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विपक्ष की पिच पर भूपेश बघेल की बैटिंग

विपक्ष की पिच पर भूपेश बघेल की बैटिंग

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के हर सत्र में विपक्षी सदस्य भूपेश बघेल को घेरने के लिए मुस्तैद दिखाई देते रहे हैं, लेकिन पता नहीं क्यों उनकी मुस्तैदी शून्य बटे सन्नाटे जैसे स्लोगन में तब्दील होती रही है. हर सत्र में विपक्ष के सदस्य फार्म में दिखाई देते हैं. खेलने के लिए पिच पर दौड़ा-भागी करते हुए भी नजर आते हैं, लेकिन अचानक भूपेश बघेल बैट लेकर आते हैं और चौका-छक्का जड़कर निकल जाते हैं. विधानसभा के बजट सत्र में इस बार भी यही सब देखने को मिला है. विपक्ष लेंथ से हटकर गेंद फेंकता रहा और गेंद बाउंड्री के बाहर जाती रही. भीतर से टूटा और बिखरा हुआ विपक्ष इस बार भी कोई कमाल नहीं कर पाया.

फिल्म कश्मीर फाइल्स के प्रदर्शन से उभरे ज्वार के बाद विपक्षी सदस्यों को यह लगा था कि वे फिल्म को टैक्स फ्री करने के बहाने प्रदेशवासियों को राष्ट्रवाद का चूरन चटाने में सफल हो जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. विपक्ष ने सदन में इस बात के लिए हो-हल्ला मचाया कि छत्तीसगढ़ की सरकार को फिल्म टैक्स फ्री क्यों नहीं कर रही है? मुख्यमंत्री ने तुरन्त इरादों को भांपकर सदन में ही घोषणा कर दी कि वे फिल्म देखने जा रहे हैं. उन्होंने विपक्ष के सदस्यों को भी साथ चलकर फिल्म देखने का निवेदन किया. जाहिर सी बात है कि उनके इस आमंत्रण के पीछे का मकसद साफ था कि जब तक फिल्म नहीं देख लेते तब-तक फिल्म के टैक्स फ्री होने की घोषणा कैसे कर सकते थे. मुख्यमंत्री ने राज्य  के गणमान्य नागरिकों और पत्रकारों के साथ फिल्म को देखा और हाल के बाहर पत्रकारों से कहा कि फिल्म में आधा-अधूरा सच ही दिखाया गया है. मुख्यमंत्री के आग्रह के बाद भी विपक्षी सदस्य फिल्म देखने नहीं पहुंचे. अब वे उस हाल में नहीं जा रहे हैं जहां उनका कार्यकर्ता फ्री फंट की टिकट लेकर खड़ा है.

विपक्ष उन्हें बड़े भवनों और सड़कों के निर्माण न होने पर घेरना चाहता था लेकिन मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जब सरकार बनी और कैबिनेट की पहली बैठक हुई तब मैंने मुख्य सचिव, सचिव, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों से पूछा कि प्रदेश में इतनी बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बन गई. या बना दी गई है. एक बात बताइए इन बिल्डिंगों से मेरे आदिवासियों भाइयों और खदान प्रभावित क्षेत्र के रहवासियो के जीवन क्या परिवर्तन आया है ? बैठक में उपस्थित एक भी अधिकारी यह बताने की स्थिति में नहीं था कि कोई परिवर्तन आया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ का मद आदिवासी परिवारों और खदान प्रभावित परिवारों पर भी खर्च होना चाहिए. अगर डीएमएफ मद से मिले हुए पैसों से वह अपनी पंसद की चप्पल ले लेगा. अपनी पसंद का कपड़ा खरीद लेगा. अपनी पसंद के हास्पिटल में जाकर इलाज करवा लेगा तो किसी को क्या समस्या है. अगर प्रभावितों के जीवन में परिवर्तन नहीं आता है तो फिर योजनाओं का कोई मतलब नहीं है. मुख्यमंत्री का कहना था कि आदिवासी इलाकों में पहले सड़कों को फोर्स को जाने के  लिए बनाया जाता था, लेकिन अब सड़के आदिवासियों की मांग पर बनती है.

इसमें कोई दो मत नहीं कि भाजपा के शासनकाल में बस्तर के दूरस्थ इलाकों में मौजूद घोटुल को माओवादियों और सरकार के उपक्रम ने खत्म कर दिया था. फोर्स घोटुलों में इस शक पर छापा मारती थीं कि गांव के आदिवासी लड़के और लड़कियां घोटुलों में नक्सलियों को पनाह देते हैं. जबकि वस्तुस्थिति ऐसी नहीं थीं. घोटुलों में मौजूद युवा अपनी संस्कृति और परम्परा का निर्वाह करने के लिए एकत्रित होते थे. एक बार फिर बस्तर के घोटुलों में मांदर की थाप और महुए की गंध लौट आई है. सदन में विपक्ष ने मुख्यमंत्री को संस्कृति के मसले पर भी घेरने की कोशिश की, लेकिन संस्कृति के संरक्षण के लिए सजग रहने वाले मुख्यमंत्री ने बताया कि घोटुल की संस्कृति एक बार फिर जीवित हो उठी है. बस्तर के युवक और युवतियां उन्हें राजधानी रायपुर आकर धन्यवाद दे चुके हैं.

गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रदेश के ही एक मंत्री ने एक जिले में पदस्थ कलेक्टर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थीं. विपक्ष ने जब इस मसले पर सवाल उठाए तो मुख्यमंत्री बघेल ने कहा- डाक्टर साहब अपना अनुभव साझा कर रहे थे. वे नगद के बजाय गोल्ड वगैरह लेते थे, यह सुनते थे. ससुराल वाले, समधी, ये वो. बहुत सुना करते थे. बहुत चर्चाएं भी होती थीं, लेकिन मैं जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि अगर किसी भी अधिकारी-कर्मचारी की पोस्टिंग के बारे में किसी तरह के रेट वगैरह की जानकारी है तो अवश्य दीजिए. चाहे विधायक हो या मंत्री. आप सभी जनप्रतिनिधि हैं. आपकी बात सुर्खियों में आती है.केवल सुर्खियां बटोरने के लिए यह सब न करें. अगर आपके पास जानकारी है तो तथ्यात्मक ढंग से सामने रखिए. पूरी कार्यवाही होगी. निष्पक्ष कार्यवाही होगी और सजा भी मिलेगी. हमारी सरकार में दो-दो एडिशनल डीजी के खिलाफ कार्यवाही हुई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री के समधी के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था. हमारे लाख प्रतिरोध के बावजूद समधी को बचा लिया गया. अपने विभाग पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सिलसिलेवार जवाब तो दिया ही. उन्होंने विनियोग विधेयक पर भी तथ्यों और आंकड़ों के साथ बेहद दमदार तरीके से अपनी बात रखीं. विपक्ष खामोशी से सुनता रहा. भूपेश बघेल के पास अपनी सरकार के बारे में बताने के लिए बहुत कुछ था लेकिन विपक्ष के 14 सदस्यों में से एक की यह मांग थी कि सरकार भांग के नशे को बढ़ावा देने के लिए कुछ सार्थक प्रयास करें. विपक्ष के सदस्य कृष्णमूर्ति बांधी का कहना था कि नशा चाहिए...नशा...ड्रग से चाहिए या अफीम से चाहिए. मुख्यमंत्री को केंद्र के पास प्रस्ताव भेजना चाहिए. मुख्यमंत्री जी भांग के लिए तो कुछ कर ही सकते हैं. भांग के सेवन से अपराध की प्रवृति खत्म होती है. मुख्यमंत्री ने कृष्णमूर्ति बांधी से कहा कि इसके लिए तो अशासकीय संकल्प लाना पड़ जाएगा. कृष्णमूर्ति बांधी ने कहा कि जब भी अशासकीय संकल्प लाया जाएगा मैं उसका समर्थन करूंगा. आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने बांधी से पूछा कि आपको होली में कुछ मिला था या नहीं ? बांधी ने कहा- मिला था...लेकिन कम था.सदन में विपक्ष के सदस्य अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और बृजमोहन अग्रवाल प्रदर्शन संतोषजनक था, लेकिन ये तीन खिलाड़ी कितना खेल सकते थे ? 

राजकुमार सोनी 

9826895207

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