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रमन सिंह को अब तक भाजपा ने क्यों नहीं दिखाया बाहर का रास्ता?

रमन सिंह को अब तक भाजपा ने क्यों नहीं दिखाया बाहर का रास्ता?

रायपुर. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और डाक्टर रमन सिंह पर लगे गंभीर आरोपों के बाद भाजपा ने अपने कर्मठ कार्यकर्ता मंतूराम पवार को पार्टी से बाहर निकाल दिया है, लेकिन मंतूराम का यह कहना कि मुझे तो निकाल बाहर फेंका...और रमन सिंह को छोड़ दिया...कई तरह के सवाल खड़े करता है.

पाठकों को याद होगा कि वर्ष 2003 में जब अजीत जोगी विधायक खरीद-फरोख्त कांड में फंसे थे तब अरूण जेटली की प्रेस कान्फ्रेंस क बाद कांग्रेस ने जोगी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था. भाजपा में स्थिति थोड़ी अलग है. डाक्टर रमन सिंह के दामाद डीकेएस घोटाले में फंसे हुए हैं तो पत्नी पर नान घोटाले का छींटा है. पुत्र अभिषेक सिंह पर अरबों-खरबों का धन लेकर फरार हो जाने वाली चिटफंड कंपनियों को प्रश्रय देने का आरोप है तो खुद रमन सिंह पर अंतागढ़ टेपकांड और नान घोटाले में संलिप्त होने का आरोप है. कभी उन्हें मिस्टर क्लीन कहा जाता था, लेकिन अब स्थिति दूसरी है. उनके संरक्षण में पल रहे करीबी अफसर मुकेश गुप्ता जेल जाने से बचने के लिए भागते फिर रहे हैं तो संविदा में पदस्थ रहे सुपर सीएम और उनकी पत्नी भी जांच दायरे से गुजर रहे हैं. कुल मिलाकर पूरा कुनबा गंभीर किस्म के आरोपों से घिरा हुआ है. इतने सारे आरोपों के बाद भी अगर रमन सिंह अगर पार्टी में बने हुए हैं तो जरूर कोई बात होगी. बताया जाता है कि रमन को केंद्र के कतिपय नेताओं का संरक्षण मिला हुआ है. केंद्र के नेता ही उनकी रक्षा में लगे हुए हैं. इधर भाजपा में छत्तीसगढ़ के कुछ बड़े नेता जो अब रमन सिंह का राजनीति से सफाया चाहते हैं वे भी कुछ बोल नहीं पा रहे हैं. नान के एक आरोपी शिवशंकर भट्ट और अंतागढ़ टेपकांड में फंसे मंतूराम पवार के खुलकर सामने आ जाने के बाद फिलहाल भाजपा बचाव की मुद्रा में आ गई है. पार्टी के लोगों का कहना है कि सामने दंतेवाड़ा का चुनाव है इसलिए कांग्रेस नए-नए शिगूफे छोड़ रही है.

अमन सिंह का भी नाम

अंतागढ़ उपचुनाव में अपना नाम वापस लेकर सुर्खियों में आए मंतूराम पवार ने अब रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता, करीबी ओपी गुप्ता, संजय अग्रवाल और अमन सिंह के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है. छत्तीसगढ़ में भाजपा के बुरे हश्र के लिए जिम्मेदार अमन सिंह इन दिनों दिल्ली में हैं और एक बिजली कंपनी में कार्यरत है. बताते हैं कि यह कंपनी भी कभी छत्तीसगढ़ में बिजली घर स्थापित करना चाहती थी, लेकिन मामला नहीं जम पाया. इधर पहली किसी एफआईआर में अमन सिंह का नाम जुड़ जाने से भाजपा के एक बड़े वर्ग में खुशी की लहर है. भाजपा में शुचिता और नैतिकता को मानने वाले नेताओं के एक खेमे को यह खुशी तब भी हुई थीं जब भूपेश सरकार ने विवादित पुलिस अफसर मुकेश गुप्ता पर मामला दर्ज किया था.

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