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सवाल मत पूछिए पद्मश्री... दबंग दरोगा अनुज शर्मा से... वरना

सवाल मत पूछिए पद्मश्री... दबंग दरोगा अनुज शर्मा से... वरना

राजकुमार सोनी

जब कोई  सीढ़ी-दर-सीढ़ी चढ़कर ऊंचे मुकाम पर पहुंच जाता है तब सीढ़ी के नीचे खड़े लोग अपेक्षा करते हैं कि जो ऊपर पहुंचा है वह विनम्रता के साथ ऊपर चढ़ने में उनकी भी मदद करेगा, लेकिन ऊंचाई में पहुंचा शख्स अगर नीचे खड़े लोगों को कीड़ा-मकोड़ा समझकर थूकने लगे तब...... जी हां तब.... एक दिन लोग सीढ़ी हटा लेते हैं या सीढ़ी लेकर भाग जाते हैं.

यह पूरा कोटेशन किसी महान दार्शनिक का है, लेकिन इसे राजनीति, समाज और अन्य कई संदर्भ में लोग अलग-अलग तरीके से देखते और समझते हैं. इस वाक्य को यहां लिखने की जरूरत इसलिए भी पड़ गई क्योंकि शुक्रवार  को छत्तीसगढ़ के पद्मश्री दबंग दरोगा ( एक छत्तीसगढ़ी फिल्म )अभिनेता अनुज शर्मा ने अपने से एक जूनियर अभिनेता सुनील तिवारी के लिए एक शर्मनाक बयान दिया है. अनुज शर्मा के इस बयान के बाद हर कोई हतप्रभ है. शुक्रवार को दिनभर इस बात की चर्चा होती रही कि क्या एक अभिनेता को नेताओं के जैसी घमंड भरी भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए.अनुज शर्मा को यह बयान क्यों देना पड़ा इसकी जानकारी आगे की लाइनों में हैं,लेकिन पहले यह जान लेते हैं कि अनुज शर्मा ने का बयान क्या है-

उसके ( सुनील तिवारी )  पास कुछ काम नहीं है. उसने पब्लिसिटी पाने के लिए सब किया है. वो कौन होता है मेरे से सवाल पूछने वाला. मुझे उसके सवालों का जवाब देने की जरूरत नहीं है. वो है क्या. ज्यादा से ज्यादा एक-दो फिल्मों में काम किया होगा. इससे वह बड़ा कलाकार नहीं बन जाता. हम काम करने वाले हैं.

दरअसल मल्टीफ्लैक्स में छत्तीसगढ़ी फिल्म लगाए जाने की मांग को लेकर उपजे विवाद के बाद प्रदेश के संस्कृति विभाग के आडिटोरियम में मंत्री ताम्रध्वज साहू ने एक गुरुवार को एक बैठक बुलाई थी. इस बैठक में सिने कलाकारों, निर्माताओं और निर्देशकों से सुझाव देने को कहा गया था. बताते है कि इस बैठक में अनुज शर्मा ने कहा कि राज्य के सभी छबिगृहों में लगने वाला सर्विस चार्ज खत्म किया जाना चाहिए. अनुज शर्मा के इस सुझाव पर अभिनेता सुनील तिवारी ने यह कहकर आपत्ति जताई कि यह मामला एक्जीबिटर-डिस्ट्रीब्यूटर  एसोसिएशन का है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में जब भाजपा की सरकार थीं तब स्वयं अनुज शर्मा ने एक्जीबिटर-डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के साथ मिलकर मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह से मुलाकात की थी और सर्विस चार्ज बढ़ोतरी करवा ली थी. सुनील तिवारी का कहना था कि पहले छविगृह वाले हर टिकट के साथ प्रोड्यूशर से मात्र तीन रुपए सर्विस चार्ज वसूलते थे, लेकिन बाद में दस रुपए वसूला जाने लगा. सुनील का कहना था कि कभी सर्विस चार्ज में बढ़ोतरी तो कभी सर्विस चार्ज खत्म करने की बात करने से कलाकारों का नुकसान होगा और मल्टीफ्लैक्स के खिलाफ चल रहा आंदोलन टूट जाएगा. सुनील तिवारी के इस बयान पर अनुज शर्मा ने कहा- तुम मुझसे सवाल पूछने वाले कौन होते हो.... और फिर वगैरह-वगैरह.

अनुज शर्मा के इस बयान के बाद सिने जगत से जुड़े लोग खुद को आहत महूसस कर रहे हैं. हालांकि बहुत से लोग सार्वजनिक वक्तव्य देने से बचते रहे, लेकिन अधिकांश लोगों ने माना कि अनुज शर्मा का बयान शर्मनाक है. छत्तीसगढ़ सिने एवं टेलीविजन एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष जैन ने अनुज के इस बयान को पद्मश्री की गरिमा के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने साथी कलाकार से बातचीत के दौरान संयम रखना चाहिए था. संतोष जैन ने कहा कि सुनील तिवारी की बात इसलिए वाजिब लगती है क्योंकि यह बात सच है कि अनुज शर्मा ने एक्जीबिटर-डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के साथ मिलकर डाक्टर रमन सिंह से मुलाकात की और सर्विस चार्ज को 20 रुपए बढ़ाने की मांग की थी. हालांकि बाद में दस रुपए पर जाकर सहमति बनी थी. जैन ने कहा कि अगर हिंदी फिल्मों की तुलना में छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सर्विस चार्ज अधिक रहेगा तो छत्तीसगढ़ के सिनेमाघर वाले ज्यादा से ज्यादा छत्तीसगढ़ी फिल्में लगाएंगे. फिल्म निर्माता अनुमोद राजवैद्य ने अनुज शर्मा के बयान को घमंड से भरा बताया. उन्होंने कहा- अगर कोई स्पॉट बाय भी है तो उसे बेहतरी के लिए सवाल पूछने का हक है. अनुज शर्मा खुद को सीनियर कलाकार बताते हैं तो उनका व्यवहार भी सीनियर जैसा होना चाहिए. लेकिन उनके बयान यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उन्हें पद्मश्री कैसे मिल गई. फिल्म निर्देशक क्षमानिधि मिश्रा की भी कमोबेश यही राय है. वे कहते हैं- मल्टीफ्लैक्स में छत्तीसगढ़ी सिनेमा लगाने जाने की मांग को लेकर जब कलाकार आंदोलन के दौरान गिरफ्तार कर लिए गए थे तब पुलिस प्रशासन ने यह बताया था कि सब पर धारा 151 लगेगी, लेकिन मंत्री जी ने साफ कर दिया था कि किसी पर कोई धारा नहीं लगेगी बावजूद इसके अनुज शर्मा हीरोगिरी करते हुए बैठक में मंत्री जी से निवेदन कर रहे थे कि सारे कलाकारों के ऊपर से धारा हटा ली जाए. क्षमानिधि ने कहा कि सुनील तिवारी की आपत्ति जायज थी क्योंकि भाजपा के शासनकाल में अनुज शर्मा ने एक्जीबिटर-डिस्ट्रीब्यूटर  एसोसिएशन को लेकर रमन सिंह से मुलाकात की थी.

इधर अनुज शर्मा ने अपना मोर्चा डॉट कॉम से कहा कि वे अपने बयान पर कायम है. शर्मा ने कहा- कम से कम सुनील तिवारी को मुझसे सवाल पूछने का हक नहीं है. मैं जो कुछ भी करता हूं उसे तकलीफ होती है. अगर मुझे पद्मश्री मिलती है तो भी वह विरोध करता है. मैं मंत्री को सुझाव दे रहा था अगर सुनील तिवारी कोई सुझाव देना था तो मंत्री को देना था. यहीं कारण है कि मंत्री ने उसे डपट दिया था. अनुज शर्मा ने कहा कि उसने कभी भी सर्विस चार्ज को हटा लेने की बात नहीं की थी बल्कि कहा था कि हिंदी फिल्मों की तुलना में छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सर्विस चार्ज ज्यादा होना चाहिए.

अनुज शर्मा के वक्तव्य से आहत सुनील तिवारी ने कहा- अनुज शर्मा से मेरा कोई विरोध नहीं है. जिन मांगों को वे मंत्री जी के सामने रख रहे थे वह कलाकारों का विषय ही नहीं है. अनुज शर्मा ने मुझे छोटा- मोटा कलाकार बताया है. मैं छोटा-मोटा कलाकार ही सही,अपने छत्तीसगढ़ का माथा ऊंचा करने के लिए लगातार प्रत्यनशील रहूंगा. अपनी बात के समर्थन के लिए सुनील तिवारी ने एक फोटो के साथ कुछ लिंक भी भेजी. फोटो में पद्मश्री अनुज शर्मा फिल्म डिस्ट्रीब्यूटरों के साथ दिखाई दे रहे हैं. इस तस्वीर में प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक और डिस्ट्रीब्यूटर जय प्रकाश चौकसे भी नजर आ रहे हैं. एक सिने कलाकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अनुज शर्मा न तो डिस्ट्रीब्यूटर है और न ही एक्जीबिटर है... फिर वे डाक्टर रमन सिंह से मिलने क्यों गए थे. कलाकार ने कहा- पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह से उनके रिश्ते जग-जाहिर है. सबको पता है कि भाजपा शासनकाल में वे क्या-क्या काम करते थे. खरसिया से भाजपा प्रत्याशी ओपी चौधरी के लिए उन्होंने क्या- क्या किया था. कलाकार ने कहा कि अनुज शर्मा को फिल्मों में योगदान देने के लिए नहीं ब्लकि सामाजिक काम के लिए पद्मश्री दी गई थी, लेकिन आज तक यह पता नहीं चल पाया कि उन्होंने कौन सा सामाजिक काम किया था जो सबसे अलग था.

 

 

 

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