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गुटखे का पैसा खाओगे तो परिवार में कैंसर हो जाएगा... और फिर...कहर बनकर टूटी पुलिस

रायपुर. अगर आप सरकारी अफसर है तो आपको अपने मातहतों को ऊर्जा से लबरेज कर सकारात्मक काम लेने का हुनर आना चाहिए. हर जगह अपनी पदस्थापना के दौरान नवाचार के लिए मशहूर रहे पुलिस अफसर हिमांशु गुप्ता ( अब दुर्ग आईजी ) को मालूम था कि अन्य जिलों की तरह  दुर्ग की पुलिस भी गुटखे के कारोबारियों से उपकृत होते रहती है. बस... उन्होंने अपने मातहत पुलिस कर्मचारियों की एक बैठक ली और बेहद संवेदनात्मक ढंग से कहा- क्या आप जानते हैं कि जो कुछ भी हम बुरा करते हैं उसका असर हमारे परिवार पर होता है. याद रखो... अगर गुटखे का पैसा खाओगे तो एक न एक दिन परिवार के किसी न किसी सदस्य को कैंसर हो जाएगा. उनकी यह टिप्पणी एक पंच लाइन थीं और फिर पुलिसकर्मियों ने छापामार कार्रवाई को अंजाम देकर यह साबित कर दिया कि वे अपने परिवार को कैंसर से मुक्त रखना चाहते हैं.

पिछले महीने 29 अप्रैल को गुटखा कारोबारियों को धरपकड़ की सबसे पहली कार्रवाई जेवरा-सिरसा पुलिस ने की. पुलिस को यह सूचना मिल गई थी कि एक पिकअप क्रमांक सीजी 07 बीजी 2279 में पानराज गुटखा भरकर भिलाई ले जाया जा रहा है. पुलिस टीम ने तत्काल अलर्ट होकर घेराबंदी की और पिकअप को पकड़ लिया. जांच के दौरान पिकअप से हरे रंग की आठ बोरियों में छह कट्टा जर्दायुक्त गुटखा मिला. जप्त गुटखे की कीमत तीन लाख 45 हजार छह सौ रुपए आंकी गई है. पुलिस ने इस मामले में पंचम सिंह परिहार, नफीस अहमद, राजेंद्र पंडा,  मोहम्मद बिसमिल्लाह को आरोपी बनाया है, लेकिन खबर है कि ये सारे लोग साजिद खान नाम के व्यक्ति के लिए काम करते हैं. पुलिस ने जेवरा-सिरसा में साजिद खान के गोदाम में भी दबिश देकर लगभग 40 लाख रुपए मूल्य के गुटखे का कच्चा मटेरियल जप्त किया है. यहां यह बताना लाजिमी है कि पूरे प्रदेश में जर्दायुक्त गुटखे के विक्रय में प्रतिबंध है बावजूद हर जगह इसकी बिक्रीधड़ल्ले से होती है. छत्तीसगढ़ की राजधानी में भी गुटखा कारोबारी पुलिस की मिली-भगत से करोड़ों का अवैध व्यापार संचालित कर रहे हैं. फिलहाल तो जर्दायुक्त गुटखा बेचने के नाम पर जहर बेचने वाले कारोबारियों पर जेवरा-पुलिस ने ही शिकंजा कसा है. उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में दुर्ग जिले की पुलिस की तरह सभी थानों की पुलिस गुटखा कारोबारियों पर कहर बनकर टूटेगी.

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बैगा आदिवासी ने डीएम अवस्थी से कहा- कैसे उतार पाऊंगा आपका अहसान

रायपुर. आम जनता के कठिन से कठिन काम को कैसे सरल बनाया जा सकता है इसे अगर सही ढंग से जानना है तो कभी आपको छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक दुर्गेश माधव अवस्थी की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखने- समझने की चेष्टा अवश्य करनी चाहिए. सामान्य तौर पर यह धारणा कायम रही है कि जो कोई भी पुलिस की वर्दी पहन लेता है वह खुद को भीतर से पत्थर का बना लेता हैं, लेकिन पुलिस महानिदेशक अवस्थी इस धारणा को अक्सर तोड़ते रहते हैं. पुलिस परिवार को राहत देने के लिए वे हर सप्ताह अपने दफ्तर में समस्या निवारण शिविर लगाते हैं. इस शिविर में अब तक हजारों लोगों को राहत मिल चुकी है. इसके अलावा वे हर रोज आमजन से मुलाकात करते हैं और उनकी समस्याओं का तुरन्त निराकरण भी करते हैं. अगर कोई सही है तो उनसे मिलना बेहद आसान है, लेकिन अगर कोई गलत है तो फिर उनसे मिलने में मुसीबत खड़ी हो सकती है. वैसे उनके पुलिस महानिदेशक बनने से लिखने-पढ़ने वालों के अलावा समाज का एक बड़ा वर्ग बेहद खुश भी है. उनके पहले जितने भी पुलिस महानिदेशक हुए उन सबने खुद को जनता से काट लिया था. एक पुलिस महानिदेशक तो मिलने-जुलने वालों के सामने ही सिगरेट पर सिगरेट फूंकते रहते थे. आधी जनता तो कैंसर होने के भय से ही भाग जाती थीं. एक पुलिस महानिदेशक छोटा सा चवन्नी छाप मोबाइल लेकर घूमते थे और केवल रमन सिंह और उनके रिश्तेदारों का ही फोन अटैंड करते थे. फिर चाहे कोई भी फोन लगाए... घंटी बजती रहती है और सबको सुनना पड़ता था- ओम जय जगदीश हरे... स्वामी जय जगदीश हरे.

बहरहाल इस खबर में डीएम अवस्थी का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि अभी हाल के दिनों में उन्होंने बैंगलोर में पदस्थ एक पत्रकार मंजू साईनाथ की सूचना के बाद जो कार्रवाई की हैं उसकी चौतरफा प्रशंसा हो रही है. मंजू साईनाथ ने उन्हें फोन पर अवगत कराया कि मध्यप्रदेश के शहडोल के रहने वाले बैगा आदिवासी केशव प्रसाद की पत्नी का सेक्टर 9 भिलाई में देहांत हो गया है. केशव की पत्नी बर्न यूनिट में भर्ती थी और केशव अपनी प्रापर्टी बेचकर उसकी चिकित्सा करवा रहा था. मंजू साईनाथ ने जानकारी दी कि पैसों की तंगी की वजह से केशव जैसे-तैसे इलाज करवा रहा था, लेकिन अब 80 हजार रुपयों का भुगतान करने में उसे दिक्कत पेश आ रही है. पुलिस महानिदेशक ने इस सूचना के बाद तुरन्त आईजी दुर्ग रेंज हिमांशु गुप्ता से संपर्क किया और सेक्टर 9 अस्पताल प्रबंधन से मानवीय आधार पर बात करने का आग्रह किया. दुर्ग आईजी गुप्ता भी मानवीय कामों के लिए अग्रणी रहते हैं सो उन्होंने भी तत्काल प्रबंधन को बकाया राशि माफ करने का अनुरोध किया. अस्पताल प्रबंधन ने सारी औपचारिकताएं पूरी की और जल्द ही रिजनों को शव सौंप दिया गया. इस पूरी कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग रोहित झा और निरीक्षक प्रमिला मंडावी ने भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई. इस मानवतापूर्ण कार्रवाई के लिए बैगा आदिवासी केशव प्रसाद और उसके परिवार ने पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी के प्रति आभार जताया है. 

हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी

जिसको भी देखना कई बार देखना

हार और जीत तो मुकद्दर की बात है

टूटी है किसके हाथ में तलवार देखना

 

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मुंह खोलेगी.. वो बोलेगी... तभी जमाना बदलेगा

बिलासपुर. चार मार्च को छत्तीसगढ़ की न्यायधानी में अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए युवतियों और महिलाओं ने एक जबरदस्त मार्च निकालकर अपना प्रतिवाद दर्ज किया. यह मार्च मिनी माता चौक, तालापारा से होते हुए मगरपारा पहुंचा. इस दौरान महिलाओं ने जमकर नारेबाजी की और जनगीत गाकर मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश जताया. कार्यक्रम की संयोजक प्रियंका शुक्ला ने बताया कि घृणा और हिंसा से भरे वर्तमान सरकार की नीति सबसे ज्यादा महिलाओं के अधिकारों का हनन कर रही है.उन्होंने कहा कि फासी और मनुवादी ताक़तों में बढ़ोतरी की वजह से दलित, ईसाईयों, मुस्लिमों और अल्पसंख्यकों पर हमले तेज हुए हैं. हर नागरिक असुरक्षित है. जाहिर सी बात है महिलाएं भी अछूती नहीं है. इस दौरान महिलाओं ने बराबरी का अधिकार दिए जाने को लेकर आवाज बुलंद की.  

मार्च में अधिवक्ता रजनी सोरेन, साहित्यकार सत्यभामा अवस्थी, सविता गंधर्व, रिजवाना, रुखसार, सम्पा, सरिता सबिया, आशा साहू, प्रियंका, सिम्पल रजक, ज्योति, कुलबीर सतपथी, राधा श्रीवास सहित सैकड़ों महिलाएं, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे. मार्च में महिला अधिकार मंच, ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन, पीयूसीएल, जगलग, आम आदमी पार्टी, छत्तीसगढ़, वसुधा महिला समिति, इप्टा बिलासपुर, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन, एचआरएलएन, जन स्वास्थ्य अभियान, जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ सहित अन्य कई महत्वपूर्ण संगठन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.

 

 

 

 

 

 

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डोंट वान्ट मोदी... नहीं मांगता है अपुन को नहीं मांगता मोदी

 इस गाने को नाट्य संस्था कोरस भिलाई के साथी जय प्रकाश नायर, संतोष बंजारा, जावेद और अमित के साथ मिलकर गाया है. ईयरफोन लगाकर सुनिए यह गीत... शायद आपको अच्छा लगे. गाना सुनने के लिए नीचे दिए गए वीडियो पर क्लिक करें.

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शंकरलाल का जीवन बचाने आगे आया मसीही समाज

रायपुर. छत्तीसगढ़ क्रिश्चयन फोरम के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पन्नालाल की अगुवाई में मंगलवार को एक प्रतिनिधि मंडल  ने पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी से मुलाकात की. फोरम के सदस्यों ने बताया कि जिला जांजगीर चांपा की तहसील नवागढ़ के ग्राम गोधना के रहने वाले 40 वर्षीय शंकरलाल साहू ने तीन साल पहले विधिवत तरीके से धर्म परिवर्तन कर लिया था, लेकिन इसके बाद उसके चचेरे भाइयों ने उसे प्रताड़ित करना प्रारंभ कर दिया. फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने कहा कि शंकरलाल के घर के सामने बाधा खड़ी कर दी गई है. इतना ही नहीं चचेरे भाई उसे न तो खेती करने देते हैं और न ही हैंडपंप से पानी निकालने देते हैं. आए दिन उसके परिवार के साथ मारपीट की जा रही है. उन्होंने बताया कि शंकरलाल अपने साथ हुई ज्यादती की शिकायत थाने में करता रहा है, लेकिन उचित कार्रवाई के अभाव में उसे और उसके परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है. फोरम के सदस्यों ने पुलिस प्रमुख को एक-दो अन्य घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि समाज से बहिष्कृत व्यक्ति समय पर न्याय नहीं मिल पाने की दशा में खुद को अपमानित महसूस करते हुए घातक कदम उठा लेता है. पुलिस महानिदेशक ने प्रतिनिधि मंडल को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने सभी पक्षों को बुलाकर सामाजिक बैठक की जाएगी और समस्या का हल ढूंढ लिया जाएगा.

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शराबबंदी के लिए गठित होने वाले अध्ययनदल में ममता शर्मा को शामिल करने की मांग

रायपुर.छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार शराब बंदी के पक्ष में हैं, लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला होगा सो समाज के सभी वर्गों से सलाह-मश्विरा बेहद अनिवार्य है.अभी हाल के दिनों में नशामुक्ति अभियान के सदस्यों ने जब मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री से मुलाकात की तो उन्होंने आश्वस्त किया कि  शराबबंदी अवश्य होगी, लेकिन यह भी देखना होगा कि बंद के बाद घर पहुंच सेवा प्रारंभ न हो जाए. प्रतिनिधि मंडल में शामिल अभिषेक सिंह, ब्यास मुनि, कन्हैया अग्रवाल, रफीक सिद्दकी, मोहम्मद आरिफ, पकंज दास सहित अन्य सदस्यों ने मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री से यह आग्रह भी किया कि अभियान की प्रदेश संयोजक ममता शर्मा ने शराब बंदी के मसले पर काफी काम किया है सो उन्हें अध्ययनदल में अवश्य शामिल करें.मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि उनकी सरकार सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर आगे बढ़ना चाहती है सो योग्य और क्षमतावान लोगों को सुझाव के लिए अवसर प्रदान किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने इस बारे में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए.सदस्यों ने शराब बंदी करने वाले राज्यों के अध्ययन, नशामुक्ति के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक संस्थाओं को शामिल करने के अलावा अस्पतालों में हेल्प डेस्क स्थापित करने की मांग भी की. सदस्यों का कहना था कि बिहार में शराब को लेकर सख्त कानून है. अगर कानून कठोर होगा तो अन्य नशीले पदार्थों की रोकथाम भी हो सकेगी.

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भाजपा के प्रतिशोध का शिकार हुए प्रगतिशील कृषक राजाराम

राजेश ( संपादक कल्ट करंट )

अगर फुरसत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना

हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है.

देश के प्रसिद्ध शायर बशीर भद्र का यह शेर आज सत्तासीनों को थोड़ी करवट बदलकर जमीनी हकीकत से रू-ब-रू होने को कहता है. आमतौर पर देखा गया है कि सत्ता में आने के बाद सत्ताधारी दल जनता के लिए जनपक्षीय नहीं रह जाते हैं. अभी हाल में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकारें बनी, लेकिन क्या व्यवस्था में कोई नयापन आएगा यह देखना अभी बाकी है.

दरअसल, सत्ता का उदासीन रवैया देखना हो तो उदाहरणों की कमी नहीं है. अविभाजित मध्य प्रदेश की सरकारी पत्रिका उद्यमिता समाचार का प्रकाशन उद्योग विभाग करता था. वर्ष 2000 के अंक में मुखपृष्ठ पर देश के सर्वश्रेष्ठ हर्बल किसान के रूप में डॉ राजाराम त्रिपाठी का फोटो छपा था तथा पूरी आवरण कथा उन पर ही केंद्रित थी. इसी क्रम में केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय की पत्रिका साइंस टेक इंटरप्रेन्योर ने भी अपने मुखपृष्ठ पर लिखा था कि देश का सर्वश्रेष्ठ हर्बल फार्म बस्तर में आकार ले रहा है. वर्ष 2001 में मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ बना. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी और अजीत जोगी मुख्यमंत्री बने तब उन्हें बस्तर के किसान डॉ राजाराम त्रिपाठी के बारे में पता चला कि उन्होंने बैंक अधिकारी की नौकरी छोड़कर खेती में सफलताएं हासिल की है. उनकी इस सफलता को जानने के लिए जोगी स्वयं डॉ त्रिपाठी के कोंडागांव स्थित फार्म आए. उनके कार्य ,माडल को जमीन पर देखा और समझा तथा प्रदेश को हर्बल स्टेट घोषित किया. कुछ समय बाद राज्यपाल भी फार्म पर पहुंचे. धीरे-धीरे मंत्री अधिकारी सभी उनकी खेती के तौर-तरीकों को देखने समझने लिए कोंडागांव आने लगे.

 

जमकर चला राजनीतिक प्रतिशोध

राजनेताओं के आवागमन का परिणाम यह हुआ यह कि बीएससी,एल एल बी, हिंदी साहित्य, अंग्रेजी भाषा, इतिहास तथा अर्थशास्त्र सहित चार विषयों में एम ए तथा पीएचडी डाक्टरेट  की सर्वोच्च उपाधियों से विभूषित, प्रदेश के  सबसे ज्यादा शिक्षित किसान राजाराम त्रिपाठी को प्रगतिशील उच्च शिक्षित किसान का प्रदेश का चेहरा माना जाने लगा. राज्य बनने के लगभग डेढ़ साल बाद ही चुनाव हुए, भाजपा सत्ता में आई तब से लगातार 15 वर्षों तक राज्य में भाजपा का शासन रहा. लेकिन सत्ता में आते ही भाजपा राजनीतिक प्रतिशोध के अपने एजेंडे पर चल निकली. हांलाकि डॉ त्रिपाठी कभी किसी राजनीतिक दल के ना तो कभी सदस्य रहे हैं और ना ही किसी राजनीतिक दल से उनका कभी कोई सीधा जुड़ाव रहा है, लेकिन सत्ता में आई भाजपा उन्हें कांग्रेस समर्थक मानते हुए लगातार उपेक्षित और प्रताड़ित करती रही. न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि पूरे देश में कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए कम दर पर बिजली का कनेक्शन किसानों को दिया जाता है, लेकिन डॉ त्रिपाठी को राजनीतिक साजिश के तहत कमर्शियल बिजली कनेक्शन दिया गया और और बढ़ा-चढ़ा कर बिल आरोपित किया गया. बाद में बिजली का कनेक्शन भी काट दिया गया. अंततः न्यायालय की शरण लेने के बाद डॉ त्रिपाठी को राहत मिली. डाक्टर त्रिपाठी कोंडागांव में हर्बल उत्पाद से औषधि बनाने के लिए एक कारखाना स्थापित करना चाहते थे, लेकिन टालमटोल करते हुए बिजली विभाग ने तीन वर्ष तक बिजली का कनेक्शन नहीं दिया, जिसकी वजह से कारखाना अपने निर्धारित समय में पूरा नहीं हो सका और व्यवसाय प्रारंभ होने के पूर्व ही समाप्त हो गया. तीन साल की टालमटाल के बाद जब कनेक्शन मिला तो कारखाना शुरु करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई तो श्रम कानून के विभिन्न पेंचों में फंसा कर कई तरह के मुकदमें दर्ज कर दिए गए.

झूठे मुकदमों की बाढ़

केंद्र में भाजपा के शासन में आने के तत्काल बाद डॉ. त्रिपाठी और उनके परिवार के सदस्यों पर दर्जनों झूठे आयकर के मुकदमें दर्ज कर दिये गये. हालांकि सभी शत-प्रतिशत मुकदमों में उन्हें ससम्मान जीत मिली और आयकर विभाग को हार का सामना करना पड़ा यहां तक कि न्यायालय ने अपने फैसलों में संबंधित आयकर अधिकारियों के विरुद्ध टीप भी लिखा। इस दौरान डॉ राजाराम त्रिपाठी जैविक खेती और औषधिय खेती के विशेषज्ञ के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके थे. देश के राष्ट्रपति एपीजे कलाम साहब भी उनके फार्म पर आए व पीठ ठोंकी, फिर राष्ट्रपति भवन भी बुलाया. देश के विभिन्न हिस्सों में तथा दुनिया के 34  देशों में डॉ त्रिपाठी ने अपनी विशेषज्ञता से कृषि को लाभान्वित करने के प्रयास में लगे रहे. लेकिन पिछले 15 वर्षों में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सैकड़ों आयोजन जैविक खेती, उन्नत कृषि, पर्यावरण संरक्षण तथा आयुर्वेदिक उत्पाद आदि पर किए गए लेकिन किसी भी आयोजनों में इस अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ को आमंत्रित नहीं किया गया. इतना ही नहीं जिला स्तरीय सेमिनार ,वर्कशॉप आदि  में भी इन्हें बुलाने से भरसक परहेज किया गया. राजनीतिक भेदभाव और प्रताड़ना का ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है. किसी राजनीतिक दल तथा सक्रिय राजनीति से  न जुड़े होने के बावजूद इन्हें हर स्तर पर कांग्रेस समर्थक ही माना जाता रहा, लेकिन अब जब कि राज्य में कांग्रेस पुनः सत्ता में लौटी है, तो ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेसी सरकार डॉ राजाराम त्रिपाठी की विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश के कृषि के उत्थान के लिए करेगी तथा उन्हें उनका सम्मान दिलाएगी. चुनाव के दौरान कांग्रेस ने किसानों की कर्ज माफी की घोषणा की थी, लेकिन यह सभी जानते हैं कि किसानों की समस्याओं का समाधान कर्ज माफी नहीं है. उन्हें समस्याओं के दुष्चक्र से निकालने के लिए उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की आवश्यकता है और यह स्वावलंबन डॉ त्रिपाठी के कृषि मॉडल से आ सकता है. डॉ त्रिपाठी के द्वारा विकसित किए गए उच्च मूल्य, उच्च गुणवत्ता की चयनित फसलें, न्यूनतम कृषि लागत, खेतों पर ही प्राथमिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तदुपरांत न्यूनतम लागत पर प्रभावी विपणन तथा वितरण नेटवर्क इनके सफल प्रायोगिक  मॉडल में  सन्निहित हैं.

कौन हैं राजाराम

एक ऐसा व्यक्तित्व जिसे भारत का हरित योद्धा कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा. दरअसल,  डॉ त्रिपाठी ने भारतीय कृषि की बनी बनाई लीक तोड़ी है और वैज्ञानिक तत्व निहित खेती को परिभाषित किया है. उन्होंने विलुप्त हो रही जड़ी-बुटियों के संरक्षण के लिए न केवल महत्वपूर्ण कार्य किया है बल्कि इसके लिए उन्होंने इथिनो मेडिको गार्डेन के रूप में हर्बल फारेस्ट भी विकसित किया है, जहां इन विलुप्त होती प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ के अति पिछड़े व अतिसंवेदनशील क्षेत्र के रूप में बस्तर को जाना जाता है, वहीं डॉ त्रिपाठी जन्मे और पले बढ़े.  इस पिछड़े इलाके में उन्होंने वहां उम्मीद की एक नई पौध का रोपण किया है और वहां के 400 से अधिक आदिवासी परिवार मां दंतेश्वरी हर्बल समूह ( www.mdhherbals.com) के साथ हर्बल फार्मिंग से जुड़ कर न केवल अपनी आजीविका चला रहे हैं बल्कि भारत की विरासती जड़ी-बुटियों को संजो रहे हैं इसके अलावा सेंट्रल हर्बल एग्रो मार्केटिंग फेडरेशन (CHAMF www.chamf.org) के माध्यम से देश के 50 हजार से अधिक आर्गेनिक फार्मर्स डॉ त्रिपाठी के इस अभियान में कदम ताल कर रहे हैं.बी.एससी,  एलएलबी , हिंदी साहित्य, अंग्रेजी साहित्य, इतिहास, अर्थशास्त्र सहित चार विषयों में एम. ए.तथा दो विषयों में डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त डॉ त्रिपाठी को  देश का सबसे ज्यादा शिक्षा प्राप्त किसान माना जाता है. अभी हाल ही में डा. त्रिपाठी को  देश के ४५ किसान संगठनों के  महासंघ अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा )  का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है। डॉ त्रिपाठी के नेतृत्व में मां दंतेश्वरी हर्बल  को देश का पहला आर्गेनिक (जैविक) सर्टिफाइड उत्पाद बनाने वाली कंपनी के रूप में 18 साल पहले वर्ष 2000 में मान्यता मिली. दो दशकों से  वे अपने उत्पादों का यूरो,अमेरिका सहित कई देशों में निर्यात भी कर रहे हैं और वहां इसे काफी पसंद भी किया जा रहा है. उन्हें  बेस्ट एक्सपोर्टर का अवार्ड भी मिल चुका है. अभी हाल में ही भारत सरकार के सबसे बड़े कृषि क्षेत्र के संगठन सी .एस .आई. आर. CSIR के साथ करार कर स्टिविया की खेती और  इससे  कड़वाहट रहित स्टिविया की शक्कर बनाने के लिए कारखाना लगाने के लिए २- दो   करार किया है।  उल्लेखनीय है हर्बल या आर्गेनिक व्यवसाय से जुड़ी देश की बड़ी कंपनियां जंगली जड़ी-बुटियों का भारी मात्रा में दोहन तो कर रही हैं लेकिन उनके संरक्षण की दिशा में उनका योगदान नगण्य है, इसकी वजह से जुड़ी बुटियों की ढेर सारी प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है. ऐसी विलुप्त हो रही जुड़ी-बुटियों को संरक्षित करने का महती कार्य वे कर रहे हैं. उनके इन योगदान को देखते हुए उन्हें की अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार जिनमें ग्रीन वारियर भी शामिल हैं, से नवाजा गया हैं.अब तक देश-विदेश से उन्हें 150 से अधिक अवार्ड मिले हैं.

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अब यूपी में दंगाई भीड़ को भी मुआवजा !

अंबरीश कुमार 
लखनऊ .अब यूपी में दंगाई भीड़ को भी मुआवजा देने की शुरुआत हो गई है .यह भाजपा की सुशासन वाली सरकार का काम है . उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सांप्रदायिक भीड़ एक पुलिस अफसर की हत्या कर देती है .हत्या में जो नामजद होते हैं वे संघ परिवार से जुड़े बजरंग दल के लोग हैं .भीड़ ने किस तरह हत्या की यह वीडियो भी वायरल होता है .सभी हत्यारों के नाम पता भी पुलिस के पास है .पर इस घटना के बाद सूबे के मुख्यमंत्री पुलिस अफसरों के साथ जो बैठक करते हैं लगता है बजरंग दल ने बुलाई है .पुलिस अफसर की हत्या हुई और बैठक की सरकारी प्रेस रिलीज पूरी तरह बजरंग दल को समर्पित नजर आई .पुलिस अफसर की हत्या पर दो शब्द नहीं और गाय के नाम पर हत्यारी भीड़ का नेतृत्व कर रहे को मुआवजा .यह किस तरह का सुशासन उत्तर प्रदेश में भाजपा ला रही है .भाजपा के और भी मुख्यमंत्री हुए हैं .कल्याण सिंह से लेकर राजनाथ सिंह तक .कभी पुलिस अफसर पर हमला करने वाले के सामने कोई सरकार इस तरह नतमस्तक नहीं हुई है .एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर ने मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के दौर की एक घटना का हवाला देते हुए लिखा है कि कैसे उन्हें मुख्यमंत्री ने पार्टी के करीबी बदमाश पर कार्यवाई की पूरी छूट दी .और एक सरकार यह है .जिसने दंगाई भीड़ को भी मुआवजा दे दिया है.यह एक ऐतिहासिक घटना है .इसका असर दूरगामी पड़ेगा .इस घटना से भाजपा के सुशासन के दावे की धज्जियां उड़ गई हैं .
शहरी मध्य वर्ग भाजपा का समर्थन तो करता है पर बवाल फसाद के साथ नहीं खड़ा होता .मुलायम सिंह यादव से शहरी मध्य वर्ग की बड़ी खुन्नस उनके लाठी वाले समर्थकों से थी .वे आज भी मुलायम सिंह वाली समाजवादी पार्टी को गुंडों की ही पार्टी मानते हैं .वीपी सिंह
ने ब दादरी को लेकर अभियान छेड़ा तो किसान उत्पीडन के साथ मुलायम सिंह यादव की इसी लाठी वाली छवि को मध्य वर्ग के बीच पहुंचा दिया .राज बब्बर ने देवरिया से दादरी तक की जो यात्रा कुशीनगर से शुरू की उस सभा का मुख्य नारा था , जिस गाड़ी पर सपा का झंडा ,उस गाड़ी में बैठा गुंडा .यह वही दौर थाएक लोहिया के नाती ने कैसरबाग में पुलिस इन्स्पेक्टर को बोनट पर टांग कर घुमाया था .ऐसी ही बहुत सी घटनाएं हुई और मुलायम सिंह सत्ता से बेदखल हो गए .शहरी मध्य वर्ग का बड़ा हिस्सा भाजपाई हो गया है पर 
कभी अपने बेटे बेटी को हुडदंगी या बजरंगी नहीं बनाना चाहता .वह तो खुद के लिए एक सुरक्षित समाज चाहता है .वह अयोध्या में मंदिर चाहता था और वोट भी दिया .पर दंगा फसाद नहीं चाहता .मुझे याद है यूपी विधान सभा का दो हजार बारह का चुनाव प्रचार जब अखिलेश यादव आगे बढ़ रहे थे और मीडिया उन्हें ख़बरों से बाहर किये था .एक वरिष्ठ पत्रकार ने तब कहा था ,अब भाजपाई चाहे जो कटवा दे ये इस बार सत्ता से बहुत दूर हैं . साफ़ कहना था कि मवेशी कटवाने से हर बार सरकार बना लें यह संभव नहीं है .बुलंदशहर में जो हुआ उसकी खोजबीन अभी हो रही है .पर यह साफ़ है कि साजिश दंगा कराने की थी .वह नाकाम रही .इस घटना से बड़ा हिंदू समाज भी डर गया है .ये किस भीड़ का समर्थन किया जा रहा है जो एक हिंदू पुलिस अफसर को दौड़ा का मार डालती है .और आप इस दंगाई भीड़ के साथ खड़े हो गए हैं .उन्हें मुआवजा दे रहे है .क्या उस पुलिस अफसर की बीबी ,बहन और बेटे की बात सुनी .सुन लीजिये यह भी एक हिंदू परिवार की आवाज है .

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क्यों होता है डायबिटीज, मधुमेह के प्रकार और ब्लड शुगर लेवल को कम करने के घरेलू नुस्खे

मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes ) मेटाबोलिक बीमारियों का एक समूह है, जिसमें खून में ग्लूकोज या ब्लड शुगर (Blood sugar level) का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है. ऐसा तब होता है, जब शरीर में इंसुलिन (Insulin) ठीक से न बने या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन (Insulin) के लिए ठीक से प्रतिक्रिया न दें. जिन मरीजों का ब्लड शुगर (Blood sugar level) सामान्य से अधिक होता है वे अक्सर पॉलीयूरिया (बार बार पेशाब आना) से परेशान रहते हैं. उन्हें प्यास (पॉलीडिप्सिया) और भूख (पॉलिफेजिया) ज्यादा लगती है. 


कि‍तनी तरह की होती है डायबि‍टीज (Types of Diabetes in Hindi) 
टाइप-1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) में शरीर में इंसुलिन नहीं बनता. मधुमेह के तकरीबन 10 फीसदी मामले इसी प्रकार के होते हैं. जबकि टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) में शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता. दुनिया भर में मधुमेह के 90 फीसदी मामले इसी प्रकार के हैं. मधुमेह का तीसरा प्रकार है गैस्टेशनल मधुमेह, जो गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होता है. 

कैसे करें डायब‍िटीज को कंट्रोल (Manage Your Diabetes) 
उचित व्यायाम, आहार और शरीर के वजन पर नियन्त्रण बनाए रखकर मधुमेह को नियन्त्रित रखा जा सकता है. अगर मधुमेह पर ठीक से नियन्त्रण न रखा जाए तो मरीज में दिल, गुर्दे, आंखें, पैर एवं तंत्रिका संबंधी कई तरह की बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है.

मधुमेह या डायब‍िटीज के कारण (Diabetes: Causes and Prevention)

1. जीवनशैली : गतिहीन जीवनशैली, अधिक मात्रा में जंक फूड, फिजी पेय पदार्थो का सेवन और खाने-पीने की गलत आदतें मधुमेह का कारण बन सकती हैं. घंटों तक लगातार बैठे रहने से भी मधुमेह की संभावना बढ़ती है.

2. सामान्य से अधिक वजन, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता : अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय न हो अथवा मोटापे का शिकार हो, उसका वजन सामान्य से अधिक हो तो भी मधुमेह की सम्भावना बढ़ जाती है. ज्यादा वजन इंसुलिन के निर्माण में बाधा पैदा करता है. शरीर में वसा की लोकेशन भी इसे प्रभावित करती है. पेट पर अधिक वसा का जमाव होने से इंसुलिन उत्पादन में बाधा आती है, जिसका परिणाम टाइप 2 डायबिटीज, दिल एवं रक्त वाहिकाओं की बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है. ऐसे में व्यक्ति को अपने बीएमआई (शरीर वजन सूचकांक) पर निगरानी बनाए रखते हुए अपने वजन पर नियन्त्रण रखना चाहिए. 

3. जीन एवं पारिवारिक इतिहास : कुछ विशेष जीन मधुमेह की सम्भावना बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों के परिवार में मधुमेह का इतिहास होता है, उनमें इस रोग की सम्भावना अधिक होती है.

मधुमेह या डायब‍िटीज से ऐसे बचें :  (Diabetes Prevention)

1. नियमित व्यायाम करें : गतिहीन जीवनशैली मधुमेह के मुख्य कारणों में से एक है. रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम मधुमेह से बचने के लिए आवश्यक है. 

2. संतुलित आहार : सही समय पर सही आहार जैसे फलों, सब्जियों और अनाज का सेवन बेहद फायदेमंद है. लम्बे समय तक खाली पेट न रहें. 

3. वजन पर नियन्त्रण रखें : उचित आहार और नियमित व्यायाम द्वारा वजन पर नियंत्रण रखें. कम वजन और उचित आहार से डायबिटीज के लक्षणों को ठीक कर सकते हैं.

4. पर्याप्त नींद : रोजना सात-आठ घंटे की नींद महत्वपूर्ण है. नींद के दौरान हमारा शरीर विषैले पदार्थों को बाहर निकाल कर शरीर में टूट-फूट की मरम्मत करता है. देर रात तक जागने और सुबह देर तक सोने से मधुमेह और उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ती है. 

5. तनाव से बचें : तनाव आज हर किसी के जीवन का जरूरी हिस्सा बन गया है. मनोरंजक एवं सामाजिक गतिविधियों द्वारा अपने आप को तनाव से दूर रखने की कोशिश करें. साथ ही तनाव के दौरान सिगरेट का सेवन करने से मधुमेह की सम्भावना और अधिक बढ़ जाती है.
 

डायब‍िटीज से बचने के घरेलु उपाय या नुस्खे (Remedies To Manage Your Sugar Levels) :

1. तुलसी से कंट्रोल करें डायबिटीज 

तुलसी की पत्त‍ियों में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं. तुलसी पैंक्रियाटिक बीटा सेल्स बनाने मे मदद करती है जो इंसुलिन के प्रति सक्रिय बनाती हैं. ये इंसुलिन के स्त्राव को बढ़ाते हैं. तो अगर आप खाली पेट तुलसी की पत्ती चबाएंगे तो यह यकीनन फायदेमंद होगा. 
 

2. जामुन से कंट्रोल करें डायबिटीज 

जामुन के बीज भी डायबिटीज को नि‍यंत्रि‍त करने में मददगार हैं. जामुन के बीजों को सुखा कर इन्हें पीस लें और पाउडर बना कर खाली पेट हल्के गर्म पानी के साथ लेने से डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद मिलती है.
3. दालचीनी से कंट्रोल करें डायबिटीज

हर भारतीय रसोई में दालचीनी म‍िल ही जाती है. स्वाद और सुगंध के साथ ही दालचीनी सेहत के लि‍ए भी बड़ी कारगर है. दालचीनी इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ा कर ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करती है. तो दालचीनी को पीसकर उसे हल्के गर्म पानी के साथ लें. लेकि‍न इसकी मात्रा का ध्यान रखें यह ज्यादा मात्रा में लेने पर नुकसान भी दे सकती है. 
 4. सहजन से कंट्रोल करें डायबिटीज 

सहजन की पत्त‍ियां भी डायबिटीज को कंट्रोल करने में कारगर हैं. इनका रस न‍िकाल कर खाली पेट पीने की सलाह दी जाती है. इससे शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है

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जाने अंडा खाने का सही तरीका, ये लोंग बरते सावधानी

नई दिल्ली : अंडा अगर आपकी सेहत बना सकता है तो बिना जानकारी के इसका सेवन आपकी सेहत बिगाड़ भी सकता है। यदि आपको ये सुनकर मजाक लग रहा है तो इसको हल्‍के में न लें। आपको बता दें कि रोजाना ज्यादा अंडे खाने से ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकता है और हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। रोजाना ज्यादा मात्रा में अंडे खाने से इनमें मौजूद उच्च कैलोरी वजन बढ़ा सकती हैं। इसलिए अपने नाश्ते में अंडे को शामिल करने से पहले इनके फायदे व नुकसान के बारे में जान लीजिए।

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अब दुबई पुलिस करेगी उड़ने वाली बाइक का इस्तेमाल

दुबईः दुबई पुलिस अब उड़ने वाली बाइक इस्तेमाल करने की तैयारी में है। इसके लिए ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है। इस  होवरबाइक Hoversurf S3 को इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) कहा जाता है । ग्राउंड के ऊपर उड़ सकने वाली इस बाइक की कामत जान कर हैरान रह जाएंगे। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक दुबई पुलिस ने दो क्रू को यह बाइक चलाने की ट्रेनिंग दे रही है। इस बाइक को लेकर सोशल मीडिया पर अभा से चर्चा तेज हो गई है। 

इस बाइक  को ऐसी जगह यूज किया जाएगा जहां पुलिस के लिए पहुंचना मुश्किल होता है। फिलहाल एक ही होवराइबक है और इसे 2020 तक इस्तेमाल में लाया जा सकता है। Hoversurf कंपनी का दावा है कि अगर दुबई पुलिस इसे ऑर्डर करेगी तो 40 होवरबाइक तैयार की जा सकती हैं। इस होवरबाइक की कीमत 150,000 डॉलर (लगभग 1.8 करोड़ रुपए) रखी गई है।  इसे कार्बन फाइबर से बनाया गया है और इसका वजन 253 किलोग्राम है।वर्टिकली टेक ऑफ के लिए इसमें इसमें 4 रोटर्स लगाए गए हैं। कंपनी के मुताबिक यह ग्राउंड से 16 फुट तक उड़ सकती है। 

कंपनी का दावा है कि यह होवरबाइक 96 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकती है। हालांकि यह एक पायलट के साथ सिर्फ 10-25 मिनट तक ही हवा में रह सकती है। इस होवरबाइक में एक दूसरा ड्रोन ऑप्शन भी है जिसे एनेबल करके इसे बिना पायलट के भी उड़ाया जा सकता है। बिना पायलट के यह 40 मिनट तक लगातार उड़ सकती है। दुबई पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट के डायरेक्टर जनरल ब्रिगेडियर खालिद नसीर ने कहा है कि eVTOL को मुश्किल जगहों पर सबसे पहले पहुंचने के लिए यूज किया जाएगा और इसे 2020 से यूज में लाया जाएगा। 

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बीसीसीआई कार्यकारी सचिव मिताली विवाद में कूदे

मुंबई: टी20 महिला विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ मिताली राज को ड्रॉप किए जाने के बाद पैदा विवाद बड़ा रूप तो ले रही है, वहीं अब इसके अलग-अलग 'रंग' देखने को मिल रहे हैं. जहां मिताली राज ने बीसीसीआई सीईओ राहुल जौहरी को कोच रमेश पोवार पर निशाना साधते हुए करीब दो हजार शब्दों का ई-मेल लिखा, तो अब कोच पोवार के बोर्ड को भेजी दस पेज की रिपोर्ट के पलटवार के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है. इसी बीच इस मामले में बोर्ड के कार्यकारी अमिताभ चौधरी (Bcci acting secretary puts step in to Mithali Raj controversy) ने कूद पड़े हैं. कुल मिलाकर बीसीसीआई के लिए मिताली राज विवाद गले की फांस बनता जा रहा है. और किसी को कुछ समझ में नहीं रहा है कि यह विवाद और इसका समाधान कहां जाकर रुकेगा. 

काफी दिन की चुप्पी के बाद बुधवार को महान सुनील गावस्कर ने पहले बार मामले पर मुंह खोलते हुए मिताली के प्रति हुए बर्ताव को गलत बताते हुए अफसोस जाहिर किया था, लेकिन अब रमेश पोवार की दस पेज की रिपोर्ट के बाद बीसीसीआई की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है. बोर्ड के आला अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है, लेकिन कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी ने राहुल जौहरी और सबा करीब पर सवाल खड़े कर दिए हैं.  अमिताभ चौधरी ने कहा कि मैं इस मामले में लगातार आ रही मीडिया रिपोर्ट से बहुत ही ज्यादा स्तब्ध हूं. चौधरी ने कहा कि हैरानी इस बात की है मिताली का लिखा ई-मेल कैसे मीडिया में लीक हो गया. चौधरी ने लीक मसले पर ही जौहरी और सबा करीम से सफाई मांगी है कि ई-मेल आखिरी कैसे लीक हो गया. चौधरी ने कहा कि मुझे नहीं मालूम कि ई-मेल किसे लिखा गया था. हालांकि, यह सच है कि इस पर साइन करने वाला शख्स राष्ट्रीय महिला सेलेक्शन कमेटी का संयोजक है. और इस शख्स को मेल की कॉपी को तुरंत ही मुझे भी भेजना चाहिए था. 

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एयरटेल को जियो का झटका, उठाना पड़ेगा 100 करोड़ का नुक्सान

नई दिल्लीः जियो के आने से दूरसंचार कंपनियों को बहुत नुक्सान हुआ है। इसी के चलते अब एयरटेल को जियो ने करारा झटका दिया है। रिलायंस जियो इन्फोकॉम नये साल यानी एक जनवरी से दूरसंचार क्षेत्र के सबसे पसंदीदा उपभोक्ता रेलवे को सेवाएं देगी। इससे पहले ये सेवाएं एेयरटल देती थी जिसके लिए रेलवे भारती एयरटेल को सालाना 100 करोड़ रुपये का बिल चुकाती थी।  अधिकारियों का कहना है कि जियो के इस्ते रेलवे के फोन बिल में कम से कम 35 प्रतिशत की कमी आएगी। अभी तक रेलवे की दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी भारती एयरटेल रही है।
पिछले छह साल से एयरटेल रेलवे को 1.95 लाख मोबाइल फोन कनेक्शन उपलब्ध करा रही है, जिसका इस्तेमाल उसके कर्मचारियों द्वारा देशभर में ‘क्लोज्ड यूजर ग्रुप’ (सीयूजी) में किया जाता है। भारती एयरटेल की वैधता इस साल 31 दिसंबर को समाप्त हो रही है।  रेलवे बोर्ड के 20 नवंबर को जारी आदेश में कहा गया है कि उसने रेलटेल (रेल क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम) भारतीय रेल के लिए नयी सीयूजी योजना को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी दी है, क्योंकि मौजूदा योजना की वैधता 31 दिसंबर, 2018 को समाप्त हो रही है। रेलटेल ने नयी सीयूजी योजना को अंतिम रूप देते हुए रिलायंस जियो इन्फोकॉम को इस योजना के क्रियान्वयन का अनुबंध दिया है। 

रेलवे कर्मचारियों को मिलेंगे ये सेवाएं

इसमें ग्राहक समूह में शामिल किसी भी व्यक्ति को कॉल कर सकता है या कॉल ले सकता है। यह सेवा एसएमएस पर भी लागू होती है। 
इस योजना के तहत रिलायंस जियो 4जी-3जी कनेक्शन उपलब्ध कराएगी व इसमें कॉल मुफ्त होंगी।
कंपनी रेलवे को चार पैकेज उपलब्ध कराएगी। सबसे वरिष्ठ अधिकारियों (दो प्रतिशत) को 125 रुपये मासिक शुल्क का 60 जीबी का प्लान उपलब्ध कराया जाएगा। 
संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों (26 प्रतिशत) को 99 रुपये मासिक शुल्क का 45 जीबी का प्लान, समूह सी कर्मचारियों (72 प्रतिशत) 67 रुपये शुल्क वाला 30 जीबी का प्लान और थोक एसएमएस का 49 रुपये का प्लान उपलब्ध कराएगी। 
नियमित ग्राहकों के लिए जियो का 25 जीबी का प्लान 199 रुपये में उपलब्ध है। 
इसके बाद ग्राहकों को अपने प्लान के टॉपअप के लिए 20 रुपये प्रति जीबी का भुगतान करना होता है। 

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