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भूपेश सरकार का तख्ता पलटना चाहते थे जीपी सिंह...खुद पलट गए

भूपेश सरकार का तख्ता पलटना चाहते थे जीपी सिंह...खुद पलट गए

रायपुर. यह आज की नहीं...बहुत पुरानी कहावत है कि जो दूसरों के लिए गढ्ढे खोदता है वह एक न एक दिन खुद उस गढ्ढे में गिर जाता है. देश की राजधानी दिल्ली से गिरफ्तार कर यहां रायपुर लाए गए पुलिस अफसर जीपी सिंह पर यह कहावत एकदम फिट बैठती है. जीपी सिंह छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार का तख्ता पलटना चाहते थे, लेकिन खुद पलट गए. पिछले साल जुलाई के महीने में जब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने उनके ठिकानों पर छापा मारा तब टीम को अनुपात्तहीन संपत्ति के साथ-साथ एक डायरी के पन्नों में यह तथ्य भी मिला था कि वे संवैधानिक रूप से गठित सरकार के खिलाफ घृणा और असंतोष को बढ़ावा के लिए चक्रव्यूह रच रहे थे. जानकार बताते हैं कि डायरी के पन्नों यह उल्लेखित था कि सरकार को गिराने के लिए विभिन्न समाज के लोगों को कैसे भड़काया जा सकता है. कांग्रेस के विधायकों को पराजित करने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है ? सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए कौन सी कार्ययोजना उपयुक्त होगी ? जीपी सिंह यह सब साजिश किस राजनेता के इशारे पर रच रहे थे फिलहाल साफ नहीं है, लेकिन समझा जाता है कि वे किसी बड़े और खौफनाक किस्म के खेल को अंजाम देने में लगे हुए थे.

छत्तीसगढ़ में जब पहली बार जब अजीत जोगी की सरकार बनी थीं तब उन्हें जी पापाजी कहकर संबोधित करने वाले अफसरों की पूरी फौज एक पैर में खड़ी रहती थीं. राजनीति के जानकार इस बात को बखूबी जानते हैं कि सरकार में बहुमत होने के बावजूद जोगी ने भाजपा के 12 विधायकों को कांग्रेस में शामिल करवाया था. इन सबके पीछे बस्तर में विवादित रहे एक पुलिस अफसर के अलावा जीपी सिंह की भूमिका को भी काफी अहम माना गया था. बताते हैं कि 12 विधायकों के घूमने-फिरने और उनके ठहरने का पूरा प्रबंध जीपी सिंह ने ही करवाया था. तब जीपी सिंह सत्ता के इतने ज्यादा करीब थे कि उनकी हर बात सुनी जाती थीं. प्रशासनिक गलियारों में उन्हें सरकार की नाक का बाल भी समझा जाता था. सत्ता से मिले प्रश्रय के चलते जीपी सिंह अपने वरिष्ठ और मातहत अफसरों को भी प्रताड़ित किया करते थे. पाठकों को याद होगा कि बस्तर में एक वरिष्ठ पुलिस अफसर एमडब्लू अंसारी बतौर आईजी पदस्थ थे. एक बार उनके एक गार्ड ने किसी से लूटपाट कर दी. हालांकि इस लूटपाट में अंसारी की कोई संलिप्तता नहीं थीं. बताया जाता है कि तब पुलिस अधीक्षक के तौर पर तैनात जीपी सिंह ने अपने संपर्कों का फायदा उठाते हुए एक चैनल में यह खबर चलवा दी थीं कि लूट का पैसा आईजी अंसारी के घर से बरामद हुआ है. इस घटना के बाद अंसारी हटा दिए गए. अब अंसारी कहते हैं- जिसने मेरे साथ षड़यंत्र रचा... अब वह खुद अपने षड़यंत्रों में फंस गया है. ईश्वर... अल्लाह...खुदा जो कुछ भी कह लीजिए. थोड़ी देर जरूर होती हैं, लेकिन अंधेर नहीं हैं.

अफसर का टोना-टोटका

जो कोई भी अफसर बनता है उससे उम्मीद की जाती हैं कि वह अंधविश्वास से दूर रहता होगा, लेकिन जब जीपी सिंह के ठिकानों पर ईओडब्लू ने छापामार कार्रवाई की तब एक अखबार ने लिखा था-

टीम के अफसरों को यहां से कुछ डायरियां और डायरियों के फटे पन्ने मिले हैं. इस डायरी में जादू-टोने से जुड़ी बातें लिखी हुई हैं. कुछ ऐसा अजीबो-गरीब सामान भी सिंह के यहां से मिला है जो अमूमन तंत्र-मंत्र के काम आता है. एक डायरी में कोड वर्ड में कुछ अफसरों के बारे में अजीब बातें लिखी हैं. जादू-टोने की बातें ये पुलिस महकमे के ही बड़े अधिकारियों के बारे में हैं. डायरी में लिखा है- वह थाईलैंड से 20 पैर वाला कछुआ मंगवा चुका है. उसकी बलि देने के बाद कुछ भी कर सकेगा. इनमें से एक अफसर का नाम "छोटा टकला" लिखा गया है. लिखा है कि छोटे टकले ने एक अफसर का बाल काट लिया है, इसलिए सब कुछ बिगाड़ सकता है. ऐसा अनुमान है कि छोटा टकला प्रदेश के ही एक सीनियर अफसर का कोड वर्ड है.ये फिलहाल कई मामलों में फंसे हुए हैं और इनके खिलाफ जांच जारी है. दो और अफसरों के लिए अनोपचंद- तिलोकचंद लिखा हुआ है. कुछ आईएएस अधिकारियों, सचिव स्तर के अफसरों, कांग्रेस-भाजपा के नेताओं का नाम भी कोड वर्ड में लिखा है.

विवादों से नाता

जीपी सिंह जहां कहीं भी पदस्थ रहे विवादों से घिरे रहे हैं.बता दें कि कुछ साल पहले छत्तीसगढ़ की राजधानी में काफी भूचाल मचा था. भूचाल मचने की वजह यह थीं कि लगभग सौ नक्सलियों ने एक साथ समर्पण किया था. इस समर्पण के बाद जब कुछ अखबारनवीसों ने पतासाजी की तो मालूम हुआ कि जिस किसी को भी नक्सली बनाकर पेश किया गया है वे सबके सब साधारण ग्रामीण थे. गैलंट्री अवार्ड पाने के चक्कर में तब कारनामा भी जीपी सिंह ने किया था.

बिलासपुर के एक पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा की आत्महत्या के पीछे भी जीपी सिंह को जिम्मेदार माना जाता है. हालांकि उन्हें न्यायालय की तरफ से क्लीन चिट मिल गई थीं, लेकिन राहुल शर्मा के परिजनों के अलावा बहुत से लोग यह बात मानने को तैयार नहीं है कि जीपी सिंह पाक-साफ है. बहुत से लोग यह मानते हैं कि राहुल शर्मा एक नेक और ईमानदार अफसर थे. जब उन्हें बहुत अपमानित किया गया तब उन्होंने आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाया था. बातों-बातों में लोग यह भी कहते हैं कि अब राहुल शर्मा की आत्मा जीपी सिंह का पीछा कर रही है.

बताते हैं कि जीपी सिंह ने राजधानी में अपनी पदस्थापना के दौरान एक गैंग तैयार कर रखा था. यह गैंग विवादास्पद जमीन की खोजबीन में लगा रहता था. किसी जमीन पर अगर कोई रसूखदार कब्जा कर लेता था तो पीड़ित पक्ष को कमीशन के आधार पर उसकी जमीन वापस दिलवाने की गांरटी दी जाती थीं.

दुर्ग में आईजी रहने के दौरान 23 अगस्त 2018 को जीपी सिंह ने एक पत्रवार्ता की थीं. इस पत्रवार्ता में उन्होंने बताया था कि  47 लाख का इनामी नक्सली कमांडर पहाड़ सिंह गिरफ्तार कर लिया गया है. पहाड़ सिंह नक्सलियों के शहरी नेटवर्क का भी हिस्सा था. नक्सलियों की भर्ती अभियान का तो वह प्रमुख तो था ही, उनके पैसों का हिसाब भी रखता था. जब उसने सरेंडर किया उस समय नोटबंदी हो गई थी. नक्सली नोटबंदी की दिक्कत से जूझ रहे थे.ऐसे में नक्सलियों ने अपने पुराने नोट बदलने के लिए पहाड़ सिंह के जरिए बाहर भेजे थे. चर्चा थी कि पहाड़ ने लगभग 6 करोड़ रुपए कवर्धा, राजनांदगांव और दुर्ग के कुछ बड़े कारोबारियों को बदलने के लिए दिए थे.पुलिस ये पता लगाने में जुटी रही कि आखिर 6 करोड़ किस-किस कारोबारी को दिए गए. जीपी सिंह और व्यापारियों के सौंपे गए पैसों का क्या कनेक्शन हो सकता है यह अभी साफ होना बाकी है. बहरहाल एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू की टीम ने उन्हें दो दिन की रिमांड पर ले लिया है. फिलहाल वे एसीबी के उसी दफ्तर में कैद हैं जहां के प्रमुख हुआ करते थे.कहते हैं वक्त से बड़ा कोई सिकन्दर कभी पैदा नहीं हुआ. जीपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग के एक पूर्व अफसर ने कहा- पुलिस विभाग में कार्यरत या सेवानिवृत्त बहुत थोड़े से लोगों को ही अच्छा जीवन नसीब हो पाता है. जब कोई अफसर बड़े पद में बैठकर रसूखदार बन जाता है तो वह सबसे पहले शोषित-पीड़ित और वंचितों को कीड़ा-मकोड़ा समझने लगते है. जो कोई भी बेकसूरों और गरीबों को सताता हैं उसे हाय लगती हैं. जो भी अफसर गरीबों को प्रताड़ित करता हैं उन्हें रात की तन्हाई में यह जरूर सोचना चाहिए कि वह अच्छा कर रहा हैं या बुरा ? सच तो यह है कि बेकसूर गरीबों की हाय कभी खाली नहीं जाती.

जीपी सिंह के यहां छापे में यह सब मिला था

 

     . जीपी सिंह के बैंक मैनेजर दोस्त मणि भूषण के घर से एक 2 किलो सोने की पट्टी जिसकी कीमत लगभग एक करोड़ है.

  • कारोबारी प्रीतपाल सिंह चंडोक के बेडरूम से 13 लाख रुपए के बंडल.
  • राजनांदगांव में चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश बाफना के ऑफिस से जीपी सिंह की पत्नी और बेटों के नाम 79 बीमा दस्तावेज.
  • एक से अधिक एचयूएफ अकाउंट जिनमें 64 लाख रुपए हैं. 17 बैंक खाते जिनमें 60 लाख जमा हैं. पीपीएफ अकाउंट जिनमें 10 लाख रुपए हैं.
  • मल्टीनेशनल कंपनियों में 1 करोड़ से अधिक की राशि जमा की गई है.
  • जीपी सिंह की पत्नी और बेटे के नाम पर डाकघर में 29 अकाउंट हैं जिनमें 20 लाख से अधिक की राशि जमा है.
  • जीपी सिंह के परिवार ने 69 बार शेयर और म्युचुअल फंड्स में बड़ी राशि 3 करोड़ का इंवेस्टमेंट किया.
  • उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर हाईवा, जेसीबी, कांक्रीट मिक्सचर जैसी 65 लाख की गाड़ियां खरीदी गई हैं.
  • जीपी सिंह के नाम पर दो प्लॉट, एक फ्लैट, उनकी पत्नी के नाम पर दो मकान, मां के नाम पर 5 प्लॉट एक मकान, पिता के नाम पर 10 प्लॉट, 2 फ्लैट मिले हैं.
  • लगभग 49 लाख के डेढ़ दर्जन से अधिक लैपटॉप, कंप्यूटर, आईपैड और महंगे मोबाइल फोन मिले हैं.

 

 

 

 

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