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सरकार ने मुकेश गुप्ता को थमाया आरोप पत्र...डीएम अवस्थी को आपराधिक मामलों की विभागीय जांच का जिम्मा

रायपुर. सरकार ने विवादास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता को आरोप पत्र देने के साथ ही उनके आपराधिक मामलों की विभागीय जांच का जिम्मा पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी को सौंप दिया है. सरकार ने अखिल भारतीय सेवा ( अनुशासन तथा अपील ) नियम 1969 के नियम 8 ( 6 ) सी के अंतर्गत जांच अधिकारी के समक्ष शासन का पक्ष प्रस्तुत करने के लिए दुर्ग के पुलिस महानिरीक्षक हिमांशु गुप्ता को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी भी बनाया है. गृह विभाग के अवर सचिव डीपी कौशल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पुलिस महानिदेशक श्री अवस्थी पूरी तत्परता से मुकेश गुप्ता के खिलाफ जांच प्रारंभ करें और मय दस्तावेज अपना प्रतिवेदन शासन को उपलब्ध कराए. प्रस्तुतकर्ता अधिकारी हिमांशु गुप्ता से भी अपेक्षा की गई है कि वे जांच अधिकारी से संपर्क स्थापित कर अभिलेखों के साथ कार्रवाई को जल्द से जल्द पूरी करें.

तीन बिन्दुओं का आरोप पत्र

कई तरह के आरोपों से घिरे मुकेश गुप्ता पर विभागीय जांच के लिए तीन बिन्दुओं का आरोप पत्र तैयार किया गया है. पहले बिन्दु में उल्लेखित है कि वर्ष 1988 बैच के मुकेश गुप्ता ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक के पद पर रहने के दौरान अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से कार्यालयीन दस्तावेजों एवं रजिस्टर में बैक डेट में प्रविष्टियां करवाई थीं. उनका यह कृत्य अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 के नियम 3 का उल्लंघन है इसलिए क्यों न उन पर कार्रवाई की जाय. आरोप पत्र के दूसरे बिन्दु में उल्लेखित है कि गुप्ता ने अपराध क्रमांक 9 / 2015 में कायमी दिनांक के पूर्व प्रावधानों का उल्लंघन कर आम नागरिकों का फोन टेप किया था और उसका उपयोग साक्ष्य के तौर पर किया. तीसरे बिन्दु में साफ कहा गया है कि उन्होंने लोकसेवक के पद पर रहते हुए कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान स्वेच्छाचारिता प्रदर्शित की जिससे पुलिस की छवि धूमिल हुई. पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी के जांच अधिकारी एवं दुर्ग रेंज के आईजी हिमांशु गुप्ता के प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त होने के बाद यह माना जा रहा है कि दोनों अधिकारी अपनी रिपोर्ट शासन को जल्द से जल्द सौंप देंगे.

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पुनीत गुप्ता को थमाया जाएगा आरोप पत्र सस्पेंड करने की तैयारी भी

रायपुर. अंतागढ़ टेपकांड और डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में करोड़ों के उपकरण खरीदी घोटाले में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के दामाद डाक्टर पुनीत गुप्ता को जल्द ही आरोप पत्र थमाकर सस्पेंड किया जा सकता है. गौरतलब है कि डाक्टर गुप्ता को इसी साल 21 जनवरी को अस्पताल के अधीक्षक पद से हटाकर ओएसडी बनाया गया था. उन्होंने 22 फरवरी 2019 को ओएसडी के पद पर अपना कार्यभार ग्रहण किया था और फिर सात दिनों के लिए छुट्टी पर चले गए थे. उम्मीद की जा रही थी कि ओएसडी के पद पर रहते हुए वे तमाम तरह के मामलों का सामना करेंगे, लेकिन अचानक 4 फरवरी को उन्होंने शासन के खाते में एक माह का वेतन लगभग एक लाख 72 हजार रुपए जमा कर मेडिकल कालेज के आवक-जावक शाखा में अपना इस्तीपा सौंप दिया था. इस बीच चर्चा थीं कि देर-सबेर उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया जाएगा, लेकिन उनके द्वारा किसी भी तरह का नो ड्यूज न दिए जाने चलते उनके इस्तीफे को मंजूरी नहीं दी गई. अब स्वास्थ्य महकमा उन्हें आरोप पत्र थमाकर सस्पेंड करने की तैयारी कर रहा है. सूत्र बताते हैं कि उन्हें दो-चार दिनों में सस्पेंड कर दिया जाएगा.

डाक्टर पुनीत गुप्ता पर आरोप है कि डीकेएस अस्पताल को नया बनाने के लिए मनमाने ढंग से 104 करोड़ रुपए फूंके थे. उन्हें कुल 59 करोड़ रुपए के उपकरण की खरीदी करनी थीं, लेकिन नियम-कानून को बलाए-ताक रखकर उन्होंने 128 करोड़ के उपकरण खरीदे. अस्पताल में कुल 141 पदों पर भर्ती की जानी थी, लेकिन चार ऐसे पदों पर भी भर्ती की गई जिसका उल्लेख नहीं था. उन पर एबुलेंस की खरीदी और फार्मेसी की निविदा में गड़बड़ी का आरोप भी लगा. बताया जाता है कि उन्होंने फार्मेंसी में सिंगल टेंडर के जरिए एक व्यापारी को उपकृत किया.

 

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बाप रे बाप... मुकेश गुप्ता के मिक्की मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के 97 खाते

रायपुर. देश के विवादास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता का अब किसी भी सूरत में बच निकलना मुश्किल लग रहा है. छत्तीसगढ़ की रमन सरकार मुकेश गुप्ता के कारनामों पर पर्दा डालती रही, लेकिन भूपेश सरकार ने गुप्ता के नए-पुराने सभी कारनामों को उधेड़कर रख दिया है. गुप्ता पर पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है. अवैध ढंग से फोन टेपकर संभ्रात लोगों को ब्लैकमेल करने के  आरोप में फंसे मुकेश गुप्ता पर अभी हाल के दिनों में गृह विभाग ने मनी लांड्रिग से संबंधित एक शिकायत पर जांच की अनुमति दी है. सूत्रों का कहना है कि मिक्की मेहता के सगे भाई माणिक मेहता ने तमाम तरह के सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर इस मामले की सबसे पहली शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थी, वहां से जांच के लिए निर्देश आने के बाद ईओडब्लू ने मामला दर्ज कर गृह विभाग से जांच की अनुमति मांगी थी. बताते हैं कि मिक्की मेहता मेमोरियल ट्रस्ट ने एक बैंक में कुल 97 खाते खोल रखे है. हैरत की बात यह है कि कोई ट्रस्ट अगर ईमानदारी से कार्य कर रहा है तो उसे इतनी बड़ी संख्या में खातों के संचालन की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए थीं. बहरहाल पुलिस यह पता लगाने में जुट गई है कि इतनी  बड़ी संख्या में खातों का परिचालन किस मकसद से किया जाता था. किस खाते में कितनी रकम कब-कब जमा की गई और किसने दी.

जो फंसता था लिया जाता था तगड़ा डोनेशन

गौरतलब  है कि भारतीय पुलिस सेवा में रहने और पूर्व से शादी-शुदा होने के बावजूद मुकेश गुप्ता ने नेहरू नगर भिलाई की निवासी श्माया मेहता की पुत्री और माणिक मेहता की बहन मिक्की से ब्याह रचाया था. एक रोज संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई तब परिजनों ने आरोप लगाया कि मिक्की की हत्या कर दी गई है. मिक्की की मौत के बाद जब मुकेश गुप्ता ने  मिक्की मेहता मेमोरियल ट्रस्ट खोला तो पहले-पहल लोगों ने यह माना कि यह मिक्की की स्मृति को जीवित रखने का कोई उपक्रम है, लेकिन बहुत जल्द ही इस ट्रस्ट की गतिविधियों को लेकर आरोप लगना शुरू हो गया. धीरे-धीरे यह बात सामने आई कि ट्रस्ट संवेदना बटोरने के लिए ही नहीं बल्कि उसकी आड़ में लोगों से डोनेशन लेने के लिए खोला गया था. खबर है कि जो लोग काली कमाई करने में माहिर थे वे इस ट्रस्ट में अपने काले धन को सफेद करने के लिए पैसा लगाते थे. जो कोई भी मुकेश गुप्ता की गिरफ्त में फंसता था तो वह तभी बच पाता था जब वह मिक्की मेहता मेमोरियल ट्रस्ट में डोनेशन देने के लिए तैयार हो जाता था. सामान्य तौर पर जो कोई भी किसी धर्मार्थ या परमार्थ ट्रस्ट में डोनेशन देता है उसे आयकर विभाग से छूट मिलती है. मिक्की मेहता मेमोरियल ट्रस्ट धनाढ्य लोगों के काले धन को सफेद करने का एक केंद्र बन गया था. सूत्रों का कहना है कि ईओडब्लू ने अपनी प्रारंभिक जांच में अवैध ढंग से कई खातों का परिचालन होना पाया है. गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के विधानसभा मार्ग पर स्थित मिक्की मेहता मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना को लगभग 18 साल हो गए हैं. इन 18 सालों में एक भी बार इस ट्रस्ट ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट पंजीयक सार्वजनिक न्यास को नहीं सौंपी है. इस ट्रस्ट से कौन-कौन लोग जुड़े हैं. वे क्या करते हैं. ट्रस्ट में उनकी कितनी पूंजी लगी है. ट्रस्ट की वार्षिक आम सभा कब-कब हुई. किसने कितना चंदा दिया है. कब दिया है... अब तक कुछ भी सार्वजनिक नहीं किया गया है. बहरहाल एक ही बैंक में 97 खातों का होना चौंकाने वाला मामला है. 

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सामाजिक कार्यकर्ता ममता शर्मा से की गंदी बात... ज्वाइंट डायरेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज

रायपुर. प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता ममता शर्मा से अश्लील बात करने के आरोप छत्तीसगढ़ रायपुर की राजेंद्र नगर पुलिस ने उद्योग विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर संतोष भगत के खिलाफ धारा 354 ( क ) के तहत मामला दर्ज कर लिया है. ममता शर्मा ने बताया कि एक मई को वह एक पारिवारिक कार्यक्रम से घर लौटी ही थीं कि अचानक उसके फोन नंबर पर उद्योग विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर पदस्थ संतोष भगत ने सुबह-सुबह इस बात के लिए फोन लगाया कि वह जल-जंगल-जमीन के मसले पर कुछ बात करना चाहता है. पहले तो वह उस शख्स को पहचान नहीं पाई और यह समझती रही कि कोई संतोष जैन है. बाद में उसने अपना नाम स्पष्ट किया और कहा कि वह उन्हें जानता है और शराबबंदी को लेकर पहले भी चर्चा कर चुका है. ममता शर्मा ने पुलिस को एक ऑडियो टेप भी दिया है जिसमें यह सुनाई देता है कि सरकारें आती-जाती रहती है. आपसे कभी बात होगी समता जजमेंट को लेकर... जल- जंगल-जमीन नक्सली मूव्हमेंट सब खत्म हो जाएगा. बातचीत में सामने वाला यह भी स्वीकार करता है कि वह खुद भी शराब पीता है. ममता शर्मा उन्हें समझाती है कि कोई अपने घर में एक दो पैग पीता है तो अलग बात है, लेकिन शराब की वजह से समाज के एक वर्ग में विघटन बढ़ गया है. बाद में संतोष भगत यह कहकर बातचीत बंद कर देता है कि फिर बातचीत होगी, लेकिन उसका फोन चालू रहता है. ऑडियो में गिलास... पानी... ब्लैक लेबल का जिक्र होता है और पंड़िताइन.................... कहते हुए अश्लील बातें सुनाई देती है.

ममता शर्मा ने बताया कि पूरी बातचीत से ऐसा लग रहा था कि कुछ लोग कार्यालयीन समय में ही एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे. ममता ने बताया कि जब उन्होंने उद्योग विभाग के ही कतिपय अधिकारियों से चर्चा की तब पता चला कि ज्वाइंट डायरेक्टर कार्यालयीन समय में भी शराब पीकर आता रहा है. इधर सामाजिक कार्यकर्ता उचित शर्मा, राकेश चौबे, कुणाल शुक्ला, अनिल अग्रवाल, अभिषेक प्रताप सिंह, नागेंद्र दुबे और व्यास मुनि ने ज्वाइंट डायरेक्टर की गिरफ्तारी की मांग की है. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि अगर आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा.

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मिक्की मेहता हत्याकांड में भी कसेगा मुकेश गुप्ता पर शिकंजा

रायपुर.छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित मिक्की मेहता हत्याकांड में भी जल्द ही निलंबित पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता पर शिकंजा कसा जा सकता है. खबर है कि डीजी गिरधारी नायक ने पूरे मामले की जांच लगभग पूरी कर ली है. इस मामले में अब तक पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर, पूर्व पुलिस महानिदेशक रामनिवास, सेवानिवृत पुलिस अफसर डीएस वर्मा, जगत विजन पत्रिका की संपादक विजया पाठक, मिक्की मेहता की मां श्यामा मेहता, भाई माणिक मेहता एवं उनके परिजनों सहित अन्य कई का बयान दर्ज किया जा चुका है. हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि किसने क्या बयान दिया है, लेकिन प्रशासनिक हल्कों में यह चर्चा है कि सभी पक्षों ने इस प्रकरण को आत्महत्या के बजाय आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वाला माना है. इधर मिक्की मेहता की मृत्यु प्रकरण से संबंधित डायरी जो काफी समय से गुम हो गई थीं वह मिल गई है. पुलिस को यह मर्ग डायरी जिला अदालत में मिली है. इसमें मिक्की मेहता की मौत से संबंधित कई तथ्यात्मक दस्तावेज संलग्न है जो मुकेश गुप्ता के लिए मुसीबत का सबब हो सकते हैं.

गौरतलब है कि आईपीएस मुकेश गुप्ता ने अपनी पहली पत्नी के रहते हुए भी मिक्की मेहता से दूसरा विवाह किया था, लेकिन नौकरी जाने के भय से वे इस मामले को छिपाकर रखना चाहते थे. वर्ष 2001 में जब मिक्की मेहता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई तब उनके परिजनों ने साफ तौर पर यह आरोप लगाया था कि मिक्की ने आत्महत्या नहीं की बल्कि उसकी हत्या की गई है. परिजनों की शिकायत के बाद हल्के-पुल्के स्तर पर जांच चलती रही. पूर्व पुलिस महानिदेशक रामनिवास ने इस मामले की जांच में यह मान लिया था कि मुकेश गुप्ता ने मिक्की मेहता से गंधर्व विवाह किया था जो कदाचरण की श्रेणी में आता है. नियमानुसार काफी पहले ही मुकेश गुप्ता को नौकरी से हाथ धोना पड़ जाता, लेकिन वे रमन सिंह के कार्यकाल में बचते रहे और संविदा में पदस्थ सुपर सीएम का सहारा लेकर लगातार पावरफुल भी होते गए. इधर नई सरकार के गठन के बाद जब पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने नए सिरे से शिकायत की तो जांच का जिम्मा वरिष्ठ पुलिस अफसर गिरधारी नायक को सौंपा. खबर है कि  नायक जल्द ही सरकार को रिपोर्ट सौंप देंगे.

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टेलीफोन में लवयू... लवयू बोलते थे मुकेश गुप्ता... आया लाखों का बिल तब फूटा भांडा

टेलीफोन में लवयू... लवयू बोलते थे मुकेश गुप्ता... आया लाखों का बिल तब फूटा भांडा

रायपुर. यह खबर इसलिए नहीं लिखी जा रही है कि इस खबर का रिपोर्टर प्रेम का विरोधी है. नफरत के जमाने में कोई प्रेम करता है तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है, लेकिन जब प्रेम के चक्कर में शासकीय धन और संपत्ति का दुरुपयोग हो तो उसे प्रेम नहीं अपराध माना जाता है. फिलहाल छत्तीसगढ़ में टेपकांड में फंसे आईपीएस मुकेश गुप्ता ने मध्यप्रदेश के उज्जैन में अपनी पदस्थापना के दौरान कई मर्तबा सरकारी टेलीफोन से मिक्की मेहता को लवयू... लवयू... कहा था. दिन हो या रात वे अक्सर मिक्की मेहता से फोन पर बातें किया करते थे. इस बात का खुलासा तब हुआ जब मुकेश गुप्ता के अधीनस्थ सरकारी टेलीफोन क्रमांक 513300, 513301, 515141, 515557, 515558, 511640, 516811 का बिल लाखों में आया और उसका भुगतान शासकीय धन से किया गया.

यह बात है वर्ष 1998 से 2000 के बीच की है. इस अवधि में मुकेश गुप्ता उज्जैन में पुलिस अधीक्षक थे. पाठक सोच रहे होंगे कि इतने साल पुरानी बात को यहां बताने के पीछे का मकसद क्या है. मकसद सिर्फ इतना है कि टेप और टेलीफोन कांड से मुकेश गुप्ता का पुराना और अटूट नाता रहा है. जब यह कांड हुआ तब मुकेश गुप्ता ने स्वयं को बचाने के लिए विवेचक डीएस वर्मा और उज्जैन रेंज में पदस्थ सीके तिवारी नाम के एक उप पुलिस अधीक्षक को अपने लपेटे में लिया था. तिवारी ने 10 अप्रैल 2000 को अपराध अनुसंधान विभाग के पुलिस महानिदेशक को एक गोपनीय शासकीय पत्र लिखकर जो सनसनीखेज जानकारी दी थी उसका संक्षिप्त विवरण यहां प्रस्तुत है-

मुकेश गुप्ता मिक्की नाम की महिला से देर रात तक वार्तालाप किया करते थे. इस वजह से ही टेलीफोन का बिल लाखों में आया. इन बिलों का भुगतान शासकीय धन से किया गया है इसलिए यह अपराध भी है. यह कृत्य स्पष्ट रुप से पद का दुरूपयोग एवं भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है. पुलिस अधीक्षक मुकेश गुप्ता मिक्की मेहता से अपनी प्रगाढ़ता स्वीकार कर चुके हैं. जब उन्हें यह पता चला कि उनके टेलीफोन कांड की गोपनीय ढंग से जांच चल रही है तब उन्होंने मिक्की मेहता से अचानक बात बंद कर दी और बचने के लिए 40 हजार का बिल स्वयं पटाया जबकि बिल सात लाख से दस लाख के आसपास का है. पत्र में तिवारी ने साफ कहा है कि मुकेश गुप्ता विवेचक और उन्हें ( तिवारी को ) फंसाने के लिए कुचक्र रच रहे हैं. तिवारी ने साफ लिखा कि मुकेश गुप्ता आए दिन उनके परिवार को बर्बाद करने की धमकी देते रहते हैं, लेकिन इस प्रकार की धमकियों से न तो वह विचलित होने वाला है और न भविष्य में विचलित हो सकता है.

 

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जैसे ही मुकेश गुप्ता ने कहा- च्यूटी की तरह मसल दूंगा एएसआई ने पलटकर कहा- तमीज से बात करिए

रायपुर. विवादास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता का एक स्थायी तकिया कलाम है- च्यूटी की तरह मसल दूंगा. उनके मातहत काम करने वाले लोग बताते हैं कि जो कोई भी नियम के खिलाफ काम करने से इंकार करता था उसे वे डरा-धमकाकर कहते थे- ज्यादा बकवास मत करो... च्यूटी की तरह मसल दूंगा. गुरुवार को जब मुकेश गुप्ता ईओडब्लू में बयान दर्ज करने पहुंचे तो पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसना के कमरे में पहले से मौजूद अफसरों को उन्होंने सीधे तौर पर बाहर चले जाने के लिए कहा. उस कमरे में एक एएसआई भी मौजूद था. गुप्ता उस एएसआई को देखते ही बिफर गए. उन्होंने एएसआई से कहा- तू तो बिलासपुर का रहने वाला है न... यहां कैसे आ गया. चल बाहर निकल... नहीं तो च्यूटी की तरह मसल दूंगा....। एएसआई ने भी पलटकर जवाब दिया- तमीज से बात करिए... आप कौन हो... क्या हो... मुझे लेना-देना नहीं है. बयान देने आए हो तो सीधे-सीधे बयान दीजिए.

कोर्ट में घसीटने की धमकी

मुकेश गुप्ता की करतूतों को लेकर जो खबरें छनकर पहुंच रही है वह एक आततायी और निरकुंश अफसर की दर्प से भरी हकीकत ही बयां करती है. बताते हैं कि गुरुवार की सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर जैसे ही वे इंदिरा कल्याण एलेसना के कमरे में दाखिल हुए वैसे ही उन्होंने अफसरों से कहा- पता है न बख्शी ( एक अफसर ) को कोर्ट में पार्टी बना दिया हूं... तुम सबको भी कोर्ट में घसीट दूंगा. मेरे पास बहुत पैसा है. एक-एक वकील को 32-32 लाख देता हूं. कमरे में मौजूद एसपी को जब उन्होंने तेवर दिखाते हुए बाहर चले जाने के लिए हड़काया तो एसपी ने विनम्रता से कहा- सर... मैं सुपर विजन अफसर हूं. आप अपने वकील के साथ आए हैं तो मैं उसके साथ ही यहां थोड़ी दूर बैठ जाता हूं. आप बयान दे दीजिए. जब यह सब बात हो रही थी तब थोड़ी देर के लिए कमरे में पुलिस महानिरीक्षक जीपी सिंह भी दाखिल हुए. उन्हें देखते ही गुप्ता बिफर गए और भला-बुरा कहने लगे. ( जो कुछ कहा गया है उसे यहां लिखा नहीं जा सकता है. ) जीपी सिंह ने संयम का परिचय तो दिया मगर तल्ख होकर कहा- जिस काम के लिए आप आए हैं वह कर लीजिए... फिर जो लिखा-पढ़ी आपको करनी है वह करते रहिएगा. आपको किसने रोका है.

कुदरत का इंसाफ

यह शीर्षक किसी हिंदी फिल्म का लग सकता है, लेकिन मुकेश गुप्ता पर भूपेश सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई को लोग कुदरत का इंसाफ मानकर ही चल रहे हैं. मुकेश गुप्ता के कारनामों से त्रस्त लोगों का कहना है कि जिस मिक्की मेहता से मुकेश गुप्ता ने गंधर्व विवाह किया था उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के लिए भी वे जिम्मेदार थे, लेकिन तब तमाम तरह की शिकायतों को रमन सरकार ने कचरे के डिब्बे में डाल दिया था. अब लगता है कि देर-सबेर मिक्की मेहता के परिजनों को न्याय मिल जाएगा. इधर भले ही हाईकोर्ट ने गुप्ता को जांच में सहयोग करने के लिए निर्देशित किया है, लेकिन लगता नहीं है वे बहुत ज्यादा दिनों तक बच पाएंगे. उनके खिलाफ कई तरह की और भी शिकायतें है जिन पर जांच चल रही है. सूत्र बताते हैं कि जल्द ही सभी शिकायतों पर एफआईआर दर्ज हो जाएगी. इधर खबर है कि ईओडब्लू उन्हें अभी पांच-छह बार और बुलाएगा. फिलहाल बयान देने के लिए दूसरी नोटिस जारी करने की तैयारी चल रही है.

 

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मुकेश गुप्ता को जमा करनी होगी सर्विस रिवाल्वर भी

रायपुर. शायद ही कभी किसी ने आईपीएस ( अब निलंबित ) मुकेश गुप्ता को सर्विस रिवाल्वर के साथ वर्दी में देखा होगा. इधर वाहन वापस लिए जाने का आदेश जारी होने के साथ ही पुलिस अब इस खोजबीन में जुट गई है कि क्या कभी मुकेश गुप्ता को कोई सर्विस रिवाल्वर इशु की गई थीं. यदि ऐसा हुआ है तो गुप्ता से सर्विस रिवाल्वर वापस लेने की कार्रवाई भी अब-तब में संभावित है. यहां बता दें कि नियमानुसार कोई भी निलंबित पुलिस अफसर न तो सरकारी वाहन का उपयोग कर सकता है और न ही सर्विस रिवाल्वर अपने साथ रख सकता है. निलंबन अवधि में उसे केवल जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होती है और निर्धारित जगह पर आमद देनी होती है

आवश्यक होने पर ही मिलेगी सुरक्षा 

पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी की ओर से निर्देश जारी होने के बाद पुलिस यह भी पता लगा रही है कि गुप्ता की सेवा में कुल कितने गनमैन की ड्यूटी लगाई गई थी. पुलिस महानिदेशक का कहना है कि निलंबन के बाद जैसे ही उन्हें यह पता चला था कि चार गनमैन ड्यूटी बजा रहे हैं तो दो गनमैन को वापस भेज दिया गया था, लेकिन अगर और कहीं कोई तैनात है तो उसे समीक्षा के बाद वापस भेज दिया जाएगा. यदि सुरक्षा देना आवश्यक लगा तभी सुरक्षा दी जाएगी.

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विराट के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी जागते रहे रात भर

रायपुर. बिलासपुर के भाजपा कार्यालय के सामने की गली नंबर 6-7 से जिस  मासूम विराट का अपहरण हुआ था उसे पुलिस अल-सुबह ढूंढने में कामयाब हो गई है. इस मासूम के अपहरण के बाद उच्च न्यायालय ने चिंता जताई थी तो प्रचार के लिए अमेठी जाने से पहले दिल्ली में ठहरे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी से सुबह पांच बजे तक पल-प्रतिपल की जानकारी लेते रहे. बघेल ने साफ शब्दों में कहा- परिवार के चेहरे पर खुशी लौटनी चाहिए... चाहे जो हो जाय. हर हाल में विराट को खोजना है. बाद में किसी के घर जाकर खेद जताने वाली स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए. गौतलब है कि 20 अप्रैल  को मासूम विराट का बिहार के एक गैंग ने अपहरण कर लिया था. इसी 28 अप्रैल को विराट का जन्मदिन है, लेकिन उससे पहले पुलिस ने उसे गैंग के हाथों से छुड़ाने में कामयाब हो गई. पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने बताया कि सामान्य तौर पर जब भी किसी बच्चे का अपहरण होता है तो पुलिस को काफी एहतियात के साथ अपनी कार्रवाई करनी होती है. अपहरणकर्ता पांच करोड़ की फिरौती के चक्कर में थे जो घटते-घटते ढाई-तीन करोड़ तक आ गई थीं. विराट को हजारों-हजार झोपड़ियों के बीच रखा गया था जहां से उसे निकालना बेहद कठिन था. अपहरणकर्ता खुद को बचाने के लिए बच्चे की जान के साथ खेल सकते थे, लेकिन पुलिस ने काफी सूझबूझ के साथ अपनी कार्रवाई को अंजाम दिया और गैंग के सदस्यों को धर-दबोचा. विराट की बरामदगी के लिए बिलासपुर के एसपी के साथ-साथ दुर्ग और बालोद के एसपी भी विशेष रुप से तैनात किए गए थे.विराट का अपहरण गैंग के किन सदस्यों ने किया था. उनकी मंशा क्या थी... इसकी विस्तृत जानकारी पुलिस शुक्रवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस में देगी, 

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छत्तीसगढ़ को शराब का समुन्दर बनाने वाले समुंद्र सिंह की तलाश में ईओडब्लू ने मारा छापा

रायपुर.खुद को पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का रिश्तेदार बताकर आबकारी महकमे में रिटायरमेंट के बाद भी नौ साल तक संविदा में तैनात रहे विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी समुंद्र सिंह की तलाश में ईओडब्लू ने शुक्रवार को बोरियाकला के मकान पीपल 172 के अलावा बिलासपुर के नेहरू नगर स्थित पारिजात एक्सटेंशन मकान नंबर एमआईजी 21 में अल-सुबह छापामार कार्रवाई की है. बताते हैं कि बोरियाकला का मकान नागपुर में पदस्थ विजलेंस अफसर भुवनेश्वर सिंह के नाम पर है जिसमें अक्सर समुंद्र सिंह आया-जाया करते थे.नई सरकार के गठन के बाद से अचानक गायब हो गए समुंद्र सिंह पर करोड़ों रुपए की हेरा-फेरी का आरोप है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुशील ओझा और नितिन भंसाली की शिकायत के बाद ईओडब्लू उनकी धरपकड़ के लिए प्रयासरत थीं. सूत्रों का कहना है कि वे छत्तीसगढ़ में पदस्थ एक सत्कार अधिकारी अरविंद सिंह को भी अपना रिश्तेदार बताते रहे हैं. फिलहाल बोरियाकला के जिस मकान में ईओडब्लू ने छापा मारा है वह दस्तावेजों की जप्ती का काम चल रहा है.

शराब ठेकेदारों को पहुंचाया लाभ

शराब के समुन्दर में गोता लगाकर ठेकेदारों को अरबपति बनाने और सरकार को चूना लगाने वाले समुंद्र सिंह के बारे में यह तथ्य सामने आया था कि उन्होंने शराब ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए सारे नियम- कानून ताक पर रख दिए थे. शराब की बिक्री पर 50 से 60 तक प्रॉफिट मार्जिन यानि लाभ दिया गया जो अन्य राज्यों की तुलना में बेहद ज्यादा था. उल्लेखनीय है कि भाजपा के शासनकाल में शराब के मूल्य निर्धारण का कोई मापदंड नही था. एक दुकान में शराब का रेट अलग था तो दूसरी दुकान में अलग रेट. अलग-अलग दर पर बिक्री का लाभ सीधे तौर पर समुंद्र सिंह को मिलता था. लोकल ब्रांड की शराब बिना मापदंडों के परीक्षण के मनमाने तरीके से इंडियन मेड फारेन लिकर की श्रेणी में रख दी जाती थीं और स्थानीय स्तर पर निर्मित होने वाली शराब की बिक्री महंगे दर पर की जाती थी. वर्ष 2012 से वर्ष 2017 तक शराब दुकानों का आवंटन लॉटरी के माध्यम से होता था जिसका लाभ शराब ठेकेदार अर्जित करते रहे. ठेकेदारों ने रामलाल, श्यामलाल, मांगीलाल जैसे नौकरों को भी दुकानें दिलवाई. इस खेल में समुंद्र सिंह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थीं. जिन नौकरों ने दुकानें हासिल की उनका टर्न ओवर भी करोड़ों में था. एक रुपया भी आयकर विभाग को नहीं चुकाया गया. हकीकत यह थी कि जिन लोगों के नाम पर दुकानें आवंटित थीं खुद उन्हें ही यह नहीं पता था कि वे अरबपति है. कांग्रेस नेता नितिन भंसाली सारे तथ्यों के साथ ईओडब्लू में शिकायत की थी. उनका आरोप है कि समुंद्र सिंह ने लगभग पांच हजार करोड़ से अधिक का गड़बड़झाला किया है.

बगैर सूचना के गायब

बगैर सूचना के गायब रहने वालों में मुकेश गुप्ता की स्टेनो रेखा नायर ही शामिल नहीं है. समुंद्र सिंह भी उनमें से एक हैं. आबकारी महकमा भी समुंद्र सिंह की तलाश कर रहा था. इस तलाशी की एक वजह यह थीं कि उन्हें नौकरी से इस्तीफा से देने से पहले सूचना देनी थी. उन्हें एक महीने की तनख्वाह भी जमा करनी थीं. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और अचानक-भयानक ढंग से गायब हो गए. आबकारी महकमे ने उनके विधायक कालोनी स्थित 36 नंबर के मकान पर भी कई मर्तबा नोटिस चस्पा किया था. इसके अलावा सूचना के आधार पर बोरियाकला स्थित निवास पर भी दस्तक दी थीं.

 

 

 

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मुकेश गुप्ता ने दिखाई हेकड़ी..अफसरों को चमकाया...पत्रकार को हड़काया

रायपुर. जो जरुरत से ज्यादा काली संपत्ति का मालिक होता है उसको लगता है कि वह खुदा हो गया है. विवादास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता के साथ भी कमोबेश यही स्थिति कायम है. बेगुनाहों को झूठे केस में फंसाने और अपने काले-पीले कारनामों के लिए मशहूर गुप्ता को हाईकोर्ट से थोड़ी राहत क्या मिली उन्हें लगा कि अब सरकार उनका बाल बांका नहीं कर पाएगी. गुरुवार को बेहद ठसक के साथ ईओडब्लू दफ्तर में अपना बयान दर्ज करवाने के लिए पहुंचे गुप्ता थोड़े समय के लिए यह भूल गए कि वे गंभीर धाराओं के एक नामजद आरोपी है. उनकी हरकतों से लगा कि वे अब भी खुद को ईओडब्लू चीफ मानते हैं. खबर है कि बयान देने के दौरान उन्होंने कई मर्तबा अफसरों को यह कहते हुए लताड़ा कि जानते हो किससे बात कर रहे हो... मैंने तुम लोगों को बनाया है. इतना ही नहीं दफ्तर के बाहर बाइट ( वर्सन ) लिए इंतजार कर रहे पत्रकार आदित्य नामदेव पर उन्होंने जमकर गुस्सा निकाला. गुप्ता ने कहा कि किस तरह की रिपोर्टिंग कर रहे हो सब जानता हूं.

फाइल पटकी

फोन टैपिंग मामले में आरोपी बनाए गए मुकेश गुप्ता को ईओडब्लू ने पहले भी दो मर्तबा बयान देने के लिए दफ्तर बुलाया था, लेकिन वे गुरुवार को अपने वकील के साथ ईओडब्लू दफ्तर पहुंचे. सूत्रों का कहना है कि उन्होंने बयान देने के दौरान कई बार फाइल पटकी और अफसरों को बार-बार यह कहते हुए चमकाया कि ज्यादा तीन-पांच करोगे तो सुप्रीम कोर्ट तक घसीट दूंगा. गुप्ता ने जब ईओडब्लू के एक वरिष्ठ अफसर को तेवर दिखाया तो अफसर ने भी साफ शब्दों में कहा- सर... कोर्ट ने आपको जांच में सहयोग करने को कहा तो प्लीज जांच में सहयोग करिए... अभी तो आप असहयोग पर आमादा है. सुबह लगभग 11 बजकर 40 मिनट पर पहुंचे गुप्ता ने लगभग डेढ़ बजे अपना बयान दर्ज करवाया और थोड़ी ही देर बाद अफसरों से कहा कि शुगर बढ़ गई सो पूरा बयान आज ही दर्ज कर लो. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पुलिस महानिरीक्षक जीपी सिंह ने उनसे कहा कि आपको शायद अभी और आना होगा. गुप्ता इस बात के लिए तैयार नहीं हुए. दफ्तर के बाहर निकलकर उन्होंने मीडिया से कहा कि वे एक बार फिर शाम चार बजे बयान देने के लिए आएंगे. इस बीच मीडिया को यह भनक लग चुकी थी कि अब दोबारा बयान दर्ज नहीं होगा, लेकिन गुप्ता दोबारा पहुंचे. खबर है कि दोबारा आमद देने के दौरान उन्होंने यह कहते हुए रोष जताया कि उनका बयान क्यों नहीं लिया जा रहा है. उनके पास सैकड़ों काम है. कोर्ट जाना है. किसी को नहीं छोड़ूंगा. कोई नहीं बचेगा. ईओडब्लू के एक वरिष्ठ अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पूरे समय आरोपी मुकेश गुप्ता असहयोग करते रहे. एक तरह से वे कोर्ट की अवमानना भी कर रहे थे.

 

 

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रेखा नायर को पुलिस वाले सलाम बजाते थे... तो पड़ोसी मानते थे आईपीएस अफसर

रायपुर. देश के सबसे विवादास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता की करीबी रेखा नायर के बारे में ईओडब्लू को कई सनसनीखेज जानकारी मिली है. सोमवार को जब ईओडब्लू के 18 सदस्यों ने रेखा नायर के कचना खम्हारडीह के मारुति सॉलिटियर में दस्तक दी तो वे मकान की भव्यता और अंदरुनी चकाचौंध देखकर हतप्रभ रह गए. सदस्यों को आलीशान मकान के सभी छह कमरों में सबसे मंहगे डायकैन कंपनी का एसी लगा हुआ मिला. इसके अलावा घर के अंदर और बाहर मंहगे एलईडी चमचमा रहे थे. हॉल के अंदर की टेबल-कुर्सियों को देखकर यह लग ही नहीं रहा था कि उसका निर्माण किसी भारतीय कंपनी के द्वारा किया गया है. शयनकक्ष और हॉल के पर्दें  बेशकीमती तो थे ही, पोर्च में एक पीतल का मजबूत दरवाजा भी मिला. इसकी कीमत पांच लाख के आसपास आंकी गई है. आसपास के लोगों से मालूम हुआ कि रेखा नायर के मकान के सामने हमेशा दो-चार गाड़ियां खड़ी रहती थीं. वह कभी-कभार ही नजर आती थी, लेकिन पुलिस वाले जैसे ही उसे देखते... वैसे ही सैल्यूट बजाते थे. ऐसा लगता था जैसे वह कोई आईपीएस अफसर है. सूत्र बताते हैं कि ईओडब्लू को तलाशी के दौरान कुछ रजिस्टर और रहस्यमय फोटोग्राफ भी हाथ लगे हैं.

लगाना पड़ा एड़ी-चोटी का जोर

रेखा नायर के बारे में बारीक सी बारीक जानकारी हासिल करने के लिए पुलिस को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा है. बताते हैं कि उसकी नियुक्ति वर्ष 97-98 में एक आरक्षक के पद पर तब हुई थी जब मुकेश गुप्ता दुर्ग में पुलिस अधीक्षक थे. कुछ सालों तक तो वह बकायदा नजर भी आई, लेकिन फिर परिदृश्य से गायब हो गई. सूत्र बताते हैं कि दुर्ग के बाद जहां-जहां भी मुकेश गुप्ता पदस्थ रहे वहां-वहां उसकी तैनाती होती रही, लेकिन गुप्ता के नजदीकी भी तब यह नहीं जान पाए कि उसका कैसा और किस तरह का इस्तेमाल हो रहा है और वह कहां नौकरी करती है. नई सरकार के गठन के बाद जब फोन टैंपिंग मामला उजागर हुआ तब पड़ताल में पता चला कि एक अत्यंत गरीब परिवार से तालुकात रखने वाली रेखा नायर करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हो गई है.

जामुल में रहती है रेखा की बहन

बताते हैं कि रेखा पहले अपनी बहन और पिता रेमाकांतन नायर के साथ जामुल के ईएसडब्लू मकान में रहा करती थीं. सामान्य तौर पर ईएसडब्लू मकान में वहीं लोग रहते हैं जिनकी आवक बेहद सामान्य होती है. बताते हैं कि रेखा नायर के तीन बच्चे भी हैं जो अब डीपीएस में पढ़ते हैं. पुलिस को यह सूचना मिली थी कि रेखा नायर बच्चों की टीसी ( ट्रांसफर सार्टिफिकेट ) लेकर नागपुर में कहीं सैटल होने की तैयारी कर रही है सो डीपीएस स्कूल के आसपास सादी वर्दी में मुखबिरों को तैनात किया गया था जो पल-प्रतिपल की सूचना एकत्र कर रहे थे.

कई जगह अकूत संपत्ति

सूत्रों का कहना है कि रेखा नायर ने अपने और परिजनों के नाम से कई जगह मकान और जमीनों की खरीदी की है. खम्हारडीह स्थित मारुति सॉलिटियर की कीमत ही दो करोड़ के आसपास है. रेखा ने दिखावे के लिए लोन पर एक कार की खरीदी थी जिसका लोन अदा कर दिया गया है. रेखा की मां गौरी कुट्टी अम्मा के नाम पर भी कांशीराम नगर में एक मकान का होना बताया जा रहा है. इसकी कीमत भी डेढ़ करोड़ है. रेखा ने अपने पिता रेमाकांतन नायर के नाम पर त्रिवेंद्रम में भी एक फ्लैट ले रखा है. इसके अलावा केरल राज्य के कोल्लम जिले के पवित्रेश्वरम ग्राम में भी रेखा के नाम पर एक आलीशान मकान पाया गया है. बताया जाता है कि इसी गांव में  हाल के दिनों में कई एकड़ कृषि भूमि भी खरीदी गई है. बताते है कि रेखा के पिता ने ग्राम नरहदा और पिरदा के अलावा अविनाश कैपिटल होम्स में लगभग तीन हजार वर्ग फीट जमीन खरीद रखी है. सूत्र बताते हैं कि ईओडब्लू आने वाले दिनों में घोषित-अघोषित और बेनामी संपत्तियों की खरीदी-बिक्री में शामिल लोगों से भी पूछताछ करेगी. ईओडब्लू की जांच के केंद्र में फिलहाल यह बिंदु शामिल है कि एक मामूली सी आरक्षक एकायक करोड़ों की मालकिन कैसे बन गई. उसे करोड़पति बनाने के लिए किन लोगों ने अवैधानिक ढंग से धन मुहैया करवाया. कमजोर आर्थिक स्थिति होने के बावजूद उसके परिजनों ने अकूत संपत्ति कैसे जुटाई. रेखा नायर ने फोन टैंपिंग के लिए कौन-कौन सी मशीनों और तरीकों का इस्तेमाल किया. वह सरकारी नौकरी में रहने के दौरान भी चार सालों तक कहां गायब थी.

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आखिर क्यों थर-थर कांप रही है पुलिस ... मुकेश गुप्ता से पूछताछ के पहले ईओडब्लू चीफ ने ली छुट्टी

रायपुर. देश के सबसे विवास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता से पूछताछ के पहले ही ईओडब्लू चीफ वीके सिंह छुट्टी पर चले गए हैं. हालांकि उनकी छुट्टी का कारण परिवार में भतीजे का विवाह होना बताया जा रहा है, लेकिन उनके अचानक छुट्टी पर चले जाने से प्रशासनिक महकमे में कई तरह की चर्चा चल रही है. कहा जा रहा है कि मुकेश गुप्ता के खौफनाक रिकार्ड के चलते कोई भी अफसर उनसे सीधे पंगा लेने को तैयार नहीं है. ज्ञात हो नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले में जांच के दौरान आपराधिक षड़यंत्र रचने और फोन टैपिंग के आरोप में निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता को पहले 23 अप्रैल को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के दफ्तर में सुबह 11 बजे अपना बयान दर्ज करने पहुंचना था, लेकिन वरिष्ठ अफसर वीके सिंह के छुट्टी पर चले जाने से अब गुप्ता को 25 अप्रैल को मौजूद रहने को कहा गया है.

जीपी सिंह ने की तगड़ी घेराबंदी

वीके सिंह के छुट्टी पर चले जाने से अब सारी कमान पुलिस महानिरीक्षक जीपी सिंह के हाथों में रहेगी. अब वे ही यह तय करेंगे कि मुकेश गुप्ता से कोई सब इंस्पेक्टर पूछताछ करेगा या फिर पुलिस अधीक्षक. वैसे 25 अप्रैल को होने वाली पूछताछ के मद्देनजर जीपी सिंह ने चुनाव के दिन यानी 23 अप्रैल को सभी अफसरों की बैठक ली है. माना जा रहा है कि तमाम तरह की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद गुप्ता को तगड़े ढंग से घेरने की तैयारी की गई है. दरअसल सरकार ने कुछ समय ईओडब्लू से मुकेश गुप्ता की पसन्द के पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण अन्यत्र कर दिया था, लेकिन ऐन-केन-प्रकारेण अब भी कई पुलिसकर्मी रिलीव नहीं हुए हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इधर पुलिस के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि गुप्ता को पहले भी दो बार नोटिस देकर बयान दर्ज करने को कहा गया था, लेकिन तब वे उपस्थित नहीं हुए थे. इधर उनकी अत्यंत करीबी रेखा नायर ने ईओडब्लू पहुंचकर आमद दे दी हैं इसलिए माना जा रहा है कि गुप्ता भी 25 अप्रैल को बयान देने पहुंचेंगे.

दर्ज होगा मनी लांड्रिग का मामला

भले ही मुकेश गुप्ता को हाईकोर्ट से थोड़ी राहत मिल गई है, लेकिन उनके खिलाफ इतनी ज्यादा शिकायतें है कि उनका बचना मुश्किल ही लगता है. सोमवार को गृह विभाग के सचिव डीपी कौशल ने एक और अन्य मामलों में उनके खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. उन पर आरोप है कि वर्ष 2003 से वर्ष 2018 तक लोक सेवक रहने के दौरान उन्होंने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर अवैध उगाही की और कई ट्रस्टियों के साथ मिलकर अकूत संपत्ति और धन अर्जित कर उसका इस्तेमाल विधानसभा रोड़ पर स्थित एमजीएम नामक अस्पताल में किया. सूत्र बताते हैं कि अभी उनसे जुड़े तीन-चार और मामलों की पड़ताल चल रही है. एक मामला तो उनकी घोषित-अघोषित प्रापर्टी से ही जुड़ा हुआ है. सूत्रों का कहना है कि पद में रहने के दौरान कोल्लम केरल, मुरमुदा, कानपुर, इंदौर, परसदा, धरमपुरा, आजमगढ़ सहित अन्य कई जगहों पर बेहिसाब संपत्ति बनाई है. कुछ संपत्ति के मालिक वे स्वयं हैं जबकि अधिकांश दूसरों के नाम पर है.

 

 

 

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इधर चलता रहेगा चुनाव... उधर आज दर्ज होगा मुकेश गुप्ता का बयान

रायपुर. देश के सबसे विवास्पद पुलिस अफसरों में से एक मुकेश गुप्ता मंगलवार 23 अप्रैल 2019 को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के दफ्तर में सुबह 11 बजे अपना बयान दर्ज करने पहुंच सकते हैं. पुलिस के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि गुप्ता को पहले भी दो बार नोटिस देकर बयान दर्ज करने को कहा गया था, लेकिन तब वे उपस्थित नहीं हुए. इधर उनकी अत्यंत करीबी रेखा नायर ने ईओडब्लू पहुंचकर आमद दे दी हैं इसलिए माना जा रहा है कि गुप्ता भी बयान देने पहुंचेंगे. हालांकि जिस रोज गुप्ता को बयान देने के लिए आमंत्रित किया गया है उस रोज प्रदेश की सात संसदीय सीटों पर चुनाव है. जाहिर सी बात है प्रदेश की मीडिया व अन्य लोगों का ध्यान चुनाव पर केद्रिंत रहेगा. फिर भी इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि मीडिया गुप्ता को दी जाने वाली वीआईपी ट्रीटमेंट पर अपनी पैनी नजर रखेगा. वैसे इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि सोमवार को जब रेखा नायर जब ईओडब्लू के दफ्तर में बयान देने उपस्थित हुई तो उन्हें भरपूर वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया.

एक नए मामले में जांच के आदेश

भले ही मुकेश गुप्ता को हाईकोर्ट से थोड़ी राहत मिल गई है, लेकिन उनके खिलाफ इतनी ज्यादा शिकायतें है कि उनका बचना मुश्किल ही लगता है. सोमवार को गृह विभाग के सचिव डीपी कौशल ने एक और अन्य मामलों में उनके खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. उन पर आरोप है कि वर्ष 2003 से वर्ष 2018 तक लोक सेवक रहने के दौरान उन्होंने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर अवैध उगाही की और कई ट्रस्टियों के साथ मिलकर अकूत संपत्ति और धन अर्जित कर उसका इस्तेमाल विधानसभा रोड़ पर स्थित एमजीएम नामक अस्पताल में किया. सूत्र बताते हैं कि अभी उनसे जुड़े तीन-चार और मामलों की पड़ताल चल रही है. सभी मामलों में धीरे-धीरे प्रकरण पंजीबद्ध होगा. एक मामला तो उनकी घोषित-अघोषित प्रापर्टी से ही जुड़ा हुआ है. सूत्रों का कहना है कि पद में रहने के दौरान कोल्लम केरल, मुरमुदा, कानपुर, इंदौर, परसदा, धरमपुरा, आजमगढ़ सहित अन्य कई जगहों पर बेहिसाब संपत्ति बनाई है. कुछ संपत्ति के मालिक वे स्वयं हैं जबकि अधिकांश दूसरों के नाम पर है. सूत्रों का कहना है कि कुल 26 जगहों पर अरबों की संपत्ति की मयदस्तावेज जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी मुहैया करवाई गई है.

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सामने आया रमन के दामाद का एक और कारनामा

रायपुर. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता का एक और सनसनीखेज कारनामा प्रकाश में आया है. अभी हाल के दिनों में कांग्रेस प्रवेश करने वाले नितिन भंसाली ने उन पर नियम-कानून से परे जाकर धमतरी की नाहर मेडिकल एजेंसी को 13 करोड़ सात लाख का लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है. भंसाली का आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री के दामाद स्वास्थ्य विभाग के हर विंग पर दखलदांजी करते थे. उनका दबाव डायरेक्टर हेल्थ पर था तो छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन पर भी. भंसाली ने बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, मुख्य सचिव सुनील कुजूर और स्वास्थ्य सचिव को लगभग 104 पेज की शिकायत ( दस्तावेज ) के साथ सौंपी है. शिकायत की एक प्रति अपना मोर्चा डॉट कॉम को भी मुहैय्या करवाई है.

यह है पूरा मामला

दिनांक 23 फरवरी 2016 को डायरेक्टर हेल्थ ऑफ सर्विसेस ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड को 441 दवाईयों की खरीदी के लिए एक पत्र लिखा था. इस पत्र के आधार पर 11 अगस्त 2016 आनलाइन टेंडर जारी किया गया, लेकिन थोड़े ही दिनों यह कहा जाने लगा कि टेंडर निकालने में देरी हो गई है इसलिए 23 जरूरी दवाईयां ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसवीएस ऑफ इंडिया ) बीपीपीआई के माध्यम से अनुमोदित की दरों पर खरीद ली जाए. इसके बाद डायरेक्टर हेल्थ ने बगैर टेंडर के दवाईयां खरीदने की अनुमति मांगी.

मल्टीविटामिन सीरप का चक्कर

डायरेक्टर हेल्थ लगभग पचास लाख अठावन हजार पांच सौ चालीस मल्टीविटामिन बोतल ( प्रत्येक बोतल 100 एमएल ) की खरीदी करना चाहता था, लेकिन छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन ने जानकारी दी कि दवा सप्लायरों के पास 200 एमएल की बोतल ही उपलब्ध है जिसकी कीमत 27 रुपए 64 पैसे हैं. इस बारे में डायरेक्टर हेल्थ और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड के बीच पत्र व्यवहार चलता रहा. डायरेक्टर हेल्थ ने दिनांक 27 मार्च 2017 को एक पत्र के जरिए अवगत कराया कि उसे अब सीरप की जरुरत नहीं होगी. सीरप के बजाय मल्ली विटामिन टेबलेट ( ड्रग कोड डी-63 ) खरीद लिया जाय.... और तब..........

अब आया दामाद का दबाव

बताते हैं कि डायरेक्टर हेल्थ और मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन के बीच चले पत्र व्यवहार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के दामाद पुनीत गुप्ता ने दबाव डालना प्रारंभ किया. उनके दबाव के बाद अचानक 100 एमएल वाली मल्टीविटामिन वाली सीरप की बोतल भी मिल गई. डायरेक्टर हेल्थ महज पचास लाख अठावन हजार पांच सौ चालीस बोतल चाहता था, लेकिन मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन ने 73 लाख 94 हजार पांच सौ बोतल खरीद ली. इस पूरे मामले का सबसे संदिग्ध पक्ष यह है कि जब डायरेक्टर हेल्थ सीरप चाहता था तो सीरप की बोतल नहीं मिल रही थी और जब डायरेक्टर हेल्थ ने कहा कि चलिए बोतल नहीं मिल रही है तो टेबलेट खरीद लीजिए तब अचानक बोतल मिल गई. डायरेक्टर हेल्थ जितनी संख्या में बोतल चाहता था उससे कहीं ज्यादा संख्या में सीरप की खरीदी हो गई. बताते हैं कि सप्लाई का सारा काम धमतरी की नाहर नाम की एक मेडिकल एजेंसी को दिया गया था. इस एजेंसी को भी 90 दिनों के भीतर सप्लाई करनी थी, लेकिन इस सप्लायर ने 75 दिन देरी से सीरप की सप्लाई की. भंसाली का कहना है कि बाजार से अधिक दर पर मल्टीविटामिन सीरप की खरीदी कर शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है जबकि नाहर नाम की मेडिकल एजेंसी 13 करोड़ सात रुपए अतिरिक्त भुगतान हासिल करने में सफल रही है. भंसाली ने मुख्यमंत्री से पूरे में मामले से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उनका कहना है कि इस प्रकरण में कई रसूखदार लोग संलिप्त है. जांच में सारे चेहरे बेनकाब हो जाएंगे. इस मामले में पुनीत गुप्ता से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन आउट ऑफ रेंज बताता रहा.

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झोला उठाकर चल दूंगा कहने वाले फकीर की चालाकियों से साहू समाज ने किया किनारा

रायपुर. छत्तीसगढ़ में भाजपा के बड़े नेताओं को लगता है कि परम्परागत रुप से साहू समाज भाजपा के साथ हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में करारी पराजय के बाद यह साफ हो गया है कि राजनीतिक तौर पर जागृत यह समाज देश और प्रदेश के हित को महत्वपूर्ण मानता है. एक राजनीतिक विश्वलेषक का कहना है कि साहू समाज हमेशा से विसंगतियों और गलत नीतियों के खिलाफ ही वोट करता आया है, लेकिन इसे भाजपा कभी समझ नहीं सकीं. बहरहाल यहां इस समाज का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि हर रोज अलग तरह की वेशभूषा और नाना प्रकार के बयानों के चलते अपनी विश्वसनीयता को दांव पर लगाने वाले पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ की फिजा में भी जाति का जहर घोलने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि गुजरात में जो मोदी होता है वह साहू समाज से आता है तो क्या सारे मोदी चोर हो गए. उनका कहना था कांग्रेस उन्हें व्यक्तिगत तौर पर चोर कहती है, लेकिन पूरे समाज को चोर कहना ठीक नहीं है.

जाहिर सी बात है कि मोदी के इस बयान के बाद तीखी प्रतिक्रिया होनी थी. प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टिव्हटर एवं फेसबुक में लिखा- मोदी कभी गुजरात में चाय वाला बन जाते हैं. बनारस में गंगा के बेटे. छत्तीसगढ़ में आते हैं तो साहू और अंबानी के यहां जाते हैं तो चौकीदार. छत्तीसगढ़ के लोगों को ऐसे बहुरुपिए से सावधान रहना चाहिए. बघेल ने यह भी कहा कि मोदी इस देश को धर्म-जाति और संप्रदाय के नाम पर बांटना चाहते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता उनके हर घृणित प्रयास का मुंहतोड़ जवाब देगी. प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने भी मोदी के बयान को जातिवादी नफरत फैलाने की निकृष्टतम कोशिश करार दिया. उन्होंने कहा कि चोर की कोई जाति नहीं होती... चोर सिर्फ चोर होता है. उसका काम सिर्फ दूसरों की संपत्ति हथियाना है. उन्होंने कहा कि मोदी और उनकी पूरी पार्टी चुनाव हार रही है इसलिए सामाजिक समरसता को छिन्न-भिन्न करने की कवायद में लगी है, लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता उनकी हर चालाकियों का माकूल जवाब अपने वोट के जरिए देगी.

 

साहू समाज ने किया किनारा

इधर मोदी के बयान से साहू समाज ने किनारा कर लिया है. कर्मचारी नेता एचपी साहू का कहना है कि मोदी ने पूरे समाज को चोर साबित करने की घृणित कोशिश की है. अव्वल तो मोदी अपने आपको साहू बताने की असफल कोशिश ही न करें क्योंकि साहू समाज मोदी को अपना अंग मानता ही नहीं है. उन्होंने कहा कि साहू समाज बेहद मेहनतकश और ईमानदार होता है. इस समाज में पढ़े-लिखे लोग भी बहुत हैं. मोदी इस समाज को बदनाम न करें तो बेहतर हैं. छत्तीसगढ़ साहू समाज के प्रदेश कोषाध्यक्ष हनुमत प्रसाद साहू ने कहा कि साहू समाज मोदी के चौकीदार अभियान का हिस्सा नहीं है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति चोर बन जाता है तो उससे पूरा समाज चोर नहीं हो जाता. प्रदेश साहू संघ के अध्यक्ष विपिन साहू का कहना है कि जब वे एक आयोजन के सिलसिले में मोदी से मिलने गए थे तब उन्होंने कहा था कि वे साहू-वाहू को नहीं जानते. राजनीतिक लाभ लेने के लिए मोदी खुद को पिछड़ा वर्ग का बता रहे हैं.

 

 

 

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