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क्या अमित जोगी पागल हो गए हैं?

क्या अमित जोगी पागल हो गए हैं?

रायपुर. सोशल मीडिया में सक्रिय रहना तो अच्छी बात है, लेकिन छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी की ताबड़तोड़ ढंग की सक्रियता उनके आलोचकों की संख्या में लगातार इजाफा कर रही है.एक बड़ा वर्ग यह मानकर चल रहा है कि वे सरकार के कामकाज और नीतियों पर कम बल्कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निजी तौर पर ज्यादा हमला करते हैं. उनकी पोस्ट और टिव्हट में एक खींझ साफ तौर पर दिखाई देती है.अभी हाल के दिनों में जब सात जुलाई को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की माता जी का निधन हुआ तो उन्होंने कुछ ऐसा टिव्हट किया कि लोग उन पर पिल पड़े.

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश उर्मिल को लिखना पड़ा- अमित का विवादों और खुराफातों से पुराना रिश्ता है. अभी 7 जुलाई को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की माता जी का एक स्थानीय अस्पताल में निधन हो गया. वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं. निधन की सूचना के बावजूद उसी दिन न जाने किस नशे में चूर अमित जोगी ने मुख्यमंत्री श्री बघेल के खिलाफ अनाप-शनाप लिखकर अपने ट्विटर एकाउंट पर पर डाल दिया. विपक्षी भी अमित जोगी के ट्विट-खुराफात पर हैरत में हैं. आखिर किसी नेता-पुत्र, जो स्वयं भी राजनीति में दाखिल है,में ऐसी निकृष्ट सोच, संवेदना-शून्य आचरण और अशिष्टता कहां से आती है? अब अमित जोगी और उनके पिता अजीत जोगी क्षमा-प्रार्थी मूड में दिख रहे हैं.

सोशल मीडिया में क्षमा मांग लेने के बाद तो बात खत्म होनी चाहिए मगर लोग उनके अन्य पोस्ट और टिव्हट की मीमांसा करने में लग गए हैं. राजनीति के जानकार उनके असामान्य व्यवहार पर हतप्रभ है.एक पुराने खांटी नेता का कहना है- पागल होना और पागलपन का शिकार हो जाना... अलग तरह का मसला है. पागलपन से मंजिल तय होती है, लेकिन पागल आदमी दूसरों पर पत्थर फेंकता है या फिर कपड़े फाड़ता है. अमित जोगी एक कुशल राजनीतिज्ञ के बेटे हैं. उन्हें कम से कम अपने पिता से यह तो सीख ही लेना चाहिए कि जीवन में नपे-तुले शब्दों का क्या महत्व होता है?

यह था विवादित टिव्हट 

अमित जोगी ने कहा-  वे सोमवार को बाराद्वार जा रहे हैं, लेकिन भूपेश बघेल अपनी स्वर्गवासी मां को मुखाग्नि देते हुए यह तय कर लें कि या तो वे बाराद्वार की शराब दुकान को बंद कर लें या फिर मुझे ?

 

 

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