सियासत

चंदूलाल चंद्राकर पत्रकारिता विश्वविद्यालय की घोषणा...जनभावना का सम्मान

परदेशीराम वर्मा

छत्तीसगढ़ की नई सरकार ने जनभावना के अनुरूप निर्णय लिया है.राजिम में राजिम मेला प्रारंभ कर इस तीर्थ को पुनः छत्तीसगढ़ी परंपरा से जोड़ दिया गया. गांव गंध से जुड़े आयोजन की सफलता और जन स्वीकृति से यह स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ के लोग अपने प्रदेश की पहचान के लिए  भीतर ही भीतर छटपटा रहे थे. भूपेश बघेल और उनके साथियों ने इस छटपटाहट को दशकों पहले जान- समझ लिया था. वे प्रतिपक्ष मे थे तब भी छत्तीसगढ़ी परंपराओं की स्थापना के लिए संघर्ष की राजनीति करते थे. तभी छत्तीसगढ़ के आमजन को लग गया था कि जब छत्तीसगढ़ की असल पहचान के लिए संकल्पित राजनीतिक दल को सत्ता मे आने का अवसर मिलेगा तब छत्तीसगढ़ की आत्मा की पहचान की दिशा मे ठोस निर्णय होंगे.

पत्रकारिता विश्वविद्यालयका नाम चंदूलाल च॔द्राकर के सिवाय किस विभूति के नाम पर रखा जा सकता है यह सोचकर ही लोग थक जाते हैं दूसरा कोई ही नहीं सूझता. इसका कारण है यह है कि चंदूलाल जी ऐसे पहले छत्तीसगढ़ी सपूत हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ के एक गांव से निकलकर देश में एक श्रेष्ठ पत्रकार के रूप में पहचान बनाई. वे 148 देशों मे घूमे. छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के ऐतिहासिक और निर्णायक दौर में उन्होंने नेतृत्व किया. इसकी उन्होंने कीमत भी चुकाई. वे प्रवक्ता के पद पर थे. उनसे यह पद छीन लिया गया.

वे दिल्ली और दुनिया में साक्षात जीवंत छत्तीसगढ़ी माने जाते थे. एक अच्छे छत्तीसगढ़ी की तरह सहिष्णु- परोपकारी और अहिंसक थे. उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्यआंदोलन को जो ऊंचाई मिली उसी का सुखद परिणाम रहा कि हमें बेहद शांतिपूर्ण तौर-तरीकों से अपना छत्तीसगढ़ राज्य मिल गया. मैं मानता हूं कि पत्रकारिता विश्वविद्यालय का गौरव उनके नाम के जुड़ने से ही बढ़ गया है. यहां किसी को कमतर आंकने का भाव नही है. सोचना यह चाहिए कि निर्णय के पीछे भाव क्या है ? छत्तीसगढ़  में भूपेश बघेल की सरकार छत्तीसगढ़ के गौरव को बढ़ाने और बचाने का संकल्प लेकर ही सत्ता मे आई है. वह तमाम साहसिक निर्णय यूं ही नही ले रही है. ये निर्णय आकांक्षा और प्रतिबद्धता को समझने की उसकी क्षमता का परिचायक है. छत्तीसगढ़ राज्य की अपनी विशिष्ट पहचान बने यह प्रयत्न करना और सत्ता में आकर लंबे समय तक बने रहने की अनिवार्य शर्त का ह पहला पाठ भी है. उस पाठ को लगातार पढ़ और समझकर जिन लोगों ने सही राजनीति की हैं वे सत्ता में आ गए हैं. ऐसे निर्णय से वे बंधे और वचनबद्ध हैं.

आम आदमी ईमान और संकल्प के साफ और बड़े अक्षरों मे लिखे हुए घोषणा पत्र पढ़ पाता है. वह दांव- पेंच नही समझना चाहता. छत्तीसगढ़ियों ने भी सब कुछ जान-परख कर इस सरकार को मौका दिया है. भूल सुधार करते चलना इस सरकार का कर्तव्य है. अगर कोई पुरानी भूल हुई है तो उसे सुधार लेना अच्छी बात है.

चंदूलालजी के साथ वासुदेव च॔द्राकर को नमन कर सरकार ने अपना मान बढ़ाया है. छत्तीसगढ़ मे आज राजनीति क्षेत्र के जगमग कांग्रेसी सितारों को आसमान में स्थापित करने मे सफल रहे दाऊ वासदेव च॔द्राकर से जुड़कर कामधेनु विश्वविद्यालय का यश बढ़ गया है. वासुदेव चंद्राकर ही थे जिन्होंने छत्तीसगढ़ की जमीनी हकीकत को समझकर राजनीति करने का गुरूमंत्र अपने शिष्यों को दिया था. वे संकल्प लेकर और ताल ठोंककर राजनीतिक घोषणा करते थे. वासुदेव चंद्राकर संस्कृति प्रेमी धर्मनिष्ठ दूरदृष्टि सम्पन्न राजनेता थे. छतीसगढ़ के ऐसे दिग्गज गुरू के अप्रतिम प्रतिभाशाली शिष्यसिद्ध हुए भूपेश बघेल. वर्तमान मंत्रिमंडल के अमूमन सभी सदस्यों को दाऊ जी से मार्गदर्शन और स्नेह मिलता रहा है. पुरखों के   सपनों का छत्तीसगढ़ बनाना जिनकी वचनवद्धता का हिस्सा है वे आगे बढ़ रहे हैं. कुछ नारे यूं ही नही बनते.

अभी तो यह अंगड़ाई है

आगे और

लड़ाई है.

 

 

 

 

 

 

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भाजपा ने किया कुशाभाऊ ठाकरे का अपमान

भिलाई. भिलाई की प्रथम महापौर सुश्री नीता लोधी ने चंदूलाल चन्द्राकर पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय नामकरण का स्वागत करते हुए इसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा छत्तीसगढिय़ा अस्मिता का सम्मान बताया है. उन्होंने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे भारतीय जनता पार्टी अथवा राष्ट्रीय स्वयं संघ के लिए उल्लेखनीय व्यक्तित्व हो सकते हैं, लेकिन उनका नाम पत्रकारिता विश्वविद्यालय से जोड़ कर भारतीय जनता पार्टी ने ही उनका अपमान किया है। क्या भाजपा-संघ के विचारक बता सकते हैं कि स्व. ठाकरे का पत्रकारिता में क्या योगदान था?

उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार के इस कदम का विरोध करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि नाम बदलने की परिपाटी भारतीय जनता पार्टी की रही है, जिसने छत्तीसगढ़ में 2003 में अपनी सरकार बनाते ही खुर्सीपार भिलाई के राजीव गांधी स्टेडियम का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय खेल परिसर कर दिया था. जबकि वहां भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की प्रतिमा पहले ही स्थापित की जा चुकी थी और इसका लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री के हाथों किया जा चुका था. आज भी लोग यह नहीं भूले हैं, जब विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी तब भी बुद्धिजीवी वर्ग ने इस नामकरण पर आपत्ति जताई थी. सुश्री नीता लोधी ने कहा कि नाम बदलने की परिपाटी भाजपा की रही है जिसमें न सिर्फ खुर्सीपार खेल परिसर का नाम बदला गया था बल्कि इंदिरा शहरी धरोहर योजना,राजीव आश्रय योजना और इंदिरा हरेली सहेली योजना तक का नाम बदल दिया गया था. क्या मध्यप्रदेश या देश के दूसरे हिस्से में बैठे भाजपा-संघ के विचारक तब इससे अंजान थे? आज पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर धमकी भरे अंदाज में कह रहे हैं कि भाजपा सरकार आएगी तो गांधी-नेहरू जैसी विभूतियों के नाम हटा देगी, तो यह उनका वैचारिक सतहीपन दर्शाता है. छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार ने पिछले 15 साल में विभूतियों के नाम में परिवर्तन करने का काम खूब किया है. 

सुश्री नीता लोधी ने कहा कि पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नामकरण अगर दिग्गज पत्रकार स्व. चंदूलाल चंद्राकर के नाम पर किया गया है तो यह बिल्कुल सही कदम है. पिछली सरकार की गलती को सुधार कर छत्तीसगढ़ की अस्मिता की रक्षा कर माटी को सम्मानित कर एक अच्छी सरकार होने का दायित्व निभाया है. चंदूलाल चंद्राकर छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़े व्यक्तित्व थे और कांग्रेस के घोषणापत्र में छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना का संकल्प शामिल करवाने वाले स्व. चंद्राकर ही थे.अगर स्व. चंद्राकर छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण सर्वदलीय मंच का गठन कर आंदोलन नहीं छेड़ते तो शायद ही कभी छत्तीसगढ़ का निर्माण हो पाता.

जहां तक स्व. चंदूलाल चंद्राकर के पत्रकारिता में योगदान का प्रश्न है तो यह किसी से छिपा नहीं है कि छत्तीसगढ़ की माटी से निकले वे आज तक भी एकमात्र पत्रकार हैं, जिन्होंने ओलंपिक खेलों से लेकर युद्ध तक की रिपोर्टिंग 100 से ज्यादा देशों में की है. महात्मा गांधी की अंतिम प्रार्थना सभा में भी वे मौजूद थे और बापू की हत्या की कायराना वारदात की उन्होंने रिपोर्टिंग की थी. हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र में संपादक होने वाले भी वह छत्तीसगढ़ की इकलौती विभूति हैं. अगर ऐसे माटीपुत्र को सम्मान दिया जा रहा है तो इसका स्वागत होना चाहिए.

नीता लोधी ने अन्जोरा के कामधेनु विश्वविद्यालय का नाम प्रख्यात किसान नेता एवं सहकारिता नेता स्व. वासुदेव चंद्राकर के नाम पर रखे जाने का भी स्वागत किया श्री चंद्राकर किसानों की समस्या को लेकर आवाज उठाते रहे है. सत्ता पक्ष मे रहते हुए भी उन्होने समय समय पर आंदोलन किए और वर्ष 2002 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरूआत किए जाने पर उनके योगदान को भुलाया नही जा सकता.

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एक्शन लेने वाले सीएम के साथ अमेठी में सुशील ओझा भी

रायपुर. कांग्रेस आलाकमान ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर जबरदस्त भरोसा जताया है. आने वाले दिनों में भूपेश उत्तर प्रदेश की कई सभाओं में हिस्सेदारी दर्ज करेंगे. फिलहाल बघेल ने कल गुरुवार से ही अमेठी में डेरा डाल दिया है. उनके साथ गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुशील ओझा भी गए हुए हैं. बघेल 26 अप्रैल को अमेठी के बरसण्डा बाजार में एक सभा को संबोधित करेंगे. उसके बाद वे तिरहुत बल्दिराय सुल्तानपुर जाएंगे. इसी दिन वे रायबरेली के गांव सांगो और सरांवा में भी आम सभा को संबोधित करेंगे. गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में बंपर जीत के बाद बघेल की लोकप्रियता में जमकर इजाफा हुआ है. फिलहाल जिन तीन राज्यों में कांग्रेस को जीत मिली है वहां सबसे अच्छी पोजीशन छत्तीसगढ़ की मानी जा रही है. भूपेश की पहचान एक्शन लेने वाले मुख्यमंत्री के तौर बन गई है. उनके एक के बाद लिए गए एक्शन को लेकर देशव्यापी चर्चा भी चल रही है.

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भूपेश, रमन और जोगी 7 फरवरी को एक मंच पर

रायपुर. राजनीति के तीन धुर विरोधी सात फरवरी को एक मंच पर नजर आने वाले हैं. ऐसे समय जब भाजपा सत्ता से बाहर है और कांग्रेस की सरकार है तब आईएनएच चैनल ने टाटा स्काई पर के लांचिग अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बतौर मुख्य अतिथि, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को मुख्य वक्ता और पन्द्रह सालों तक प्रदेश में काबिज रहने वाले रमन सिंह को कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया है. जाहिर सी बात है कि जब तीनों नेताओं से अनुमति मिल गई होगी तभी कार्ड में नाम भी छापा गया है. मीडिया से जुड़े लोग और राजनीति के पंड़ित इस कार्यक्रम का अलग-अलग अर्थ ढूंढ रहे हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि तीन महारथियों का एक साथ मंच पर मौजूद रहना कार्यक्रम को दिलचस्प बना सकता है.

वैसे राजनीति के धुंरधरों को एक मंच पर लाना आसान नहीं होता, लेकिन यह कमाल कर दिखाया है हरिभूमि के प्रधान संपादक हिमांशु द्विवेदी ने.यहां यह बताना भी जरूरी है कि श्री द्विवेदी पिछले कुछ समय से अपने नाम के आगे डाक्टर लिखते हैं, लेकिन वे वैसे वाले डाक्टर नहीं है जैसे रमन सिंह है. वे नाड़ी देखकर पर्ची में छोटी-छोटी सफेद गोली लिखने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सक नहीं है, उन्हें जनता और विशेषकर राजनीति की नब्ज को तपासने में मास्टरी हासिल है. फिलहाल उनके मुकाबले में कोई दूसरा खड़ा हो भी नहीं पाया. ( हालांकि कोशिश कई मूर्धन्यों ने की मगर वे थक-हारकर बैठ गए )  उनका हर काम ( कार्यक्रम ) चर्चा के केंद्र में रहता है. प्रदेश के तमाम स्वनामधन्य अखबार के मालिक और उनके वरिष्ठ संवाददाता नई सरकार के बनते ही जब यह सोच रहे थे कि अब- तब में  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का इंटरव्यूह कर लेंगे तब हिमांशु द्विवेदी आईएनएच पर बघेल का इंटरव्यूह कर रहे थे. उधर आईएनएच में इंटरव्यूह प्रसारित हो रहा था और इधर राजधानी के कई इलाकों में मौजूद अखबार और चैनलों के दफ्तरों के आसपास की झाड़ियों में भीषण आग लगी हुई थी. राजनीति, प्रशासन और मीड़िया के बहुत से मूर्धन्यअब भी यह जानने के लिए माथा-पच्ची कर रहे  हैं कि आखिरकार यह कमाल हुआ तो हुआ कैसे. बहरहाल अंतागढ़ टेपकांड, झीरम घाटी सहित अन्य कई मामलों में जांच प्रारंभ होने और बदलापुर-बदलापुर जैसी चीख-पुकार के बीच सात फरवरी को नेताओं के चेहरों के हाव-भाव को देखना-पढ़ना और उन्हें सुनना एक अलग तरह का अनुभव हो सकता है. 

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जोकर है कुरुद का लबरा अजय चंद्राकर

रायपुर. छत्तीसगढ़ की विधानसभा में सोमवार को अजीब नजारा देखने को मिला. सदन के भीतर विपक्ष के मुट्ठी भर सदस्य इस बात को लेकर हंगामा मचा रहे थे कि धारा 144 लागू होने के बाद भी विधानसभा गेट के सामने प्रदर्शन हो रहा है, लेकिन विपक्षी यह बताने को तैयार नहीं थे कि प्रदर्शन क्यों और किस बात के लिए हो रहा था और प्रदर्शनकारी कौन थे. जैसा कि आप इस खबर के साथ चित्र को देख सकते थे. चित्र में साफ दिख रहा है कि लोगों के हाथों में तख्तियां है और तख्तियों में लिखा है- जो वादा किया है वह निभाना पड़ेगा. कुरुद का लबरा अजय चंद्राकर जोकर है... आदि-आदि. सामान्य तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ही डाक्टर रमन सिंह को लबरा और मिठलबरा कहते रहे हैं, लेकिन पहली बार तख्तियों में यह तंज पूर्व पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर के लिए भी देखा गया.

इसलिए हुआ प्रदर्शन

दरअसल जब कांग्रेस के भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थीं तब पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर ने सोशल मीडिया में यह पोस्ट डाली थी कि अगर कांग्रेस दस दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ कर देगी तो वे विधायक पद से इस्तीफा दे देगें. कांग्रेस ने दस दिनों में यह काम कर दिखाया तो चंद्राकर से इस्तीफा मांगने वालों की संख्या में इजाफा हो गया. चंद्राकर के इस्तीफे के सवाल पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना था- अब यह उनके विवेक पर निर्भर करता है कि वे इस्तीफा देते हैं या  नहीं. इधर चंद्राकर से इस्तीफा मांगने के लिए दबाव बढ़ता ही जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने तय किया है कि अब अजय चंद्राकर जिस किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सेदारी दर्ज करेंगे उनके खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा और इस्तीफा मांगा जाएगा.

क्यों है इतनी बौखलाहट

विपक्ष के सदस्यों ने जब धारा 144 के उल्लंघन को लेकर हंगामा मचाया तो संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि हमने अच्छे ढंग से  देखा है कि पन्द्रह सालों में कितनी बार संसदीय परम्पराओं का पालन किया गया है. विपक्षी सदस्य बार-बार खड़े होकर आपत्ति जताने लगे तो मुख्यमंत्री ने यह कहकर टोका कि बोलने के पहले आसंदी से अनुमति ले लेनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के भीतर बौखलाहट देखने को मिल रही है. सदन के बाहर भी  जब पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह ने पुलिस अफसर कल्लूरी की नियुक्ति को लेकर नसीहत दी तो बघेल ने कहा- पन्द्रह सालों में नौकरशाहों ने जो कुछ किया है वह किसी से छिपा नहीं है. सवाल घुड़सवारी का है. पिछली सरकार नौकरशाहों के भरोसे चलती थी उनकी सरकार नौकरशाहों से कैसे काम लेना है यह अच्छी तरह से जानती है.

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पेट्रोल-डीजल के दामों में जारी है गिरावट का दौर, जानें आज का भाव

नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल के दाम में रविवार को लगातार 11वें दिन गिरावट का सिलसिला जारी रहा. पिछले दिनों अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आई गिरावट के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में उपभोक्ताओं को थोड़ी और राहत मिल सकती है.

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने दिल्ली और कोलकाता में पेट्रोल के भाव में 30 पैसे प्रति लीटर की कटौती की, जबकि मुंबई में पेट्रोल के दाम में 29 पैसे और चेन्नई में 32 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई. दिल्ली और कोलकाता में डीजल के दाम में 33 पैसे, जबकि मुंबई और चेन्नई में 35 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई.

इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में रविवार को पेट्रोल के भाव क्रमश: 72.23 रुपये, 74.25 रुपये, 77.80 रुपये और 74.94 रुपये प्रति लीटर दर्ज किए गए. चारों महानगरों में डीजल की कीमतें क्रमश: 67.02 रुपये, 68.75 रुपये, 70.15 रुपये और 70.77 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गईं. 

एंजेल ब्रोकिंग हाउस के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता (रिसर्च कमोडिटी व करेंसी) की मानें तो पेट्रोल और डीजल के दाम में दो से तीन रुपये की कमी हो सकती है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में तीन अक्टूबर के बाद करीब 27 डॉलर प्रति बैरल की कमी आई है. 

इंडियन ऑयल का कहना है कि पेट्रोल और डीजल का दाम तय करते समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनके पिछले 15 दिन के औसत मूल्य और साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर को गणना में लिया जाता है. 

आगे और मिल सकती है राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है जिसका असर यहां भारत में देखने को मिल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर माह क्रूड ऑयल के लिए पिछले 10 वर्ष का सबसे खराब वर्ष रहा. शुक्रवार को वायदा ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे आ गया. 

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अजित जोगी की तबियत फिर खराब, मुम्बई के अस्पताल में भर्ती

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री व जनता कांग्रेस के संस्थापक मुखिया अजित जोगी की तबियत एक बार फिर खराब हो गई है उन्हें इलाज के लिए बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है की अजित जोगी को साँस लेने में दिक्कत हो रही है सूत्रों ने बताया की उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और वह 5-7 दिसंबर तक रायपुर आ सकते हैं ।

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12वीं पास हैं तो यहां है ट्रेनिंग करने का मौका, सफल होने के बाद 21,700 रुपए की सैलरी दी जाएगी

एजेंसी 

न्यूक्लियर पावर कॉरपेरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने ट्रेनी ऑपरेटर और ट्रेनी मेंटेनर के पदों के लिए आवेदन मंगाए हैं. NPCIL इस नोटिफिकेशन के माध्यम से 122 पदों पर भर्तियां करने वाला है. इच्छुक और योग्य व्यक्ति 14 नवंबर तक ऑफिशियल वेबसाइट npcilcareers.co.in पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं.
- 12वीं पास, साइंस और मैथ्स में 50 प्रतिशत अंक या आईएससी (साइंस सब्जेक्ट).
- एसएससी लेवल की परीक्षा में एक विषय के रूप में इंग्लिश भाषा की पढ़ाई की हो.
 

ट्रेनी मेंटेनर
- एचएससी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ साइंस-मैथ्स. इसके अलावा इलेक्ट्रोनिक, इलेक्ट्रिशियन, मशीनिस्ट, टर्नर, फिटर तथा वेल्डर में 2 साल का आईआईटी सर्टिफिकेट, जिन ट्रेड्स में पाठ्यक्रम की अवधि 2 साल से कम है उनमें कैंडिडेट्स के पास कोर्स खत्म करने के बाद एक साल का एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट होना चाहिए.
- एसएससी लेवल की परीक्षा में इंग्लिश एक सबजेक्ट के रूप में पढ़ा हो.
 

आयु सीमा-
उम्मीदवारों की उम्र 18 साल से 24 साल के बीच होनी चाहिए. आरक्षित वर्गों को आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी. अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाकर ऑफिशियल नोटिफिकेशन देख लें- https://npcilcareers.co.in/RAPSST2018/documents/advt.pdf
 

सैलरी-
सफल उम्मीदवारों को स्टाइपेंड दिया जाएगा. पहले साल 10500 रुपए प्रतिमाह और दूसरे साल 12500 रुपए प्रतिमाह दिया जाएगा. ट्रेनिंग खत्म होने के बाद 21, 700 रुपए की सैलरी दी जाएगी.

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10वीं पास के लिए RBI में निकली वैकेंसी , 30 नवंबर तक करें आवेदन

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने सिक्योरिटी गार्ड के पद पर 270 वैकेंसी निकाली हैं। इन पदों को लिए www.rbi.org.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। वैकेंसी देश के 18 शहरों के लिए निकाली गई हैं। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवंबर, 2018 है। ऑनलाइन फीस पेमेंट 30 नवंबर 2018 तक की जा सकती है। पटना में 13. लखनऊ में 9, कानपुर में 12, जयपुर में 16, नई दिल्ली में 5, चंडीगढ़ में 7, अहमदाबाद में 11, भोपाल में 7, मुंबई में 80 वैकेंसी हैं। कुल 270 में से 30 सीटें एससी, 37 एसटी और 52 सीटें ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित रखी गई हैं। 

योग्यता
आयु सीमा - 18 से 25 वर्ष। ओबीसी वर्ग को तीन वर्ष और एससी, एसटी वर्ग को पांच की छूट दी जाएगी। (आयु की गणना 01/11/2018 से की जाएगी।

शैक्षणिक योग्यता
10वीं पास उम्मीदवार इन भर्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। 
- ग्रेजुएट्स व उससे ऊपर की क्वालिफिकेशन रखने वाले युवा इस भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकते। उम्मीदवार 01/11/2018 तक अंडरग्रेजुएट हो। 
वेतनमान -  10940-380 (4)-12460- 440(3) -13780-520(3)-15340-690 (2)-16720- 860(4) – 20160-1180 (3)- 23700 (20 वर्ष) एवं अन्य भत्ते 

चयन
उम्मीदवार की सबसे पहले ऑनलाइन लिखित परीक्षा होगी। इसके बाद शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों का फिजिकल टेस्ट होगा। फिजिकल टेस्ट केवल क्वालिफाई करना होगा। इसके नंबर फाइनल मेरिट में नहीं जुड़ेंगे। फाइनल मेरिट लिस्ट ऑनलाइन लिखित परीक्षा के आधार पर बनेगी।

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