबसे पहला और बड़ा काम भी है, लेकिन इस काम के साथ ही उन्होंने झीरम कांड की जांच की घोषणा कर शहीद परिवारों की आत्मा को ठंडक दी है. केवल शहीद परिवार ही नहीं प्रदेश की जनता भी इस जघन्य हत्याकांड से पर्दा उठते हुए देखना चाहती है. प्रारंभ से ही बघेल इसे राजनीतिक साजिश करार देते रहे हैं. इस कांड में भारतीय पुलिस सेवा के कई बड़े अफसरों की संलिप्तता को लेकर सवाल उठते रहे हैं. इस कांड से कुहांसा काफी पहले छंट गया होता अगर रमन सिंह की सरकार सीबीआई जांच के लिए तैयार हो जाती. सरकार ने मामले में लीपा-पोती की तो संदेह बढ़ता चला गया. इसके अलावा नान घोटाले में मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह और उनकी पत्नी का नाम उछाला है तो पनामा पेपर में उनके बेटे अभिषेक सिंह का. भले ही पूर्व सरकार कोर्ट से कई मामलों में क्लीन चिट जैसी स्थिति लेकर बैठी हुई है. सुपर सीएम अमन सिंह की लंबे समय से नियुक्ति और अगुस्ता हेलिकाप्टर की खरीदी का मामला भी कुछ इसी तरह का है. कानून के जानकारों का कहना है कि नए तथ्यों के सामने आने के बाद सरकार चाहे तो मामला रि-ओपन हो सकता है. इस देश ने जेसिका लाल मर्डर केस में ऐसा होते देखा है.

 

जासूस अफसरों से निपटना भी चुनौती

कल तक प्रदेश का गोदी मीडिया बघेल को नकारा साबित करने में जुटा हुआ था. मीडिया को लगता था कि कोई भी दूसरा रमन सिंह और अमन सिंह के मैनेजमेंट का मुकाबला नहीं कर पाएगा, लेकिन अब मीडिया का सुर बदल गया है.मीडिया उन्हें समझदार आक्रामक बताने में जुट गई है. यह सही है कि प्रदेश में माओवाद सहित अन्य कई समस्याएं चुनौतियां बनी हुई है, लेकिन इस चुनौती से ज्यादा बड़ी चुनौती पूर्ववर्ती सरकार के जासूस अफसर भी है. इसमें कोई दो मत नहीं है कि प्रदेश के कई अफसर भगवा रंग में रंगे हुए हैं. हालांकि कांग्रेस ने ऐसे भगवा अफसरों की सूची तैयार रखी हैं, बावजूद इसके यह भी सच है कि ऐसे सभी पलटीमार अफसर नई सरकार के स्वागत में गुलाबों का गुलदस्ता लेकर भी खड़े हैं. भाजपा के जासूस अफसरों से घिर जाना नई सरकार के लिए खतरनाक हो सकता है.

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कटघरे में निर्वाचन आयोग

कटघरे में निर्वाचन आयोग 

रायपुर.छत्तीसगढ़ का निर्वाचन आयोग सवालों के कटघरे में हैं. ऐसा होने की कई वजह है. दरअसल आयोग का काम निष्पक्षता  के साथ चुनाव कराना ही नहीं, निष्पक्षता के साथ दिखना भी हैं, लेकिन हाल के दिनों में आयोग पर जिस ढंग से आरोप लगे हैं उसके बाद    यह यह लगा कि जो कुछ भी घटा वह ठीक नहीं है. आयोग वैसा नहीं है जैसा दिखाई दे रहा है. प्रदेश में प्रथम और दूसरे चरण के मतदान के दौरान जिस ढंग से इवीएम मशीनें खराब हुई उसने सबसे पहले आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया. हालांकि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का कहना है कि आयोग बगैर किसी दबाव के काम कर रहा है, लेकिन जनता के बीच यह संदेश तो चला ही गया कि आयोग का अधिक से अधिक मतदान का नारा फ्लाप था. जनता वोट देने निकली तो मशीन खराब थी. मतदान के बाद  बलौदाबाजार, धमतरी, बेमेतरा सहित कई अन्य जगहों से स्ट्रांग रुम में अनाधिकृत प्रवेश को लेकर आई  शिकायतों ने यह साबित कर दिया कि सुरक्षा के इंतजाम बेहद लचर है. धमतरी में बगैर अनुमति कई कर्मचारियों के प्रवेश के बाद तो यह साफ हो गया है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है. अब भी यह शिकायतें आ रही है कि किसी स्ट्रांग रुम में लाइट बंद हो जाती है तो किसी में कोई लैपटाप लेकर फिल्म देख रहा है. प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि हार के भय से सरकार हर हथकंड़े अपनाना चाहती है. वह कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती, लेकिन जनता ने चौके-छक्के मारने का दावा करने वाले को ब्राउंड्री पर ही कैच करने का निर्णय कर लिया है.                                        

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अब छोटे-मझौले उद्योगों को 59 मिनट में मिलेगा एक करोड़ तक का लोन :मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एमएसएमई यानी छोटे-मझौले उद्योगों के लिए कई नई योजनाओं का ऐलान किया.
इन फ़ैसलों में प्रधानमंत्री मोदी ने 59 मिनट में लोन मिलने की योजना शुरू की है. इसके तहत सभी जीएसटी रजिस्टर्ड एमएसएमई को एक नए पोर्टल की मदद से 1 करोड़ रुपये तक का कर्ज़ मिल सकता है.
इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से लघु उद्योगों के लिए प्रदूषण मानकों को भी काफ़ी सरल बनाया गया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, "सरकार ने फ़ैसला किया है कि वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण कानूनों के तहत एमएसएमई के लिए इन दोनों को एक करके अब सिर्फ एक ही कंसेंट यानी सहमति अनिवार्य होगी."

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अब NRI भी ले सकेंगे RTI से जानकारी

नई दिल्ली : सरकार ने अपना रूख बदलते हुए कहा कि अब प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को भी देश में सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत आवेदन देकर प्रशासन से जुड़ी जानकारी लेने का हक होगा.  कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने आठ अगस्त, 2018 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि एनआरआई आरटीआई कानून के तहत अर्जी देने के लिए पात्र नहीं हैं. गौरतलब है कि आरटीआई कार्यकर्ता कोमोडोर (सेवानिवृत्त) लोकेश बत्रा ने यह रेखांकित करते हुए हाल ही में लिखा था कि पारदर्शिता कानून के तहत प्रत्येक भारतीय को सूचना पाने का अधिकार है.

इसके बाद ही मंत्रालय ने अपने रूख में सुधार किया है. मंत्रालय ने इससे पहले अपनी प्रतिक्रिया में कहा था, ‘‘सिर्फ भारतीय नागरिकों को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत सूचनाएं मांगने का अधिकार है. एनआरआई आरटीआई के तहत अर्जी देने के लिए पात्र नहीं हैं''.  इस संबंध में नयी और सुधार के साथ प्रतिक्रिया को लोकसभा की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है. 

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आतंकवाद के खिलाफ थोपा गया युध्द नहीं लड़ेगा पाकिस्तान :इमरान खान

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ‘‘आतंकवाद के खिलाफ युद्ध’’ को देश पर ‘‘थोपा गया युद्ध’’ करार दिया और अपने देश के अंदर ऐसा कोई युद्ध नहीं लड़ने का सोमवार को वादा किया. इमरान का यह बयान परोक्ष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमला है जिन्होंने बार बार आरोप लगाया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान ने अमेरिका की मदद नहीं की. इमरान ने कहा कि हमने अपने देश के अंदर थोपा हुआ युद्ध अपने युद्ध की तरह लड़ा और इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी. इससे हमारे सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को भी नुकसान हुआ.

उन्होंने कहा कि हम ऐसा कोई युद्ध पाकिस्तान के अंदर नहीं लड़ेंगे. वह उत्तरी वजीरिस्तान में हाल ही में विलय कर बनाए गए नए जिलों की पहली यात्रा के दौरान कबायली सरदारों को संबोधित कर रहे थे. यह क्षेत्र एक समय तालिबान आतंकवादियों का गढ़ होता था. उनके साथ सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा भी थे.

इमरान ने आतंकवादियों के खिलाफ सफल अभियान के लिए सेना, अन्य सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की उपलब्धियों की सराहना की. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान और उसके सशस्त्र बलों ने जितना कुछ किया है, उतना किसी देश या उसके सशस्त्र बल ने नहीं किया है.

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश अब नहीं रहे

वाशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश का निधन हो गया है. बीबीसी ने उनके पुत्र और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के हवाल से बताया है कि जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है. शुक्रवार शाम को जॉर्ज बुश सीनियर ने अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे.

जॉर्ज बुश सीनियर के राष्ट्रपति रहते हुए ही अमेरिका ने इराक पर हमला किया था. उस दौरान इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन ने पड़ोसी कुवैत पर हमला कर दिया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने इराक को निशाना बनाया था. इस युद्ध को पहला खाड़ी युद्ध कहते हैं.

जॉर्ज डब्ल्यू बुश अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति थे. वे साल 1988 में अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे. वह संयुक्त राष्ट्र और चीन में अमेरिका के राजदूत भी रह चुके थे. वह सीआईए के निदेशक भी रहे.

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दिल्ली : साबुन और मेवे की दुकान निकली सीक्रेट लॉकर्स का अड्डा, 25 करोड़ कैश बरामद

चांदनी चौक में बाहर से देखने में साबुन और मेवे की दुकान सीक्रेट लॉकर्स का अड्डा निकली। सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग की कार्रवाई में यहां हवाला से जुड़े रैकेट के सबूत मिले हैं। आयकर विभाग के अनुसार चांदनी चौक के नया बाजार इलाके में साबुन और मेवे की छोटी दुकान में पड़े छापे में 100 से ज्यादा सीक्रेट लॉकर मिले हैं, जिनमें 25 करोड़ रुपये कैश बरामद हुआ है। 

सूत्रों के अनुसार इन लॉकरों से इतनी बड़ी मात्रा में कैश बरामद हुआ है कि इसकी काउंटिंग के लिए इनकम टैक्‍स अफसरों को कई रातें इन्हीं दुकानों में गुजारनी पड़ीं। ये अफसर कई दिनों से इन्‍हीं दुकानों में है, वे दुकान में ही सोते, रहते, खाते रहे, जिससे कि जल्द से जल्द लॉकर से मिले कैश को गिना जा सके। सूत्रों की मानें तो अब भी इस कैश की गिनती जारी है, क्योंकि सभी लॉकरों को खोला नहीं जा सका है। 

मीडिया में आई खबरों के अनुसार इन सीक्रेट लॉकर की जानकारी आईटी डिपार्टमेंट को दिवाली की रात मिली थी। तभी अफसरों ने इन लॉकरों को सील कर दिया था। लॉकर ऑपरेशन से जुड़ी यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। सितंबर में दुबई से जुड़े 700 करोड़ के हवाला रैकेट में ईडी ने 29 लाख कैश और दस्तावेज बरामद किए थे। इससे पहले जनवरी 2018 में साउथ एक्स के एक प्राइवेट लॉकर से 40 करोड़ से ज्यादा की नगदी मिली थी। 

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