बड़ी खबर

भाजपा विधायक ने निगम कर्मचारियों को बल्ले से पीटा

इंदौर. मध्यप्रदेश के इंदौर से भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय के पिता कैलाश विजयवर्गीय एक नामदार शख्स है, लेकिन आकाश ने बुधवार को जो कुछ किया उसके बाद चौतरफा उनकी थू-थू हो रही है. आकाश ने निगम कर्मचारियों को बल्ले से पीटा जिसका वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है.

खबर है कि निगम का अमला गंजी कंपाउड में एक जर्जर मकान को तोड़ने के लिए पहुंचा था. इसी दौरान स्थानीय लोगों ने आकाश को बुला लिया.लोगों के बुलाने पर आकाश ने मौके पर पहुंचकर निगम के अधिकारियों को धमकी भी दी. विधायक के आते ही कार्यकर्ताओं ने जेसीबी की चाबी निकाल ली। आकाश ने अधिकारियों से कहा कि 10 मिनट में यहां से निकल जाना, वर्ना जो भी होगा उसके जिम्मेदार आप लोग होंगे। इसी दौरान अधिकारियों से कहासुनी हो गई.तभी आकाश ने अधिकारी को बैट से पीटना शुरू कर दिया. हालांकि, पुलिस और अन्य लोगों ने किसी तरह विधायक को पकड़कर शांत करवाया. विवाद के बाद आकाश ने कहा, ‘मैं बहुत गुस्से में था। मैंने क्या कर दिया मुझे नहीं पता। निगम के अफसर ने एक महिला के साथ गाली-गलौज की और हाथ पकड़ा, जिससे मुझे गुस्सा आ गया.’ विवाद के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने एमजी रोड थाने का घेराव किया.वहीं, दूसरी तरफ मारपीट के विरोध में नगर निगम कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया. देर रात पुलिस ने आकाश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

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मुख्यमंत्री की इस तस्वीर को देखकर हर कोई कह रहा है- भई वाह...जोरदार

रायपुर.छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सादगी से हर कोई वाकिफ है. इस वजह से पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के समय हाई-फाई हो चुके अफसर थोड़ा असहज भी महसूस कर रहे हैं. अभी कुछ दिनों पहले वे ग्रामीण इलाकों में बिकने वाली भंदही ( एक तरह की सैंडल ) पहनकर पत्रकारों के बीच जा बैठे थे. तब उनकी इस सादगी पर वरिष्ठ छायाकार गोकुल सोनी ने अपने फेसबुक पर एक बेहतरीन पोस्ट लिखी थीं. वैसे यह बताना भी लाजिमी होगा कि जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने और रमन महल मतलब मुख्यमंत्री निवास पहुंचे तब अफसरों ने महल को नए ढंग से सजाने के लिए लंबे-चौड़े खर्चों का ब्यौरा दिया था, लेकिन बघेल ने सिर्फ़ रंगाई-पोताई की अनुमति दी. अगर कभी आपको मुख्यमंत्री निवास जाने का अवसर मिले तो देखिएगा जिन दीवारों पर कभी रमनसिंह की आदमकद तस्वीरें लगा करती थीं अब उन दीवारों पर सिर्फ़ कीले हैं.  बाकी यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि जब रमन सिंह मकान खाली कर रहे थे तब उन्होंने कई दिनों का वक्त लिया था. हर रोज कोई न कोई ट्रक पिछले गेट से बाहर निकलता था. आखिरी बार एक छोटा हाथी बाहर निकला था और इस हाथी में लदा सामान भी बाहर लटक रहा था. अब जरा इस चित्र को गौर से देखिए...। एक नाई की दुकान में अपने दाऊजी मूंछ सेट करवा रहे है. ऐसी तस्वीर पहले कभी नहीं देखी गई. यह तस्वीर फिलहाल सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रही है. हर कोई कह रहा है- भई वाह... शानदार.... जबरदस्त.

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सेक्स सीडी कांड में लिप्त न्यूज चैनल का मालिक रच रहा है फंसाने की साजिश- कैलाश मुरारका

रायपुर. छत्तीसगढ़ के एक पूर्व मंत्री के कथित सेक्स सीडी कांड में आरोपों से घिरे वरिष्ठ नेता कैलाश मुरारका का कहना है कि एक चैनल का मालिक उन्हें झूठे आरोपों में फंसाने की साजिश रच रहा है. अपना मोर्चा डॉट कॉम से संक्षिप्त चर्चा में मुरारका ने कहा कि पिछले दो दिनों से मीडिया में उसके खिलाफ खबरें प्लांट की जा रही है. यदि चैनल का मालिक बहुत ज्यादा पाक- साफ है तो उसे अपने चैनल में भी खबरें दिखानी चाहिए थी. मुरारका ने कहा कि जब सेक्स सीडी सामने आई थी तब चैनल के सारे लोग सीबीआई का काम करते हुए नजर आ रहे थे. चैनल से जुड़ा छोटा-बड़ा हर आदमी यह बताने कर रहा था कि उनके चैनल ने तीर मार लिया है. सीडी में फर्जीवाड़ा किया गया है, लेकिन अब सेक्स सीडी से संबंधित खबरें उस चैनल में  दिखाई नहीं जाती. मुरारका ने कहा कि उसके बारे में यह प्रचारित किया जा रहा है कि उसका कोई ऑडियो वायरल हुआ है जबकि हकीकत यह है कि पूर्व में उन्होंने ( मुरारका ने ) खुद ही पैसों के लेन-देन वाला एक ऑडियो जारी किया था जिसमें चैनल मालिक की आवाज थीं. मुरारका ने बताया कि उसने चैनल मालिक को अदालत में घसीट रखा है. चैनल का मालिक अपने आपको बचाने के लिए इधर-उधर हाथ-पांव मार रहा है.

गौरतलब है कि मंत्री की कथित सेक्स सीडी मामले में रिंकू खनूजा नाम के एक शख्स का नाम भी सामने आया था. जब सीबीआई इस मामले की पूछताछ कर रही थी तब अचानक एक रोज रिंकू खनूजा की मौत हो गई. पुलिस का दावा था कि उसने अपने आटोपार्टस की दुकान में फांसी लगा ली थी जबकि रिंकू के परिजनों का कहना था कि सीडीकांड में शामिल लोगों ने खुद को बचाने के लिए रिंकू को मौत के घाट उतार दिया था. रिंकू की मौत के बाद कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने स्वयं मौके का मुआयना किया था और रिंकू के घर जाकर उनके परिजनों को आश्वस्त किया था कि कांग्रेस की सरकार बनते ही नए सिरे से मामले की जांच होगी. इधर पिछले दिनों रिंकू के परिजनों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की तब पुलिस ने एक बार फिर नए सिरे से मामले की जांच प्रारंभ की. इस मामले में पुलिस ने लवली खनूजा, विजय पंडया और मानस साहू के खिलाफ नामजद शिकायत की है. कैलाश मुरारका का कहना है कि चैनल का मालिक उसे फंसाने के लिए लगातार साजिश रच रहा है ताकि खुद बच निकले, लेकिन ऐसा होगा नहीं. मुरारका ने बताया कि चैनल का मालिक सेक्स सीडी मामले में पूरी तरह से लिप्त है. उसने पांच मंत्रियों और संगठन से जुड़े एक महत्वपूर्ण शख्स की सीडी बनाकर रखी थी. देश के एक बड़े भाजपा नेता की सीडी को उसने एक प्रसिद्ध योग गुरू को भी सौंपा था. मुरारका ने कहा कि उसका कथित ऑडियो चैनल का मालिक ही इधर-उधर बांटते फिर रहा है. वह जल्द ही चैनल के मालिक के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल करेगा. 

 

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सोशल मीडिया में इस कार्टून ने मचाया धमाल... सब कह रहे हैं-क्या तमाचा मारा है.

सोशल मीडिया में इस कार्टून ने धमाल मचा दिया है. हर लोग इस कार्टून को थोड़ा रुककर देख रहे हैं और समझने की कोशिश कर रहे हैं कि देश में आगे और क्या-क्या होना बाकी है. वैसे कार्टून की ताकत क्या होती है इस कार्टून को देखकर समझा जा सकता है. जिस गांधी के हाथों में लाठी थी उन्हें भी चौक से उतरना छिपना पड़ रहा है. यह कार्टून एक जोरदार तमाचा भी है.

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जिसे मुकेश गुप्ता और सेंगर ने फंसाया उसे अदालत ने बचाया

रायपुर. प्रदेश के जिस खनिज अधिकारी को आय से अधिक संपत्ति रखने तथा साजिश रचने के आरोप में ईओडब्लू के चीफ मुकेश गुप्ता और निरीक्षक आरएन सिंह सेंगर ने फंसाया था अदालत ने उसे दोषमुक्त मानते हुए बरी कर दिया है. अदालत ने खनिज अधिकारी कुंदन बंजारे और उसके पिता कामता प्रसाद बंजारे को फंसाने के मामले में केबी ग्रुप से जुड़े निशांत जैन की भूमिका को भी षडयंत्र का हिस्सा माना है.

पिछले 30 मई 2019 को विशेष न्यायाधीश ( भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत प्राधिकृत ) खिलावन राम गिरी ने अपने फैसले में कहा कि जो साक्ष्य प्रस्तुत किया गया उसमें निशांत जैन के नाम से पंजीकृत एक इनोवा कार को भी अभियुक्त कुंदन बंजारे का बता दिया गया था. प्रकरण में 45 लाख रुपए जप्त किए गए थे जिसे कुंदन बंजारे का बताया गया था लेकिन उस पर किसी ने कोई दावा प्रस्तुत नहीं किया. न्यायाधीश ने इस प्रकरण में जांच की आवश्यकता बताते हुए विधि के अनुसार कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है.

गौरतलब है कि संचालनालय भौमिकी और खनिकर्म विभाग में उपसंचालक की हैसियत से पदस्थ कुंदन बंजारे के ठिकानों पर ईओडब्लू ने एक फर्जी शिकायत के आधार छापामार कार्रवाई की थी. जब यह कार्रवाई हुई तब  ईओडब्लू के चीफ मुकेश गुप्ता थे. खनिज अधिकारी के बारे में यह कहा गया था उसने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है और अपने पिता कामता प्रसाद बंजारे, कल्याणी बंजारे और कमलेश कुमार बंजारे के नाम से बेनामी संपत्ति क्रय की. ईओडब्लू ने छापामार कार्रवाई के दौरान 45 लाख रुपए भी जप्त किए. न्यायालय में यह बात भी सामने आई कि खनिज विभाग में पदस्थ रहने के दौरान कुंदन बंजारे ने अवैध उत्खनन के कई मामले बनाए थे. इन मामलों से कहीं न कही निशांत जैन जुड़े हुए थे. खनिज अधिकारी रहने के दौरान कुंदन बंजारे पेनाल्टी लगाया करते थे जिससे निशांत जैन चिढ़ गया था. न्यायालय में यह भी साफ हुआ कि निशांत जैन अभियुक्त बंजारे की कार्रवाई से दुखी था. इस मामले की पड़ताल निरीक्षक आरएन सेंगर ने की थी. न्यायालय ने यह माना कि सेंगर ने समयाभाव बताते हुए कुछ जरूरी कार्रवाई निशांत जैन के दफ्तर में संपन्न की थी. अदालत ने कहा कि निरीक्षक सेंगर को यह पता था कि जिस 45 लाख की वह जप्ती बना रहा है वह निशांत जैन के पास ही रखी गई थी.

न्यायालय द्वारा कुंदन बंजारे और उसके पिता कामता बंजारे को दोषमुक्त किए जाने से यह साफ हो गया है कि पिछली सरकार में ईओडब्लू झूठी शिकायतों के आधार पर बेगुनाह लोगों को फंसाया करती थी. एक इंजीनियर आलोक अग्रवाल को फंसाए जाने के मामले में भी उनके भाई पवन अग्रवाल ने सवाल उठाए हैं. इधर खबर है कि दोषमुक्त हो जाने के बाद कुंदन बंजारे ईओडब्लू चीफ और निरीक्षक सेंगर के खिलाफ कार्रवाई किए जाने को लेकर कानूनी सलाह ले रहे हैं.

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जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल... मुकेश गुप्ता को जेल कब होगी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के विवादास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता पर एक के बाद एक कई तरह के मामले पंजीबद्ध हो रहे हैं, लेकिन इन मामलों के पंजीबद्ध होने के साथ ही जन सामान्य के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कभी मुकेश गुप्ता को जेल की सजा हो पाएगी.

इसमें कोई दो मत नहीं है कि वर्ष 2003 में जोगी के सत्ता में रहने के दौरान मुकेश गुप्ता बेहद पावरफुल थे. याद करिए तब वरिष्ठ भाजपा नेता नंद कुमार साय को लाठी-डंडों से पीट-पीटकर अधमरा कर दिया गया था. उनके पैर टूट गया था. जोगी के सत्ता से बाहर होने के बाद साय इस बात के लिए आशान्वित थे गुप्ता पर कोई बड़ी कार्रवाई होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. भाजपा के सत्ता में आते ही गुप्ता एक बार फिर शक्तिशाली होकर उभरे और उनके खिलाफ चल रही सारी जांच ठंठे बस्ते में चली गई. इधर मुकेश गुप्ता पर शिकंजा कसने के लिए भूपेश बघेल सरकार की प्रशंसा तो हो रही है, लेकिन जनसामान्य के बीच यह चर्चा भी जमकर चल रही है कि क्या वाकई मुकेश गुप्ता को उनके काले-पीले और अवैध कारनामों के लिए कभी कोई सजा मिल पाएगी.

सवाल उठने के कई कारण है. सबसे पहला कारण तो यही है कि अदालत ने मुकेश गुप्ता को अवैध फोन टैप कांड मामले में फौरी राहत दी है. गुप्ता के पीछे बड़े-बड़े वकीलों की फौज है. इधर गुप्ता महज एक या दो बार ही ईओडब्लू में बयान देने के लिए उपस्थित हुए हैं. पहली बार उपस्थिति के दौरान उनकी अकड़ के किस्से सार्वजनिक हुए तो दूसरी बार यह बात सार्वजनिक हुई है कि वे इतना ज्यादा कूल थे कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है. पूछो जो पूछना है.... जैसा अंदाज था. गुप्ता को निलंबित हुए 90 दिन से ज्यादा हो गए हैं. इस बीच उन्होंने एक भी बार पुलिस मुख्यालय में अपनी आमद नहीं दी है जबकि उनके साथ ही निलंबित किए गए रजनेश सिंह बकायदा पुलिस मुख्यालय के छोटे से कमरे में बैठते हैं और जब बयान देने को कहा जाता है तब उपस्थित होते हैं. नियमानुसार गुप्ता को भी पुलिस मुख्यालय में मौजूद रहना है, लेकिन उनका रवैय्या सब को ठेंगे पर रखने जैसा है. उन्हें बार-बार नोटिस देकर बयान देने के लिए बुलाया जाता है लेकिन जब उनकी मर्जी होती है तब वे फ्लाइट पकड़कर बयान देने के लिए दिल्ली से आते हैं और जब मर्जी होती है फ्लाइट पकड़कर दिल्ली चले जाते हैं. पूर्व सरकार की मेहरबानी से उन्हें पूर्व विधायक की पत्नी देवती कर्मा के ठीक बगल वाला आवास आवंटित किया गया है, लेकिन यहां भी वे यदा-कदा आते हैं. वहां मौजूद सिपाहियों से पूछो तो वे कहते हैं- कई महीने हो गए साहब को देखा ही नहीं. साहब और कही रहते हैं क्या... पूछने पर सिपाहियों का जवाब होता है- हमें नहीं मालूम, लेकिन सुनते हैं कि दिल्ली में घर बना लिया है. वही से आना-जाना करते हैं. मुकेश गुप्ता के इस तरह के बेखौफ आचार- व्यवहार से यह सवाल भी उठ रहा है कि जब उन्हें अपनी सारी कानूनी प्रक्रिया दिल्ली से आकर-जाकर ही पूरी करनी है तो फिर सरकार ने उन्हें आवास सुविधा क्यों दे रखी है. उनके खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है, लेकिन वे एक भी बार अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं. उनका पूरा अंदाज जो करना है... कर लो जैसा है.

जरा सोचिए... अगर कोई साधारण आदमी फोन टैप और धोखाधड़ी जैसी गंभीर धाराओं का आरोपी होता तो क्या ईओडब्लू और पुलिस साधारण आदमी की आरती उतारने का उपक्रम करती. शायद नहीं.... लेकिन मुकेश गुप्ता के मामले में ऐसा ही हो रहा है. जनता के बीच में यह धारणा घर कर गई है कि मुकेश गुप्ता का बाल बांका भी नहीं हो पाएगा. वैसे एक बड़ी आबादी मुकेश गुप्ता और सुपर सीएम बनकर छत्तीसगढ़ को लूटने वाले शख्स को जेल के पीछे देखना चाहती है, लेकिन हाल-फिलहाल तो यह मुमकिन होते नहीं दिख रहा है. जनसामान्य के बीच यह चर्चा भी कायम है कि मुकेश गुप्ता पर ठोस कार्रवाई के मामले में कुछ अफसर सरकार को अंधेरे में रखकर चल रहे हैं. उनकी पूरी कोशिश है कि किसी तरह से मुकेश गुप्ता को मुसीबत के घेरे से बाहर निकाल लिया जाय. बहुत संभव है इन चर्चाओं में कोई दम न हो, लेकिन यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि चर्चा का स्तर व्यापक है और जबरदस्त है.

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विवादास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता पर एक और मामला दर्ज

राजकुमार सोनी

रायपुर. देश के सबसे विवादास्पद पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता पर एक और मामला दर्ज कर लिया गया है. यह मामला माणिक मेहता की शिकायत के बाद दर्ज किया गया है. माणिक मेहता वहीं है जिनकी बहन मिक्की मेहता से मुकेश गुप्ता ने पहली पत्नी रहने के बाद भी विवाह किया था और बाद में संदिग्ध परिस्थियों में मिक्की की मौत हो गई थी. फिलहाल माणिक की शिकायत पर दुर्ग जिले की सुपेला पुलिस ने गुप्ता पर धारा 409, 420, 467, 468, 471, 201 एवं 421 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है. गौरतलब है कि कुछ माह पहले ही मुकेश गुप्ता पर नागरिक आपूर्ति निगम में हुए घोटाले की जांच के दौरान अवैध ढंग से फोन टैपिंग का मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा उनकी करीबी रेखा नायर पर भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में ईओडब्लू ने प्रकरण पंजीबद्ध किया है. मुकेश गुप्ता पिछले कई महीनों से निलंबित है. निलंबन अवधि के दौरान उन्हें पुलिस मुख्यालय में अपनी आमद देनी है, लेकिन उन्होंने एक मर्तबा भी अपनी आमद नहीं दी है. उन पर विभागीय जांच भी लंबित है. कई बार नोटिस जारी किए जाने के बाद भी वे विभागीय जांच में बयान देने के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं.

बहरहाल पुलिस ने जो मामला दर्ज किया है उसके मुताबिक मुकेश गुप्ता वर्ष 1998 के जून माह में दुर्ग में पुलिस अधीक्षक थे. इस दौरान वे भिलाई साडा में पदेन सदस्य भी थे. माणिक का आरोप है कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का दुरूपयोग करते हुए मोतीलाल नेहरू आवासीय योजना ( पश्चिम ) में ब्लाक क्रमांक 67, भूखंड क्रमांक 5 कुल 540 वर्ग मीटर का आवंटन अपने नाम से प्राप्त कर लिया था. माणिक मेहता ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है किमुकेश गुप्ता ने 9 जून  1998 को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर  2928 वर्ग फुट के आबंटित भूखण्ड के स्थान पर, उससे लगभग दोगुने भूखण्ड ( 5810.40 वर्ग फुट ) की 11 जून 1998 को रजिस्ट्री अपने नाम से करवा ली थी, जबकि चैक की राशि 13 जून 1998 को जमा हुई थी. यानी कि बिना पैसे दिए ही मुकेश गुप्ता ने विघटित हो चुके साडा से अपने नाम उक्त जमीन करवा ली थी.

इस जमीन जमीन को खरीदने के पश्चात मुकेश गुप्ता ने पुलिस विभाग को  किसी तरह की कोई सूचना नहीं दी और बगैर अनुमति के उस जमीन पर बेशकीमती इमारत भी बनवा ली. जब इस मामले की चर्चा होने लगी तब मुकेश गुप्ता ने इस मकान को 42 लाख में बेच दिया और दिल्ली में एक करोड़ 5 लाख रुपए से एक दूसरा मकान खरीद लिया.माणिक ने पुलिस को बताया कि मुकेश गुप्ता ने विभाग को पहले इस बात की सूचना दी थी कि वह अपने मकान को 27 लाख रुपए में बेचना चाहता है. लेकिन फिर उन्होंने विभाग को यह सूचित किया कि अब सौदा निरस्त हो गया है. लेकिन फिर अगले दिन ही एक नए विक्रेता से उसी संपत्ति का सौदा 42 लाख में कर लिया.

माणिक का कहना है कि दिल्ली में खरीदे गए मकान में एक नंबर के पैसों की व्यवस्था नहीं हो पाई थी. यह भी समझना होगा कि कोई विवादित व्यापारी एक आला पुलिस अफसर की संपत्ति को बाजार मूल्य से डेढ़ गुना मंहगी क्यों खरीदेगा. माणिक का आरोप है कि गुप्ता ने साड़ा भिलाई के भंग होने के बाद कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भूखंड की रजिस्ट्री अपने नाम से करवाई थी. इधर खबर है कि मुकेश गुप्ता से प्रताड़ित लगभग 25 लोगों ने सरकार के साथ-साथ विभिन्न थानों में आवेदन दे रखा है. इनमें कुछ महिलाओं के आवेदन भी शामिल है.आवेदन में छत्तीसगढ़ में सुपर सीएम के नाम से विख्यात संविदा में पदस्थ एक अफसर का भी खास तौर पर उल्लेख है. एक आवेदन में तो इस बात का भी उल्लेख है कि संविदा में पदस्थ अफसर ने पुलिस मेंस और फार्म हाउस में कब-कब किस घटना को अंजाम दिया था. इधर वरिष्ठ पुलिस अफसर गिरधारी नायक ने भी मिक्की मेहता संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. कहा जा रहा है कि विधानसभा सत्र से पहले सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दे सकती है.

 

 

 

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पीडब्लूडी में अटके प्रमोशन से सीएम खफा

रायपुर. प्रदेश का पीडब्लूडी विभाग ही एक ऐसा विभाग है जहां नीचे से लेकर ऊपर तक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रमोशन अटका हुआ है. मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पीडब्लूडी की समीक्षा बैठक के दौरान अटके हुए प्रमोशन को लेकर अप्रसन्नता व्यक्त की तो अफसर बगले झांकने लगे.मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जब यदि किसी कर्मचारी और अधिकारी को सही समय पर पदोन्नति नहीं मिलती है तो वह निरुत्साहित हो जाता है. जिसका जो वाजिब हक है वह उसे मिलना चाहिए. मुख्यमंत्री जब यह टिप्पणी कर रहे थे तब विभाग के सचिव अनिल राय और अन्य अफसर मौजूद थे.

गौरतलब है कि पीडब्लू विभाग में कर्मचारियों और अफसरों की पदोन्नति का मामला लंबे समय से अटका पड़ा है. कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इतनी अधिक खींचतान है कि हर कोई एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ में लगा रहता है. दूसरों की अयोग्यता की वजह से कुछ योग्य प्रमुख अभियंता इसलिए पिछड़ गए हैं क्योंकि वे किसी को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते. कुछ अभियंताओं ने नाइंसाफी से परेशान होकर बकायदा कोर्ट की शरण ले रखी है. मुख्यमंत्री ने जब पदोन्नति की बात उठाई तो ऐसा लग रहा था कि वे विभाग की रग-रग से वाकिफ है.

मंगाई स्काई वॉक की ओरिजनल फाइल

बैठक ने मुख्यमंत्री ने स्काई वॉक की उपयोगिता को लेकर अफसरों से सवाल भी पूछे. एक अफसर ने कहा कि पुरानी सरकार ने पैसा खर्च किया है तो स्काई वॉक को तोड़ना ठीक नहीं होगा. मुख्यमंत्री बघेल ने सवाल किया- भले ही जनता कष्ट उठाती रहे. उन्होंने अफसरों से स्काई वॉक योजना की ओरिजनल फाइल को उनके सामने प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. ज्ञात हो कि भाजपा के शासनकाल में कोरी नाम के एक इंजीनियर ने स्काई वॉक का प्रस्ताव तैयार किया था जबकि मंजूरी उन अफसरों ने ही दी थी जो अब भी पीडब्लूडी में ही तैनात है. इन अफसरों में वन विभाग के अफसर अनिल राय जो लंबे समय से पीडब्लूडी में तैनात है ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थीं. मुख्यमंत्री ने बैठक में अफसरों और मंत्रियों के बंगले के निर्माण की धीमी गति को लेकर भी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि जब तक अफसर और मंत्री नवा रायपुर में नहीं रहेंगे तब तक आम जनता से अपेक्षा करना बेकार है. मुख्यमंत्री ने बस्तर के माओवाद प्रभावित इलाकों में स्थानीय युवकों को रोजगार देने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिए. उन्होंने कहा कि बस्तर में जो सड़क का जो भी काम होगा उसमें स्थानीय भागीदारी आवश्यक रुप से सुनिश्चित होनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने नेशनल हाइवे की गुणवत्ता को लेकर भी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि अधिकांश जगह से यही शिकायत मिल रही है कि सड़कें खराब बन रही है.उन्होंने गुणवत्ता का ध्यान रखने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और बिलासपुर के बीच की सड़क भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है. लोकनिर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर कार्य करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अक्सर अधिकारी समस्या बताते रहते हैं, लेकिन वे इस बात का ख्याल नहीं रखते कि समस्या का समाधान कैसे निकल सकता है.

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बिजली बोर्ड का अधिकारी 19 साल से मंत्रालय का बादशाह

रायपुर. बिजली बोर्ड का एक अधिकारी एमएस रत्नम गत 19 सालों से छत्तीसगढ़ मंत्रालय का बादशाह बना हुआ है. बताते हैं कि राज्य निर्माण से लेकर अब तक कई तरह के सचिव, मुख्य सचिव सेवानिवृत होकर घर बैठ गए,लेकिन रत्नम जहां के तहां है. कई तरह की गंभीर शिकायतों के बावजूद कोई उनका बाल-बांका नहीं कर पाया. जब वे बिजली बोर्ड से मंत्रालय भेजे गए थे तब कार्यपालन अभियंता थे. अब मुख्य अभियंता है. हालांकि मंत्रालय में उन्हें विशेष सचिव का दर्जा मिला हुआ है. बिजली बोर्ड के कर्मचारियों और अधिकारियों का कहना है कि रत्नम कभी खुद को पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड का करीबी बताकर बचते रहे हैं तो कभी शिवराज सिंह का करीबी बनकर. उन पर संविदा में पदस्थ एक ऐसे अधिकारी का भी वरदहस्त रहा है जो इन दिनों सब कुछ छोड़-छाड़कर दिल्ली जा बसा है. बताना लाजिमी होगा कि छत्तीसगढ़ में जब भाजपा की सरकार थी तब संविदा में पदस्थ संरक्षणकर्ता अफसर को भाजपा के लोग ही सुपर सीएम कहा करते थे.

बिजली विभाग के अनेक अधिकारियों ने समय-समय पर रत्नम के कारनामों के बारे में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को जानकारी दी है. अभी हाल के दिनों में कुछ अधिकारियों ने रत्नम के बारे में मुख्यमंत्री को विस्तारपूर्वक बताया है. अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में जगह-जगह बिजली कटौती का जो खेल चल रहा है उस खेल में रत्नम के अलावा कुछ ऐसे अफसर संलिप्त है जो यह मानने को तैयार नहीं है कि प्रदेश में अब कांग्रेस की सरकार है. पन्द्रह सालों तक स्वामी भक्ति में लिप्त रहे अफसर भूपेश सरकार को बदनाम कर अभी से भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की जुगत में लग गए हैं. हालांकि मुख्यमंत्री ने गुणा-भाग को पहले ही भांप लिया और यह बयान भी दे दिया है कि बिजली कटौती के खेल में भाजपाई शामिल है बावजूद इसके अफसर चाहते है कि त्राहिमाम-त्राहिमाम की स्थिति बरकरार रहे.

 बिजली बोर्ड अभियंता संघ से जुड़े एक प्रमुख पदाधिकारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ जब अविभाजित मध्यप्रदेश का हिस्सा था तब बस्तर के बारसूर प्रोजेक्ट में एमएस रत्नम की तैनाती की गई थी. रत्नम मुख्य रुप से सिविल इंजीनियर है जबकि बिजली विभाग का कामकाज समझने के लिए इलेक्ट्रिक इंजीनियर होना अनिवार्य है. पदाधिकारी का कहना है कि एक सिविल इंजीनियर की वजह से ऊर्जा विभाग को कई बार आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और सीबीआई की जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है. पदाधिकारी का कहना है कि रत्नम पिछले 19 साल से मंत्रालय में ही पदस्थ है और लगभग तीन लाख 25 हजार रुपए की मोटी तनख्वाह प्राप्त कर रहे हैं. बोर्ड से जुड़े लोग कहते हैं कि उन्हें कई मर्तबा ऊर्जा विभाग के एक पूर्व सलाहकार के निवास स्थान पर भी देखा गया है. बताते हैं कि वे भाजपा के सुपर सीएम के संपर्क में भी है. सूत्रों का कहना है कि बिजली बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने जब रत्नम के बारे में एक प्रमुख अधिकारी को जानकारी दी तो उन्होंने उसे यह कहकर बचा लिया कि अब ज्यादा दिन नहीं है. रत्नम अक्टूबर 2020 में सेवानिवृत हो जाएंगे तो फिर किसी अच्छे अफसर की पदस्थापना कर देंगे. क्या तब तक बिजली बोर्ड का क्या हाल बेहाल ही रहने वाला है. इस बारे में रत्नम से उनके निवास पर मौजूद फोन 07712255705 से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया है तो ज्ञात हुआ कि वे मौजूद नहीं है. यह जानकारी भी दी गई कि वे अपने साथ कोई मोबाइल नहीं रखते हैं.

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बिलासपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष और उसके बेटे को शराब ठेकेदार ने दी जान से मारने की धमकी... मामले ने तूल पकड़ा

रायपुर. बिलासपुर प्रेस कल्ब के अध्यक्ष तिलक राज सलूजा और उनके पुत्र गुरजीत सलूजा को  शराब ठेकेदार राजा भाटिया द्वारा गाली-गलौच कर जान से मारने की धमकी देने वाले मामले ने तूल पकड़ लिया है. हालांकि पुलिस ने शराब ठेकेदार के खिलाफ धारा 294 और 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन दूसरी ओर पुलिस ने राजा भाटिया की शिकायत पर एक काउंटर रिपोर्ट भी दर्ज कर ली है. इधर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में शराब ठेकेदार की ओर से प्रेस क्लब अध्यक्ष के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार से प्रेस कल्ब के जिम्मेदार सदस्य खफा है और जल्द ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर वस्तुस्थिति से अवगत कराने की योजना पर विचार कर रहे हैं.

गौरतलब है कि इसी माह 16 मई को शीतला मंदिर दयालबंद का रहवासी गुरजीत सलूजा उर्फ शानू रात 8 बजे अपने पिता तिलक सलूजा के लौटने का इंतजार कर रहा था. ठीक उसी दौरान वहां राजा भाटिया आया और उसने गाली-गलौच करते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी. भाटिया ने शानू के पिता का नाम लेकर उसे भी देख लेने को कहा. बताया जाता है कि शराब ठेकेदार और शानू के बीच घर के पास की एक जमीन में गेट लगाए जाने को लेकर पुराना विवाद चल रहा है. इसके पहले भी कई बार विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है. गुरजीत का आरोप है कि जमीन छोड़ने के एवज में राजा भाटिया उनसे 10 लाख रुपए मांग करता है. गुरजीत का कहना है कि अब भी राजा भाटिया इधर-उधर से धमकी-चमकी के खेल में लगा हुआ है. उसके हौसले बुलंद है. प्रेस कल्ब अध्यक्ष तिलक राज सलूजा का कहना है कि पुराने जमीनी विवाद में शराब ठेकेदार आए दिन विवाद की स्थिति पैदा करते रहा है. अगर कोई बात गलत है तो उसका निराकरण कानून- सम्मत तरीके से ही हो सकता है, लेकिन गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी देना यह साबित करता है कि शराब ठेकेदार के हौसले बुलंद है. 

 

 

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बिलासपुर में आईजी बंगले के पास सामाजिक कार्यकर्ता नंद कश्यप पर गुंडों ने किया हमला

रायपुर. बिलासपुर के रहवासी देश के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता नंद कश्यप पर बीती रात कुछ गुंडों ने प्राणघातक हमला कर उन्हें बुरी तरह से घायल कर दिया है. हमले में कश्यप के बड़े भाई और उनके पुत्र अंकित कश्यप को भी चोटें आई है. अंकित फिलहाल अपोलो अस्पताल में भर्ती है जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है.

बताया जाता है कि कश्यप बिलासपुर में ठीक आईजी बंगले के पास सिविल लाइन में निवास करते हैं. यहीं पर राकेश सहगल नाम का चिकित्सक पिछले कई सालों से एक अस्पताल का संचालन करता है. रिहाइशी इलाके में अस्पताल के संचालन की वजह से आए दिन पार्किंग को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित होते रहती है. बीती रात भी पार्किंग को लेकर बहस हुई और इतनी ज्यादा बढ़ गई कि थोड़ी ही देर में तालापारा के पालित गुंड़ों ने कश्यप और उनके परिजनों पर हमला कर दिया. बताते हैं कि तालापारा में तैय्यब नाम के शख्स ने पैसे लेकर काम करने वाले कुछ असामाजिक तत्वों को संरक्षण दे रखा है. यह शख्स शहर के रसूखदार लोगों  इशारे पर अपनी फौज लेकर घटना स्थल पर पहुंच जाता है. शहर के वे लोग जो गुंडे और मवालियों से मदद लेने के आदी है अक्सर तैय्यब गैंग की सेवाएं लेते रहते हैं. ऐसे लोगों में शहर के नामी-गिरामी नेता भी शामिल है. सूत्रों का कहना है कि यह शख्स लोगों से मकान खाली करवाने से लेकर अन्य सभी तरह के अवैधानिक कामों को प्रोफेशनल तौर-तरीके से अंजाम देता है. ऐसा नहीं है कि पुलिस को इस गैंग की जानकारी नहीं है, लेकिन वह खामोश बनी रहती है. इस घटना में राकेश सहगल के साथ तैय्यब गैंग और गुलशन नाम के एक नेताजी की भूमिका सामने आई है. घटना के बाद पुलिस ने कुछ संदिग्ध लोगों की धरपकड़ की है, लेकिन अब तक राकेश सहगल, तैय्यब और घटना से जुड़े प्रमुख लोग गिरफ्त से बाहर है. पीयूसीएल के पूर्व अध्यक्ष लाखन सिंह और अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने बताया कि बुधवार को घटना के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता और ट्रेड यूनियन से जुड़े लोग कलक्टर से मिलकर ज्ञापन सौपेंगे.

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बिलासपुर की अधिवक्ता प्रियंका को बदनाम करने की साजिश

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहने वाली प्रियंका शुक्ला एक अधिवक्ता होने के साथ-साथ एक प्रतिबद्ध सामाजिक कार्यकर्ता भी है. कई सामाजिक मुद्दों पर जूझते रहने की वजह से प्रियंका ने बेहद अल्प समय में ही अपनी एक अलग पहचान कायम कर ली है, लेकिन उनकी यही पहचान परेशानी का सबब बन गई है.कतिपय असामाजिक तत्व उनकी पहचान को मटियामेट करने के खेल में लग गए हैं. पिछले दिनों प्रियंका के खिलाफ बिलासपुर के गोंडपारा में रहने वाली एक महिला विमला लहरे ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत में यह आरोप लगाया था कि प्रियंका सामाजिक कार्यों की आड़ लेकर किसी दूसरे तरह के कामधंधों में लिप्त है जिसे समाज खुले तौर पर स्वीकार नहीं कर सकता. जाहिर सी बात है कि कोई महिला सामाजिक विद्रूपताओं के खिलाफ संघर्ष करती है तो आरोप चारित्रिक हनन के भंयकर आरोपों से ग्रसित ही होगा. इस शिकायत के बाद पुलिस भी ताबड़तोड़ ढंग से सक्रिय हुई क्योंकि वह भी प्रियंका के आंदोलन से लगातार परेशान चल रही थी. समय-असमय कुछ पुलिसकर्मी उन्हें सबक सिखाने की धमकी भी दे चुके हैं. खैर... पुलिस ने जबरदस्त ढंग से छानबीन की तो पता चला कि गोंडपारा में विमला लहरे नाम की कोई महिला ही नहीं रहती है और शिकायत झूठी है. इस झूठी शिकायत के बाद भी पुलिस ने प्रियंका को बयान देने के लिए थाने बुलवाया और मनोवैज्ञानिक ढंग से दबाव बनाते हुए कहा- मैडम...अब शिकायत मिली है तो जांच करनी ही पड़ती है.

बहरहाल झूठी शिकायत और पुलिस की छानबीन के बाद सोमवार को बिलासपुर के सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता आनंद मिश्रा, नंद कश्यप, लाखन सुबोध, रजनी सौरेन, गायत्री सुमन, निकिता, सोनिया, दिव्या जायसवाल, मनोज अग्रवाल, राधा श्रीवास, निलोत्पल शुक्ला, संपा सिकंदार, इंदु यादव, तुषार बीके और डाक्टर लाखन सिंह ने पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है. पुलिस अधीक्षक ने प्रतिनिधि मंडल से कहा कि जो कोई भी सामाजिक क्षेत्र में काम करता है उसे ऐसी विचित्र स्थितियों का सामना करना ही पड़ता है. अव्वल तो पुलिस की कार्रवाई ही संदेह के घेरे में है. जब एक शिकायत को पुलिस ने अपनी स्वयं की छानबीन में गलत पा लिया तो फिर प्रियंका को बयान देने के लिए थाने क्यों बुलवाया. पुलिस प्रियंका का बयान लेकर क्या यह संदेश देना चाहती थी कि ज्यादा आंदोलन करने से इसी तरह की जांच-पड़ताल से गुजरना होता है. पुलिस अधीक्षक मीणा का यह बयान भी चौकाने वाला है जब वे कहते हैं कि कोई सामाजिक कार्य करता है तो उसे इसी तरह की परिस्थितियों का सामना करना ही होता है. बेहतर होता कि पुलिस अधीक्षक कहते- हमने शिकायत को झूठी पाया है अब हम यह पता लगाने की कोशिश करते है कि इस गुमनाम चिट्ठी के खेल के पीछे कौन है. पुलिस अधीक्षक अगर इस तथ्य पर काम करते तो बेहतर स्थिति होती और फिर कोई दोबारा जनहित के मसलों पर काम करने वाली किसी महिला के खिलाफ झूठी शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटाता.

कौन हो सकता है साजिशकर्ता

इस गुमनाम चिट्ठी के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार प्रियंका से किसको दिक्तत है. कौन है मुख्य साजिशकर्ता. प्रियंका कहती है- पिछले कुछ समय से वह महिला एवं बाल विकास विभाग के मामलों को देख रही थी. इस विभाग की भर्राशाही से परेशान कतिपय लोगों ने उनसे संपर्क किया था. एक बच्चे को गोद लेने वाले मामले में भी एक वकील ने फोन करके कहा था कि कहां पचड़े में पड़ रही हो. माना जा रहा है कि इस गुमनाम, लेकिन आरोपों से भरे सनसनीखेज खत के पीछे इसी विभाग के एक कद्दावर अधिकारी की भूमिका है. चारित्रिक आरोपों के जरिए प्रियंका को बदनाम करने के खेल में धारा 376 के केस में फंसे एक युवक और पुलिस की भूमिका को भी जोड़कर देखा जा रहा है. प्रियंका ने अपना मोर्चा डॉट कॉम से कहा कि इधर-उधर जो पत्राचार हुआ है उसकी भाषा से यह तो समझ में आ गया है कि खेल के पीछे कौन है.... जल्द ही पर्दाफाश भी हो जाएगा.

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मुकेश गुप्ता से मेरी जान को खतरा... पत्रकार नारायण शर्मा ने लगाई मुख्यमंत्री से गुहार

रायपुर. इंडियन मीडिया वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार नारायण शर्मा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को खत लिखकर विवादास्पद निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. श्री शर्मा ने कहा है कि मुकेश गुप्ता उन्हें पहले भी जान से मारने की धमकी दे चुके हैं और अब भी उनके ऊपर जान माल की हानि का खतरा मंडरा रहा है.

15 मई 2019 को लिखे एक खत में नारायण शर्मा ने मुख्यमंत्री बघेल से गुहार लगाते हुए पूर्व में घटित एक वाक्ये का जिक्र भी किया है. श्री शर्मा ने अपने आवेदन के साथ भाजपा सरकार के समय पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह को सौंपा गया एक खत भी संलग्न किया है. इस खत में उन्होंने लिखा है कि दिनांक 17 जनवरी 2014 को जब वे बस्तर में गिरफ्तार किए गए माओवादियों की गिरफ्तारी से संबंधित समाचार के संकलन के लिए तत्कालीन पुलिस महानिदेशक रामनिवास से मुलाकात करने उनके कक्ष में गए थे तब अचानक मुकेश गुप्ता वहां पहुंचे और उन्होंने वहां मौजूद एक अन्य पुलिस अफसर से कहा कि हमारा अगला टारगेट नारायण शर्मा है. इनको पन्द्रह से बीस दिन में निपटा देना है. अफसर ने भी गुप्ता की हां में हां मिलाई. नारायण शर्मा ने लिखा कि वे चुपचाप मुकेश गुप्ता की बात सुनते रहे. पुलिस महानिदेशक रामनिवास ने मुकेश गुप्ता को खामोश रहने के लिए कहा, लेकिन वे खामोश नहीं हुए और नजदीक आकर बोले- मुझे सब पता है कि तुम कितनी बार माणिक मेहता से मिलने जेल गए और कितनी बार उसकी मां श्यामा मेहता से मिलने कोर्ट में गए थे. मुझे यह भी पता है कि तुम फोन में किस-किस से क्या-क्या बात करते हो.

नारायण शर्मा ने अपना मोर्चा डॉट कॉम से कहा कि जब यह घटना घटित हुई थी तब भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे और अब भी है. घटना की विस्तृत जानकारी लेने के बाद श्री बघेल ने दिनांक 13 फरवरी 2014 को डाक्टर रमन सिंह को खत लिखकर पुलिस अफसरों के कृत्य को निदंनीय और गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन रमन सिंह ने मुकेश गुप्ता के खिलाफ कभी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की. उलटे मुकेश गुप्ता और ज्यादा शक्तिशाली बना दिए गए. इधर भूपेश बघेल की सरकार ने मुकेश गुप्ता के खिलाफ एक्शन तो लिया है, लेकिन अब भी निरकुंशता कम नहीं हुई है. श्री शर्मा ने कहा कि वर्ष 2014 में ही मुकेश गुप्ता ने साफ-साफ कहा था कि उन्हें सब पता है कि तुम फोन पर किससे-किससे बात करते हो... जाहिर सी बात है कि तब मुकेश गुप्ता मेरा ( नारायण शर्मा ) का फोन टेप करते थे. नारायण शर्मा ने कहा कि पूर्व में भी मुकेश गुप्ता ने उन्हें चार झूठे मामलों में फंसाया था और अब भी वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मुझे और मेरे परिवार को जान से खत्म करने की साजिश रच रहे हैं.

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कैसे मिलेगी मलाईदार पोस्टिंग... उठा-पटक में लगे हैं लूप लाइन में बैठे वन अफसर

रायपुर. प्रदेश में जब रमन सिंह की सरकार थीं तब भारतीय वन सेवा के अधिकांश अफसर मंत्रालय और अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर मलाई छान रहे थे. नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लंबे समय से मंत्रालय में पदस्थ रहने वाले अफसरों को अरण्य भवन रास्ता दिखाया, लेकिन वन अफसरों में लोक निर्माण के सचिव अनिल राय, योजना सांख्यिकी में पदस्थ आशीष भट्ट, सामान्य प्रशासन विभाग विभाग के कौशलेंद्र सिंह और सचिव जयसिंह महस्के ऐसे हैं जिनकी पदस्थापना मंत्रालय में है. आशीष भट्ट और महस्के को लेकर गंभीर शिकायतें भी नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार में सुपर सीएम की नाक का बाल समझे जाने वाले अनिल राय अब तक मंत्रालय में कैसे टिके हैं इसे लेकर कई तरह की चर्चा प्रशासनिक गलियारों में कायम है. मंत्रालय से बाहर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क में पदस्थ आलोक कटियार की विवादित कार्यशैली की गूंज भी अब हर चौक-चौराहों में सुनाई देने लगी है. सीएसआईडीसी में पदस्थ अरुण प्रसाद से उनका अपना स्टाफ ही खफा चल रहा है. ( आधे से ज्यादा पुराने साहब सुनील मिश्रा से घरोबा रखने वाले हैं. )  अलबत्ता पर्यटन एवं संस्कृति विभाग में पदस्थ अनिल साहू न काहू से दोस्ती न  काहू से बैर... सिद्धांत का पालन करते हुए काम कर रहे हैं.

इधर चुनाव परिणाम के बाद 27 मई तक आचार सहिता हट जाएगी, लेकिन वन विभाग में लूप लाइन में पदस्थ अफसर मलाईदार जगह पाने के लिए अभी से जोड़-तोड़ में लग गए हैं. सुपर सीएम के साथ कई बार विदेश यात्रा करने वाले सुनील मिश्रा अरण्य भवन लौटे तो उन्हें दो महीने तक बैठने की जगह तक नहीं मिली. उनकी सारी हेकड़ी निकल गई थी. जैसे-तैसे उन्होंने वन विभाग की कमान संभालने वाले राकेश चतुर्वेदी को मनाया तो उन्हें काम सौंपा गया. फिलहाल वे वन विभाग की शिकायतों का निराकरण करने में लगे हुए हैं और चिट्ठी-पत्री का जवाब देते हैं. खबर है कि मिश्रा एक बार फिर मंत्री परिक्रमा में लग गए हैं. वन अफसर संजय शुक्ला पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड के बेहद नजदीकी समझे जाते थे. जब तक ढांड मंत्रालय में पदस्थ थे तब तक उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व भी दिया जाता रहा. जमीनों की खरीदी और बेशुमार संपत्ति अर्जित करने के आरोपों से घिरे संजय शुक्ला भी अरण्य भवन तो लौटे तो कई दिनों तक खाली रहे. फिलहाल उन्हें अनुश्रणव एवं मूल्यांकन का कामकाज सौंपा गया है. सूत्र बताते हैं कि वे भी अपने पुराने संबंधों के जरिए जोड़-तोड़ कर रहे हैं. हालांकि श्री शुक्ला राज्य लघु वनोपज संघ में एडिशनल एमडी बनने के लिए पहले भी प्रयासरत थे, लेकिन तब उनका जुगाड़ काम नहीं आया. तुरुप का पता ही फेल हो गया. हार्टिकल्चर से लौटे नरेंद्र पांडे किसी तरह की कवायद में नहीं लगे हैं क्योंकि उनकी सेवानिवृति को कुछ समय ही बाकी है. इसी 30 जून को वरिष्ठ अफसर कौशलेंद्र सिंह, केसी यादव और एके द्विवेदी भी सेवानिवृत हो रहे हैं सो वे भी खामोश है. अगर पुरानी सरकार होती तो अफसर संविदा में तैनाती के लिए आवेदन लगा चुके होते. अरण्य भवन लौटने वालों में वन अफसर नरसिम्हाराव और रामाराव भी शामिल है. ये दो अफसर ऐसे हैं जिनके पास किसी भी तरह का कोई काम नहीं है. ये दोनों अफसर अरण्य भवन में काफी-चाय पीने आते हैं. किसी चपरासी से पूछिए कि साहब... क्या कर रहे हैं तो जवाब मिलता है- साहब... मक्खी मार रहे हैं.

( अपना मोर्चा डॉट कॉम की प्रत्येक खबर को आप प्रकाशित करने के लिए स्वतंत्र है. बस... आपको साभार... अपना मोर्चा डॉट कॉम लिखना होगा. खबरों को जस का तस यानी कापी पेस्ट करने वालों से यह निवेदन मात्र है. ) 

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मशहूर कत्थक नृत्यांगना से विकास ने पूछा- बताइए आपके हसबैंड छत्तीसगढ़ छोड़कर क्यों भाग गए

रायपुर. अब तक पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के प्रमुख सचिव ही विवादों में घिरे हुए थे, लेकिन अब मशहूर कत्थक नृत्यांगना यास्मीन सिंह भी विवादों के घेरे में आ गई है. संविदा में लगभग 14 साल तक नियुक्ति के बाद सरकार ने एक शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ जांच बिठा दी है. इधर मीडिया के जरिए जांच की सूचना मिलने के बाद यास्मीन सिंह ने शिकायतकर्ता विकास तिवारी और उन्हें बदनाम करने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है. यास्मीन सिंह का कहना है कि उनकी नियुक्ति सारे नियमों के हिसाब से सक्षम अधिकारियों की मंजूरी के साथ पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई थीं. उनके ऊपर लगाए गए तमाम आरोप असत्य और निराधार है. जबकि कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी  ने एक बार फिर यास्मीन सिंह और उनके पति को आड़े हाथों लिया है. विकास तिवारी ने यास्मीन सिंह से पूछा है कि उन्हें इस बात का जवाब अवश्य देना चाहिए नई सरकार के बनते ही उनके पति छत्तीसगढ़ छोड़कर क्यों भाग गए.

बेरोजगार होंगे तो आहत तो जारी रहेगा प्रतिवाद

विकास तिवारी ने यास्मीन सिंह के द्वारा सोशल मीडिया और अखबारों में दिए गए बयान पर  कहा है कि एक महिला होने के नाते उनका स्वागत और सम्मान रहेगा, लेकिन अगर गलत काम और गलत नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ के लाखों बेरोजगार आहत होते हैं तो वे अपना प्रतिवाद भी जारी रखेंगे. तिवारी ने कहा कि अगर प्रदेश सरकार यास्मीन सिंह का सम्मान नहीं करती तो प्रारंभिक जांच का आदेश ही नहीं देती. उन्हें तो इस बात के लिए सरकार का आभारी होना चाहिए कि उनकी नियुक्ति के खिलाफ जांच के लिए एक महिला अधिकारी को ही जवाबदारी दी गई है. यहां तक जांच के लिए आदेश जारी करने वाली भी एक महिला है. यास्मीन सिंह ने अपने बयान में यह कहा है कि उनके खिलाफ शिकायत कांग्रेस पार्टी के एक सदस्य ने की है. विकास तिवारी ने जानना चाहा है कि क्या अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी  के खिलाफ कांग्रेस के सदस्यों को शिकायत करने का अधिकार नहीं है. क्या सारे अधिकार भारतीय जनता पार्टी के पास ही सुरक्षित हैं ? यास्मीन सिंह ने यह भी कहा है कि उनके और उनके परिवार वालों को राजनीतिक द्वेष के तहत टारगेट किया जा रहा है. प्रवक्ता विकास तिवारी ने पूछा है कि यास्मीन सिंह और उनके पति को स्पष्ट करना चाहिए के वे किस राजनीतिक दल से सबद्ध थे।

यास्मीन सिंह ने अपनी नियुक्ति का ठीकरा राज्य सरकार के अधिकारियों पर फोड़ा है.  उनके बयान में यह स्पष्ट है कि भाजपा सरकार के अधिकारियों ने ही उन्हें नियुक्त किया था. विकास तिवारी ने कहा है कि यही तो देखने लायक होगी कि कौन-कौन से अधिकारियों नियुक्ति की थी? किस आधार पर नियुक्ति दी गई थी ? किस योग्यता और क्षमता को ध्यान में रखा गया था ? आपकी पदस्थापना कब-कब और कहां- कहां रही ? आपने अपने दफ्तर को कितना समय दिया और नृत्य कला को कितना समय दिया. सरकारी और सार्वजनिक समारोह में आपको प्रत्येक प्रस्तुति के लिए कितना भुगतान किया गया ? हर बार समारोह में जाने के लिए आपने किस विभाग प्रमुख से अनुमति ली ? जो वेतन 35 हजार था वह अचानक एक लाख कैसे हो गया ?

मुकदमे का स्वागत

प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि सरकार के पास तमाम दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर शिकायत की गई है. जहां तक मुकदमे का सवाल है तो वे उसका स्वागत करते है. वे मुकदमे की धमकी से भयभीत नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसी तरह का राजनीतिक विद्वेष रखती तो आपकी और आपके पति की संपत्ति के मामलों के जांच का आदेश भी जारी कर देती. फिलहाल तो  मामला असंवैधानिक ढंग से की गई है नियुक्ति का है. उन्होंने यास्मीन सिंह से आग्रह किया कि वे दिल्ली छोड़कर छत्तीसगढ़ में रहे और पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ जांच का सामना करें. इधर विकास तिवारी के नए बयान के बाद नृत्यांगना यास्मीन सिंह की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है. अगर उनका कोई पक्ष मिलता है तो उसका प्रकाशन भी किया जाएगा.

 

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नाहर मेडिकल एजेंसी का कारनामा... मल्टी विटामिन सिरप घोटाले में ईओडब्लू ने प्रारंभ की जांच

रायपुर. छत्तीसगढ़ के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने मल्टी विटामिन सिरप घोटाले की जांच प्रारंभ कर दी है. अभी हाल के दिनों में सामाजिक कार्यकर्ता नितिन भंसाली ने राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को दस्तावेजों के साथ शिकायत में आरोप लगाया था कि डायरेक्टर हेल्थ के दबाव के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन ने मल्टी विटामिन सिरप की खरीदी कर धमतरी की नाहर मेडिकल एजेंसी को लगभग 13 करोड़ सात लाख रुपए का लाभ पहुंचाया है. आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने श्री भंसाली को इसी माह 14 मई को बयान देने के लिए बुलाया है.

यह है पूरा मामला

दिनांक 23 फरवरी 2016 को डायरेक्टर हेल्थ ऑफ सर्विसेस ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड को 441 दवाईयों की खरीदी के लिए एक पत्र लिखा था. इस पत्र के आधार पर 11 अगस्त 2016 को आनलाइन टेंडर जारी किया गया, लेकिन थोड़े ही दिनों यह कहा जाने लगा कि टेंडर निकालने में देरी हो गई है इसलिए 23 जरूरी दवाईयां ( ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसवीएस ऑफ इंडिया ) बीपीपीआई के माध्यम से अनुमोदित की दरों पर खरीद ली जाए. इसके बाद डायरेक्टर हेल्थ ने बगैर टेंडर के दवाईयां खरीदने की अनुमति मांगी थी.

मल्टीविटामिन सीरप का चक्कर

डायरेक्टर हेल्थ लगभग पचास लाख अठावन हजार पांच सौ चालीस मल्टीविटामिन बोतल ( प्रत्येक बोतल 100 एमएल ) की खरीदी करना चाहता था, लेकिन छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन ने जानकारी दी कि दवा सप्लायरों के पास 200 एमएल की बोतल ही उपलब्ध है जिसकी कीमत 27 रुपए 64 पैसे हैं. इस बारे में डायरेक्टर हेल्थ और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड के बीच पत्र व्यवहार चलता रहा. डायरेक्टर हेल्थ ने दिनांक 27 मार्च 2017 को एक पत्र के जरिए अवगत कराया कि उसे अब सीरप की जरुरत नहीं होगी. सीरप के बजाय मल्ली विटामिन टेबलेट ( ड्रग कोड डी-63 ) खरीद लिया जाय.... और तब..........

बताते हैं कि डायरेक्टर हेल्थ और मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन के बीच चले पत्र व्यवहार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के एक नजदीक के रिश्तेदार ने दबाव देना प्रारंभ किया.उनके दबाव के बाद अचानक 100 एमएल वाली मल्टीविटामिन वाली सीरप की बोतल भी मिल गई. डायरेक्टर हेल्थ महज पचास लाख अठावन हजार पांच सौ चालीस बोतल चाहता था, लेकिन मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन ने 73 लाख 94 हजार पांच सौ बोतल खरीद ली. इस पूरे मामले का सबसे संदिग्ध पक्ष यह है कि जब डायरेक्टर हेल्थ सीरप चाहता था तो सीरप की बोतल नहीं मिल रही थी और जब डायरेक्टर हेल्थ ने कहा कि चलिए बोतल नहीं मिल रही है तो टेबलेट खरीद लीजिए तब अचानक बोतल मिल गई. डायरेक्टर हेल्थ जितनी संख्या में बोतल चाहता था उससे कहीं ज्यादा संख्या में सीरप की खरीदी हो गई. बताते हैं कि सप्लाई का सारा काम धमतरी की नाहर नाम की एक मेडिकल एजेंसी को दिया गया था. इस एजेंसी को भी 90 दिनों के भीतर सप्लाई करनी थी, लेकिन इस सप्लायर ने 75 दिन देरी से सीरप की सप्लाई की. भंसाली का आरोप है कि बाजार से अधिक दर पर मल्टीविटामिन सीरप की खरीदी कर शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है जबकि नाहर नाम की मेडिकल एजेंसी 13 करोड़ सात रुपए अतिरिक्त भुगतान हासिल करने में सफल रही. खबर है कि इस मामले में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन के प्रमुख रामाराव को कुछ अधिकारियों ने समझाइश दी थी कि वे नियम-कानून से परे जाकर सिरप की खरीदी न करें, लेकिन वे नहीं माने. जिन अफसरों से समझाइश दी थी बाद में उनका तबादला अन्यत्र कर दिया गया.

 

 

 

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