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भाजपाई पृष्ठभूमि वाले अफसर के रसूख के सामने दिव्यांग महिला अफसर लाचार

भाजपाई पृष्ठभूमि वाले अफसर के रसूख के सामने दिव्यांग महिला अफसर लाचार

रायपुर. प्रदेश में पंद्रह साल सत्तासीन रही भारतीय जनता पार्टी की पृष्ठभूमि वाले एक अफसर के रसूख के आगे एक दिव्यांग महिला अफसर लाचार नजर आ रही है. राज्य सरकार के आदेश को लेकर अपने नए विभाग में पहुंची इस दिव्यांग अफसर को विभागीय अधिकारी ज्वाइनिंग नहीं दे रहे हैं क्योंकि जिस अफसर के स्थान पर उसकी पदस्थापना की गई है, वह भाजपा पृष्ठभूमि का है और उसके रसूख के सामने विभागीय अफसर नतमस्तक हैं.

पूरा मामला छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का है, जहां बीते तीन साल के पदस्थ लेखाधिकारी मयंक गुप्ता को राज्य सरकार ने करीब दस रोज पहले संचालक, चिकित्सा शिक्षा में भेज दिया और उनके स्थान पर लोक निर्माण विभाग से चंद्रकिरण देवांगन को छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में लेखाधिकारी बनाकर पदस्थापना दी. राज्य सरकार के आदेश पर चंद्रकिरण देवांगन ने छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में जाकर अपनी ज्वाइनिंग दी परंतु उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दी गई क्योंकि बोर्ड के अफसर मयंक गुप्ता को रिलीव करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं.

चंद्रकिरण देवांगन दिव्यांग हैं तथा अब वे इस बात को लेकर परेशान हैं कि सरकार के आदेश पर ही वे टूरिज्म बोर्ड में काम करने आई थीं, परन्तु बोर्ड के अफसर उसे काम ही नहीं करने दे रहे हैं. दरअसल मयंक गुप्ता का सम्बंध पूर्व मुख्यमंत्री के निज सहायक रहे ओपी गुप्ता से है। इसलिए वे अपना तबादला रुकवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोड़ लगा रहे हैं. पिछले दिनों वे पूर्व मुख्यमंत्री के एक ससुराली रिश्तेदार को लेकर बोर्ड के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव वे भी मिले और तबादले को रुकवाने का आग्रह किया. बताया गया है कि विभाग के आला अफसरों के मौखिक आदेश पर मयंक गुप्ता को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है. इस खींचतान के कारण टूरिज्म बोर्ड का काम रुका हुआ है, जिसमें मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट भी शामिल है.

दरअसल मंडल में लेखाधिकारी की पदस्थापना प्रतिनियुक्ति पर होती है. भाजपा शासनकाल के अंतिम दिनों में मयंक गुप्ता को वित्त विभाग ने प्रतिनियुक्ति पर टूरिज्म बोर्ड भेजा था. अधिकतम समय सीमा तीन साल पूरी करने के कारण राज्य सरकार ने उन्हें टूरिज्म बोर्ड से संचालक, चिकित्सा शिक्षा के कार्यालय में पदस्थापना दी परंतु राज्य सरकार के आदेश के बाद भी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है.

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